नौकरी या पार्ट-टाइम काम के नाम पर ठगी

रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, सिक्योरिटी डिपॉज़िट या 'टास्क' के नाम पर पैसा जमा कराया गया, या वॉट्सऐप/टेलीग्राम पर टास्क करके कमाई का झांसा दिया गया।

अभी यह कीजिए

  1. चरण 1.

    5 मिनट के भीतर

    1930 पर अभी कॉल कीजिए। यह राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन है और 24 घंटे चालू रहती है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, बैंक के पास रकम रोकने का उतना ही मौका होगा — पहला घंटा सबसे कीमती है।

    1930 पर कॉल करें
  2. चरण 2.

    15 मिनट के भीतर

    अपने बैंक के आधिकारिक नंबर पर — जो कार्ड के पीछे या पासबुक पर छपा है — कॉल करके लेन-देन विवाद दर्ज कराइए और खाता/कार्ड फ़्रीज़ करवाइए। शिकायत नंबर लिख लीजिए। भारतीय रिज़र्व बैंक के परिपत्र के अनुसार, यदि चूक तीसरे पक्ष की थी और कमी न बैंक की थी न आपकी, तो बैंक की सूचना मिलने के तीन कार्य-दिवस के भीतर बताने पर आपकी ज़िम्मेदारी शून्य रहती है। किंतु यदि ओटीपी, पिन या पासवर्ड आपने स्वयं बता दिया था, तो सूचित करने तक का पूरा नुकसान आपको ही वहन करना होगा — और उसके बाद का नुकसान बैंक को। इसीलिए हर घंटे की देर रकम में जुड़ती जाती है।

  3. चरण 3.

    30 मिनट के भीतर

    और कोई 'टास्क' मत कीजिए और कोई भुगतान मत कीजिए, चाहे बताया जा रहा हो कि आपका पैसा तभी निकलेगा।

  4. चरण 4.

    पहले घंटे में

    जिस जॉब पोर्टल, कंपनी पेज या टेलीग्राम ग्रुप से संपर्क हुआ, उसकी रिपोर्ट उसी प्लेटफ़ॉर्म पर कीजिए — इससे अगले व्यक्ति का बचाव होता है।

  5. चरण 5.

    पहले घंटे में

    cybercrime.gov.in पर लिखित शिकायत दर्ज कीजिए और मिलने वाला acknowledgement नंबर संभालकर रखिए। फ़ोन पर की गई शिकायत भी इसी पोर्टल पर दर्ज होती है, पर लिखित विवरण और दस्तावेज़ आप ही जोड़ सकते हैं।

    cybercrime.gov.in पर दर्ज करें
  6. चरण 6.

    24 घंटे के भीतर

    नज़दीकी थाने या साइबर सेल में जाकर लिखित शिकायत दीजिए और उसकी पावती लीजिए। साइबर अपराध की FIR किसी भी थाने में दर्ज हो सकती है — 'यह हमारे क्षेत्र का नहीं है' कहकर लौटाया नहीं जा सकता।

यह बिल्कुल मत कीजिए

  • नौकरी के लिए पहले पैसा मत दीजिए। असली नियोक्ता कभी उम्मीदवार से फ़ीस नहीं लेता।
  • 'रकम वापस दिलाने' या 'केस बंद कराने' के नाम पर एक रुपया भी और मत दीजिए। पैसा वापस पाने के लिए पहले पैसा माँगना हमेशा दूसरा फ्रॉड होता है।
  • आधार, पैन या बैंक विवरण 'ऑनबोर्डिंग' के नाम पर वॉट्सऐप पर मत भेजिए — इनसे आपके नाम पर खाता या लोन खुल सकता है।
  • चैट, कॉल लॉग, ईमेल या मैसेज मत मिटाइए — गुस्से में भी नहीं। यही आपका सबूत है और मिटने के बाद वापस नहीं आता।

यह सबूत सुरक्षित रखिए

  • हर स्क्रीन का स्क्रीनशॉट लीजिए जिसमें तारीख और समय दिख रहा हो — चैट, पेमेंट स्क्रीन, ईमेल, प्रोफ़ाइल।
  • हर लेन-देन का UTR / संदर्भ संख्या, रकम, समय और जिस खाते या यूपीआई आईडी में पैसा गया उसका पूरा विवरण।
  • भेजने वाले का मोबाइल नंबर, यूपीआई आईडी, ईमेल पता, वॉट्सऐप प्रोफ़ाइल और जिस सोशल मीडिया अकाउंट से संपर्क हुआ उसका लिंक।
  • ऑफ़र लेटर, नियुक्ति पत्र, कंपनी का नाम, वेबसाइट और जो भी दस्तावेज़ भेजे गए हों।
  • मूल मैसेज, मेल और फ़ाइलें अपने फ़ोन/ईमेल में वैसी की वैसी रहने दीजिए — स्क्रीनशॉट के अलावा मूल कॉपी भी सबूत होती है। कुछ भी डिलीट मत कीजिए।

इस पर लागू होने वाली धाराएँ

यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं। गंभीर मामले में किसी अधिवक्ता से अवश्य मिलें।

मिलते-जुलते मामले

अभी इस श्रेणी में कोई मामला दर्ज नहीं है।

राष्ट्रीय हेल्पलाइन

राज्यवार साइबर सेल

यह जानकारी शैक्षिक है, कानूनी सलाह नहीं। गंभीर मामले में किसी अधिवक्ता से अवश्य मिलें।