पैसा वापस पाइए — पहला घंटा
साइबर ठगी में सबसे ज़रूरी चीज़ समय है। जितनी जल्दी शिकायत, उतनी ज़्यादा संभावना कि पैसा रोका जा सके।
बीत चुका समय
ऊपर समय भरते ही बीता हुआ समय और खुली हुई अवधियाँ दिखने लगेंगी।
- पहला घंटा — 1930 पर कॉलबैंक की सूचना से गिना जाएगा — इस घड़ी से नहीं
इसी घंटे में शिकायत दर्ज होने पर बैंकों के पास रकम आगे जाने से रोकने का सबसे अच्छा मौका होता है।
- 24 घंटे — cybercrime.gov.in पर लिखित शिकायतबैंक की सूचना से गिना जाएगा — इस घड़ी से नहीं
फ़ोन पर की गई शिकायत भी इसी पोर्टल पर दर्ज होती है, पर लिखित विवरण और दस्तावेज़ आप ही जोड़ सकते हैं।
- 3 कार्य-दिवस — तीसरे पक्ष की चूक हो तो शून्य ज़िम्मेदारीबैंक की सूचना से गिना जाएगा — इस घड़ी से नहीं
यह शून्य ज़िम्मेदारी बिना शर्त नहीं है। परिपत्र का पैरा 6 इसे दो ही दशाओं में देता है — बैंक की अपनी धोखाधड़ी, उपेक्षा या सेवा में कमी होने पर (तब सूचना कभी भी दी जाए), और तीसरे पक्ष की ऐसी चूक पर जिसमें कमी न बैंक की हो न आपकी, बशर्ते बैंक की सूचना मिलने के तीन कार्य-दिवस के भीतर आपने बता दिया हो। तीन कार्य-दिवस की गिनती बैंक की सूचना से शुरू होती है, लेन-देन से नहीं।
- 4–7 कार्य-दिवस — सीमित ज़िम्मेदारीबैंक की सूचना से गिना जाएगा — इस घड़ी से नहीं
इसी तीसरे पक्ष वाली दशा में यदि सूचना चार से सात कार्य-दिवस के बीच दी जाए, तो ज़िम्मेदारी लेन-देन की राशि या ऊपर दी गई सीमा, जो कम हो, उतनी रहती है।
- 7 कार्य-दिवस के बाद — बैंक की बोर्ड-अनुमोदित नीतिबैंक की सूचना से गिना जाएगा — इस घड़ी से नहीं
परिपत्र यहाँ कोई सीमा नियत नहीं करता: सात कार्य-दिवस से अधिक विलंब होने पर ग्राहक की ज़िम्मेदारी बैंक की बोर्ड-अनुमोदित नीति के अनुसार तय होगी। अधिकांश पीड़ित वास्तव में यहीं पहुँचते हैं, इसलिए अपने बैंक से वह नीति लिखित में माँगिए — प्रमाण का भार बैंक पर है, आप पर नहीं।
- ओटीपी, पिन या पासवर्ड आपने स्वयं बताया था — तबयह कोई अवधि नहीं, नियम है
परिपत्र का पैरा 7 कहता है कि जहाँ नुकसान ग्राहक की उपेक्षा से हुआ हो — जैसे उसने भुगतान की गोपनीय जानकारी स्वयं साझा कर दी हो — वहाँ बैंक को सूचित करने तक का पूरा नुकसान ग्राहक ही वहन करेगा। ऊपर की शून्य और सीमित ज़िम्मेदारी वाली पंक्तियाँ इस दशा पर लागू नहीं होतीं। किंतु सूचना देने के बाद हुआ कोई भी नुकसान बैंक वहन करेगा — इसलिए अभी सूचित करना अब भी सबसे बड़ा बचाव है।
- 10 कार्य-दिवस — विवादित रकम का अस्थायी क्रेडिटआपके बैंक को सूचित करने से गिना जाएगा — इस घड़ी से नहीं
