अनुच्छेद 324 · निर्वाचनों का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण निर्वाचन आयोग में निहित होना
(1) संसद और प्रत्येक राज्य के विधानमंडल के सभी चुनावों और इस संविधान के अधीन आयोजित राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के चुनावों के लिए मतदाता सूचियों की तैयारी और संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण एक आयोग (जिसे इस संविधान में चुनाव आयोग कहा गया है) में निहित होगा ।
(2) चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर निर्धारित अन्य चुनाव आयुक्तों की संख्या होगी, और मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा इस संबंध में बनाए गए किसी कानून के प्रावधानों के अधीन रहते हुए राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
(3) जब किसी अन्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की जाती है तो मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा।
(4) लोकसभा और प्रत्येक राज्य की विधान सभा के प्रत्येक आम चुनाव से पहले, और पहले आम चुनाव से पहले और उसके बाद प्रत्येक राज्य की विधान परिषद के प्रत्येक द्विवार्षिक चुनाव से पहले, राष्ट्रपति चुनाव आयोग से परामर्श करने के बाद ऐसे क्षेत्रीय आयुक्तों को भी नियुक्त कर सकता है जिन्हें वह खंड (1) द्वारा आयोग को सौंपे गए कार्यों के निष्पादन में चुनाव आयोग की सहायता के लिए आवश्यक समझे।
(5) संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, चुनाव आयुक्तों और क्षेत्रीय आयुक्तों की सेवा शर्तें और कार्यकाल ऐसे होंगे जैसा राष्ट्रपति नियम द्वारा निर्धारित कर सकते हैं:
बशर्ते कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान तरीके और समान आधारों पर ही पद से हटाया जाएगा और उनकी नियुक्ति के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा शर्तों में उनके प्रतिकूल परिवर्तन नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना किसी अन्य निर्वाचन आयुक्त या क्षेत्रीय आयुक्त को पद से नहीं हटाया जाएगा।
(6) राष्ट्रपति, या किसी राज्य का राज्यपाल , चुनाव आयोग द्वारा अनुरोध किए जाने पर, चुनाव आयोग या क्षेत्रीय आयुक्त को ऐसे कर्मचारी उपलब्ध कराएगा जो खंड (1) द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए कार्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हों।
