डिजिटल अरेस्ट एक ठगी है: वीडियो कॉल पर कोई अफ़सर गिरफ़्तार नहीं करता
पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर ठग घंटों कैमरे पर बैठाए रखते हैं और “जाँच” के नाम पर पैसे माँगते हैं। भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं है।
धोखाधड़ी से बचाव, शिकायत की प्रक्रिया और भारतीय कानूनों की पूरी लाइब्रेरी — सरल हिंदी में।
अगर हो चुका है
ठगी का पैसा कुछ ही घंटों में कई खातों से होकर निकल जाता है। जल्दी शिकायत से ही बैंक उसे रोक पाता है।
राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन, चौबीसों घंटे। शिकायत जितनी जल्दी दर्ज होगी, पैसा रुकने की संभावना उतनी ज़्यादा।
1930 पर कॉल करेंपूरा विवरण और दस्तावेज़ जोड़ें, पावती संख्या सँभालकर रखें। साइबर अपराध की एफ़आईआर किसी भी थाने में दर्ज हो सकती है।
पोर्टल खोलेंकार्ड या पासबुक पर छपे नंबर पर। लेन-देन विवादित कराएँ, खाता फ़्रीज़ करने को कहें और शिकायत संख्या लिख लें।
पैसा वापस कैसे पाएँकानून तुलना
छह कन्वर्टर — IPC ⇄ BNS, CrPC ⇄ BNSS और साक्ष्य अधिनियम ⇄ BSA — और सब में एक साथ खोज।
कानूनी टूल
हर टूल उस धारा का हवाला देता है जिस पर वह आधारित है, ताकि आप कानून ख़ुद पढ़ सकें।
एफ़आईआर में लिखी धाराएँ यहाँ चिपकाइए — हर धारा का मतलब सरल हिन्दी में।
कोई धारा चुनिए — जमानतीय है या नहीं, संज्ञेय है या नहीं, कौन-सा न्यायालय।
किन अपराधों में दस वर्ष का दंड है, किनमें बिना वारंट गिरफ्तारी हो सकती है, किनका शमन हो सकता है।
एक से अधिक धाराएँ जोड़िए और कुल कारावास व जुर्माने की सीमा देखिए।
कुछ अपराधों में न्यायालय एक निश्चित अवधि के बाद संज्ञान नहीं ले सकता। यह गणना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 514 से 519 (पहले दं.प्र.सं. धारा 468 से 473) पर आधारित है।
चेक अनादर के मामले में तीन तारीखें तय हैं और तीनों कड़ी हैं। बैंक के रिटर्न मेमो की तारीख डालिए — नोटिस, भुगतान और परिवाद की अंतिम तिथियाँ यहीं बन जाएँगी।
तैयार प्रारूप, जिनमें आप केवल खाने भरते हैं और प्रिंट कर लेते हैं। हर प्रारूप अपने ऊपर यह लिखता है कि वह किस उपबंध के अधीन है।
कानूनी गाइड
आपके अधिकारों की सरल गाइड: गिरफ़्तारी पर पुलिस को क्या करना होता है, ज़मानत कैसे मिलती है, और शिकायत कहाँ दर्ज करें।
यह पन्ना अपने फ़ोन में सुरक्षित रखिए। हर अधिकार के साथ उसकी धारा दी गई है।
यह नहीं बताता कि जमानत मिलेगी या नहीं। यह बताता है कि आपकी स्थिति में कौन-सी धारा लागू होती है और वह क्या कहती है।
किस थाने में, किस अधिकारी के पास और किस न्यायालय में — हर बात के साथ उसकी धारा, ताकि आप काउंटर पर उसे दिखा सकें।
कानून लाइब्रेरी
358 धाराएँ
531 धाराएँ
170 धाराएँ
125 धाराएँ
46 धाराएँ
155 धाराएँ
574 धाराएँBNS ने इसकी जगह ली
535 धाराएँBNSS ने इसकी जगह ली
185 धाराएँBSA ने इसकी जगह ली
पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर ठग घंटों कैमरे पर बैठाए रखते हैं और “जाँच” के नाम पर पैसे माँगते हैं। भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं है।
कोई “खरीदार” रिक्वेस्ट भेजकर ज़िद करता है कि पैसे पाने के लिए पिन डालिए। यूपीआई पिन डालने से पैसा हमेशा आपके खाते से जाता है।
वीडियो लाइक करने पर आसान कमाई, फिर “प्रीपेड टास्क”, फिर निकासी के लिए फ़ीस। अगर पैसा निकालने के लिए पैसा देना पड़े, तो वह ठगी है।
ठग आपके नंबर पर नया सिम ले लेता है और आपके ओटीपी उसे मिलने लगते हैं। बिना वजह “नो सर्विस” दिखना पहला संकेत है।
“आज आपका खाता बंद हो जाएगा, तुरंत केवाईसी अपडेट करें।” बैंक ऐसे लिंक नहीं भेजते जो कार्ड, पिन या ओटीपी माँगें या ऐप इंस्टॉल करवाएँ।