सूचना मिलने पर बैंक विवादित रकम को दस कार्य-दिवस के भीतर आपके खाते में क्रेडिट (shadow reversal) करेगा — बीमा दावे के निपटारे की प्रतीक्षा किए बिना — और मूल्य-तिथि अनधिकृत लेन-देन की तारीख होगी। शिकायत का निपटारा और आपकी ज़िम्मेदारी का निर्धारण बैंक की बोर्ड-अनुमोदित नीति में नियत समय में, किंतु शिकायत मिलने से 90 दिन से अधिक में नहीं, होना चाहिए।
सबूत सुरक्षित रखिए
- हर स्क्रीन का स्क्रीनशॉट जिसमें तारीख और समय साफ़ दिख रहा हो — पेमेंट स्क्रीन, चैट, ईमेल और जिस ऐप या वेबसाइट पर यह हुआ उसका पन्ना।
- हर लेन-देन की UTR / RRN संदर्भ संख्या। बैंक इसी नंबर से पैसे का रास्ता पकड़ता है, और शिकायत में सबसे पहले यही माँगा जाता है।
- जिस यूपीआई आईडी, खाता संख्या और IFSC में पैसा गया — अक्षर-दर-अक्षर वैसा ही, जैसा ऐप में दिख रहा है। याद से मत लिखिए।
- बैंक और यूपीआई ऐप से आए सभी एसएमएस — डेबिट अलर्ट, ओटीपी और बैंक की वह सूचना जिसमें यह लेन-देन बताया गया था। इनमें से कुछ भी मत मिटाइए।
- कॉल लॉग और कोई रिकॉर्डिंग — किस नंबर से बात हुई, कब हुई और कितनी देर। वॉट्सऐप और अन्य ऐप की कॉल भी इसी में गिनी जाती हैं।
बैंक की ज़िम्मेदारी (भारतीय रिज़र्व बैंक)
तीन दिन की गिनती बैंक की सूचना मिलने से शुरू होती है, लेन-देन से नहीं।
शून्य ज़िम्मेदारी
यदि नुकसान बैंक की अपनी धोखाधड़ी, उपेक्षा या सेवा में कमी से हुआ है, तो कभी भी सूचित करने पर आपकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं। तीसरे पक्ष की ऐसी चूक में जिसमें कमी न बैंक की हो न आपकी, बैंक की सूचना मिलने के तीन कार्य-दिवस के भीतर बताने पर भी आपकी ज़िम्मेदारी शून्य है। किंतु जहाँ नुकसान आपकी अपनी उपेक्षा से हुआ हो — जैसे आपने ओटीपी, पिन या पासवर्ड स्वयं बता दिया हो — वहाँ परिपत्र के अनुसार सूचित करने तक का पूरा नुकसान आप ही वहन करेंगे, और उसके बाद का नुकसान बैंक वहन करेगा।
सीमित ज़िम्मेदारी (4–7 कार्य-दिवस)
चार से सात कार्य-दिवस के भीतर बताने पर आपकी ज़िम्मेदारी लेन-देन की राशि या नीचे दी गई सीमा, जो कम हो, उतनी ही रहेगी।
| खाता / साधन | अधिकतम ज़िम्मेदारी |
|---|---|
| बेसिक सेविंग्स बैंक जमा (BSBD) खाते | ₹5,000 |
| अन्य सभी बचत खाते; प्रीपेड भुगतान साधन और गिफ़्ट कार्ड; एमएसएमई के चालू, कैश क्रेडिट व ओवरड्राफ़्ट खाते; ₹25 लाख तक के वार्षिक कारोबार वाले व्यक्तियों के चालू खाते; ₹5 लाख तक की सीमा वाले क्रेडिट कार्ड | ₹10,000 |
| अन्य सभी चालू, कैश क्रेडिट व ओवरड्राफ़्ट खाते; ₹5 लाख से अधिक सीमा वाले क्रेडिट कार्ड | ₹25,000 |
सात कार्य-दिवस के बाद बताने पर ज़िम्मेदारी बैंक की बोर्ड-अनुमोदित नीति से तय होगी।
राशियाँ भारतीय रिज़र्व बैंक के वर्तमान परिपत्र से मिलाइए। RBI/2017-18/15 DBR.No.Leg.BC.78/09.07.005/2017-18, 6 July 2017
