वॉट्सऐप/सोशल/ईमेल खाता हैक हो गया

किसी और के कब्ज़े में आपका खाता है और आपके नाम से आपके दोस्तों से पैसे माँगे जा रहे हैं, या आप लॉगिन ही नहीं कर पा रहे।

अभी यह कीजिए

  1. चरण 1.

    10 मिनट के भीतर

    जिस मेल/नंबर से खाता जुड़ा है, उससे पासवर्ड रीसेट कीजिए, सभी डिवाइस से लॉगआउट ('log out of all sessions') कीजिए और दो-चरणीय सत्यापन चालू कीजिए। वॉट्सऐप के लिए उसी सिम पर दोबारा ओटीपी से लॉगिन कीजिए और सेटिंग में 'Two-step verification' का पिन लगाइए।

  2. चरण 2.

    20 मिनट के भीतर

    अपने संपर्कों और परिवार को दूसरे रास्ते से बता दीजिए कि खाता हैक है और उनसे आपके नाम पर पैसा माँगा जा सकता है।

  3. चरण 3.

    5 मिनट के भीतर

    1930 पर अभी कॉल कीजिए। यह राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन है और 24 घंटे चालू रहती है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, बैंक के पास रकम रोकने का उतना ही मौका होगा — पहला घंटा सबसे कीमती है।

    1930 पर कॉल करें
  4. चरण 4.

    45 मिनट के भीतर

    खाते की सुरक्षा सेटिंग जाँचिए — जुड़े हुए डिवाइस, ईमेल फ़ॉरवर्डिंग नियम, रिकवरी नंबर और अनुमति पाए हुए ऐप। हैकर अकसर यहीं पिछला दरवाज़ा छोड़ जाते हैं।

  5. चरण 5.

    पहले घंटे में

    उसी प्लेटफ़ॉर्म पर 'hacked account' की रिपोर्ट दर्ज कीजिए और उसकी शिकायत आईडी सुरक्षित रखिए।

  6. चरण 6.

    पहले घंटे में

    cybercrime.gov.in पर लिखित शिकायत दर्ज कीजिए और मिलने वाला acknowledgement नंबर संभालकर रखिए। फ़ोन पर की गई शिकायत भी इसी पोर्टल पर दर्ज होती है, पर लिखित विवरण और दस्तावेज़ आप ही जोड़ सकते हैं।

    cybercrime.gov.in पर दर्ज करें
  7. चरण 7.

    24 घंटे के भीतर

    नज़दीकी थाने या साइबर सेल में जाकर लिखित शिकायत दीजिए और उसकी पावती लीजिए। साइबर अपराध की FIR किसी भी थाने में दर्ज हो सकती है — 'यह हमारे क्षेत्र का नहीं है' कहकर लौटाया नहीं जा सकता।

यह बिल्कुल मत कीजिए

  • 'अकाउंट रिकवरी' का दावा करने वाले किसी व्यक्ति या पेज को पैसे मत दीजिए। रिकवरी हमेशा प्लेटफ़ॉर्म के अपने रास्ते से होती है और मुफ़्त होती है।
  • ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी या पासवर्ड किसी को मत बताइए — बैंक, पुलिस या 'साइबर सेल' बताने वाले को भी नहीं। कोई असली अधिकारी यह कभी नहीं पूछता।
  • चैट, कॉल लॉग, ईमेल या मैसेज मत मिटाइए — गुस्से में भी नहीं। यही आपका सबूत है और मिटने के बाद वापस नहीं आता।
  • वही पासवर्ड दूसरी जगह इस्तेमाल मत कीजिए, और पुराने पासवर्ड पर वापस मत जाइए।

यह सबूत सुरक्षित रखिए

  • हर स्क्रीन का स्क्रीनशॉट लीजिए जिसमें तारीख और समय दिख रहा हो — चैट, पेमेंट स्क्रीन, ईमेल, प्रोफ़ाइल।
  • खाते के लॉगिन इतिहास/सुरक्षा अलर्ट के मेल — जिनमें अनजान डिवाइस, समय और स्थान दिखता हो।
  • भेजने वाले का मोबाइल नंबर, यूपीआई आईडी, ईमेल पता, वॉट्सऐप प्रोफ़ाइल और जिस सोशल मीडिया अकाउंट से संपर्क हुआ उसका लिंक।
  • हर लेन-देन का UTR / संदर्भ संख्या, रकम, समय और जिस खाते या यूपीआई आईडी में पैसा गया उसका पूरा विवरण।
  • मूल मैसेज, मेल और फ़ाइलें अपने फ़ोन/ईमेल में वैसी की वैसी रहने दीजिए — स्क्रीनशॉट के अलावा मूल कॉपी भी सबूत होती है। कुछ भी डिलीट मत कीजिए।

मिलते-जुलते मामले

अभी इस श्रेणी में कोई मामला दर्ज नहीं है।

राष्ट्रीय हेल्पलाइन

राज्यवार साइबर सेल

यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं। गंभीर मामले में किसी अधिवक्ता से अवश्य मिलें।