बीएसए → आईईए
196 प्रविष्टियाँ
संक्षिप्त शीर्षक, आवेदन और प्रारंभ तिथि।
(1) इस अधिनियम को भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 कहा जा सकता है। (2) यह किसी भी न्यायालय में या उसके समक्ष सभी न्यायिक कार्यवाही पर लागू होता है, जिसमें कोर्ट-मार्शल भी शामिल है, लेकिन किसी न्यायालय या अधिकारी को प्रस्तुत किए गए हलफनामों पर नहीं, न ही किसी मध्यस्थ के समक्ष कार्यवाही पर। (3) यह ऐसी तिथि 1 से लागू होगा…
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त शीर्षक।
इस अधिनियम को भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 कहा जा सकता है। विस्तार. -- –यह पूरे भारत में लागू होता है 1 [ 2 ***] और किसी भी न्यायालय में या उसके समक्ष सभी न्यायिक कार्यवाही पर लागू होता है, जिसमें कोर्ट-मार्शल भी शामिल हैं, 3 [सेना अधिनियम (44 और 45 विक्ट., सी. 58) के तहत आयोजित कोर्ट-मार्शल को छोड़कर] 4 [नौसेना…
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
(1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-- (क) "न्यायालय" में सभी न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट तथा मध्यस्थों को छोड़कर साक्ष्य लेने के लिए विधिवत अधिकृत सभी व्यक्ति शामिल हैं; (ख) "निर्णायक प्रमाण" का अर्थ है जब इस अधिनियम द्वारा किसी एक तथ्य को दूसरे का निर्णायक प्रमाण घोषित किया जाता है, तो न्यायालय एक…
पूरा पढ़ेंव्याख्या-खंड।
इस अधिनियम में निम्नलिखित शब्दों और अभिव्यक्तियों का प्रयोग निम्नलिखित अर्थों में किया गया है, जब तक कि संदर्भ से विपरीत आशय स्पष्ट न हो:-- "न्यायालय।" -- "न्यायालय" में सभी न्यायाधीश 1 और मजिस्ट्रेट 2 तथा मध्यस्थों को छोड़कर साक्ष्य लेने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत सभी व्यक्ति शामिल हैं। "तथ्य।" -- "तथ्य" का अर्थ है…
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
(1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-- (क) "न्यायालय" में सभी न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट तथा मध्यस्थों को छोड़कर साक्ष्य लेने के लिए विधिवत अधिकृत सभी व्यक्ति शामिल हैं; (ख) "निर्णायक प्रमाण" का अर्थ है जब इस अधिनियम द्वारा किसी एक तथ्य को दूसरे का निर्णायक प्रमाण घोषित किया जाता है, तो न्यायालय एक…
पूरा पढ़ेंउपधारणा कर सकेगा (निर्णय या अनुमान / कुछ विवादित तथ्यों की सत्यता के बारे में कोई निष्कर्ष )
जहाँ कहीं इस अधिनियम द्वारा यह उपबंधित है कि न्यायालय किसी तथ्य की उपधारणा कर सकेगा, वहाँ न्यायालय या तो ऐसे तथ्य को साबित हुआ मान सकेगा, यदि और जब तक वह नासाबित नहीं किया जाता है, या उसके सबूत की मांग कर सकेगा । उपधारणा करेगा - जहाँ कहीं इस अधिनियम द्वारा यह निर्दिष्ट (निदेश देने का कार्य ) है कि न्यायालय किसी तथ्य…
पूरा पढ़ेंमामले से संबंधित तथ्यों और प्रासंगिक तथ्यों के साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
किसी भी मुकदमे या कार्यवाही में विवादित प्रत्येक तथ्य के अस्तित्व या गैर-अस्तित्व के संबंध में और ऐसे अन्य तथ्यों के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत किया जा सकता है जिन्हें आगे प्रासंगिक घोषित किया गया है, और किसी अन्य तथ्य के संबंध में नहीं। स्पष्टीकरण। --यह धारा किसी भी व्यक्ति को ऐसे तथ्य का साक्ष्य देने में सक्षम नहीं…
पूरा पढ़ेंविवाद्यक तथ्यों और सुसंगत तथ्यों को साक्ष्य दिया जा सकेगा
