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ठगी की पहचान, हो जाने पर क्या करें, और वास्तविक मामले

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साइबर कानून, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा — उसके लिए समझाया गया जिसके साथ यह हो रहा है।

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वास्तविक मामले

असल में हुए साइबर अपराधों के अध्ययन — क्या हुआ, चेतावनी के कौन-से संकेत थे, कौन-सी धाराएँ लगीं और आगे क्या करना चाहिए।

सभी मामले
  • पहचान की चोरी

    कूरियर-कस्टम ठगी: 'आपके नाम के पार्सल में ड्रग्स मिले हैं'

    यह किसी एक असली मामले का ब्यौरा नहीं, बल्कि पूरे देश से आई मिलती-जुलती शिकायतों से बना मिश्रित उदाहरण है; रकम केवल यह दिखाती है कि नुकसान आम तौर पर किस स्तर का होता है, जबकि ठगी का तरीका, चेतावनी के संकेत और कानूनी धाराएँ असली हैं। इसकी सबसे ज़रूरी बात यही है कि कोई भी सरकारी विभाग फ़ोन पर जुर्माना नहीं वसूलता। कस्टम, पुलिस या एनसीबी का कोई भी नोटिस लिखित रूप में आता है, कॉल पर तय की गई 'क्लियरेंस फ़ीस' के रूप में नहीं।

    नुकसान
    ₹3 लाख
    रकम वापस नहीं मिली
  • पहचान की चोरी

    नकली कस्टमर केयर: सर्च में मिला नंबर, स्क्रीन शेयर और खाली खाता

    यह किसी एक असली मामले का ब्यौरा नहीं, बल्कि रोज़ आने वाली मिलती-जुलती शिकायतों से बना मिश्रित उदाहरण है; रकम सिर्फ़ यह दिखाती है कि नुकसान आम तौर पर किस स्तर का होता है, जबकि तरीका, चेतावनी के संकेत और कानूनी धाराएँ असली हैं। यहाँ गड़बड़ी की जड़ यही है कि नंबर कंपनी की वेबसाइट से नहीं, सर्च रिज़ल्ट या किसी विज्ञापन से आया था। और सबसे बड़ा नियम — किसी के कहने पर कभी कोई रिमोट-एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें, क्योंकि स्क्रीन शेयर होते ही आपका ओटीपी और बैंकिंग जानकारी सामने वाले को साफ़ दिखने लगती है।

    नुकसान
    ₹95,000
    रकम आंशिक रूप से वापस मिली
  • डिजिटल अरेस्ट

    डिजिटल अरेस्ट: वीडियो कॉल पर 'गिरफ्तारी' का डर दिखाकर वसूली

    यह किसी एक असली पीड़ित का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि देश भर से आई हज़ारों मिलती-जुलती शिकायतों से बना एक मिश्रित उदाहरण है; यहाँ दी गई रकम सिर्फ़ यह बताती है कि नुकसान आम तौर पर किस स्तर का होता है, जबकि ठगी का तरीका, चेतावनी के संकेत और नीचे दी गई कानूनी धाराएँ असली हैं। भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई चीज़ है ही नहीं और कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती। ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या कस्टम अधिकारी बताकर घंटों कैमरे के सामने बैठाए रखते हैं और 'जाँच के लिए' पैसा ट्रांसफर करा लेते हैं। ऐसी कॉल पर सही जवाब सिर्फ़ एक है — फ़ोन काट देना।

    नुकसान
    ₹12 लाख
    रकम आंशिक रूप से वापस मिली