किसी वाद या कार्यवाही में हर विवाद्यक तथ्य के और ऐसे अन्य तथ्यों के, जिन्हें एतस्मिन् पश्चात् सुसंगत घोषित किया गया है, अस्तित्व या अनस्तित्व का साक्ष्य दिया जा सकेगा और किन्हीं अन्यों का नहीं । स्पष्टीकरण : यह धारा किसी व्यक्ति को ऐसे तथ्य का साक्ष्य देने के लिए योग्य नहीं बनाएगी, जिससे सिविल प्रक्रिया से संबंधित…
पूरा पढ़ेंएक ही लेन-देन के अंतर्गत आने वाले तथ्यों की प्रासंगिकता।
वे तथ्य जो भले ही विवाद का विषय न हों, लेकिन विवाद के विषय या प्रासंगिक तथ्य से इस प्रकार जुड़े हों कि वे एक ही लेन-देन का हिस्सा बन जाते हों, प्रासंगिक होते हैं, चाहे वे एक ही समय और स्थान पर घटित हुए हों या अलग-अलग समय और स्थानों पर। चित्र। (क) ए पर बी की पीट-पीटकर हत्या करने का आरोप है। पिटाई के दौरान ए या बी या…
पूरा पढ़ेंएक ही संव्यवहार (कार्य-विवरण) के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगति
जो तथ्य विवाद्य न होते हुए भी किसी विवाद्यक तथ्य से उस प्रकार संसक्त (संबंधित / संयोजित) है कि वे एक ही संव्यवहार के भाग है, वे तथ्य सुसंगत है, चाहे वे उसी समय और स्थान पर या विभिन्न समयों और स्थानों पर घटित हुए हो । दृष्टांत : क)बी का पीटकर उसकी हत्या करने का ऐ अभियुक्त है । ऐ या बी या पास खडे लोगों द्वारा जो कुछ भी…
पूरा पढ़ेंवे तथ्य जो विवादित तथ्यों या प्रासंगिक तथ्यों के अवसर, कारण या परिणाम हों।
वे तथ्य जो प्रासंगिक तथ्यों या विवादित तथ्यों के अवसर, कारण या परिणाम, चाहे तात्कालिक हों या अप्रत्यक्ष, हों, या जो उन परिस्थितियों का निर्माण करते हों जिनके अंतर्गत वे घटित हुए हों, या जिन्होंने उनके घटित होने या लेन-देन का अवसर प्रदान किया हो, प्रासंगिक होते हैं। रेखांकन (क) प्रश्न यह है कि क्या ए ने बी को लूटा। यह…
पूरा पढ़ेंवे तथ्य जो विवाद्यक तथ्यों के प्रसंग, हेतुक (कारण / मामला ) या परिणाम है
वे तथ्य सुसंगत है, जो सुसंगत तथ्यों के या विवाद्यक तथ्यों के अव्यवहित (सीधा / तुरन्त / आसन्न ) या अन्यथा प्रसंग, हेतुक या परिणाम है, या जो उस वस्तुस्थिति को गठित करतें है, जिसके अन्तर्गत वे घटित हुए या जिसने उनके घटने या संव्यवहार का अवसर दिया । दृष्टांत : क)प्रश्न यह है कि क्या ऐ ने बी को लूटा । ये तथ्य सुसंगत है कि…
पूरा पढ़ेंउद्देश्य, तैयारी और पूर्व या बाद का आचरण।
(1) कोई भी तथ्य प्रासंगिक है जो किसी विवादित तथ्य या प्रासंगिक तथ्य के लिए मकसद या तैयारी को दर्शाता है या गठित करता है। (2) किसी मुकदमे या कार्यवाही में किसी पक्षकार का, या किसी पक्षकार के किसी एजेंट का, ऐसे मुकदमे या कार्यवाही के संदर्भ में, या उसमें विवादित या उससे संबंधित किसी तथ्य के संदर्भ में आचरण, और किसी ऐसे…
पूरा पढ़ेंउद्देश्य, तैयारी और पूर्व या बाद का आचरण।
कोई भी तथ्य प्रासंगिक है जो किसी विवादित तथ्य या प्रासंगिक तथ्य के लिए मकसद या तैयारी को दर्शाता है या उसका गठन करता है। किसी मुकदमे या कार्यवाही में किसी पक्षकार का, या किसी पक्षकार के किसी एजेंट का, ऐसे मुकदमे या कार्यवाही के संदर्भ में, या उसमें विवादित या उससे संबंधित किसी तथ्य के संदर्भ में किया गया आचरण, और किसी…
पूरा पढ़ेंविवाद में उल्लिखित तथ्य या प्रासंगिक तथ्यों को स्पष्ट करने या प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक तथ्य।
किसी विवादित तथ्य या प्रासंगिक तथ्य को स्पष्ट करने या प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक तथ्य, या जो विवादित तथ्य या प्रासंगिक तथ्य द्वारा सुझाए गए निष्कर्ष का समर्थन या खंडन करते हैं, या जो किसी वस्तु या व्यक्ति की पहचान स्थापित करते हैं जिसकी पहचान प्रासंगिक है, या उस समय या स्थान को निर्धारित करते हैं जहां कोई विवादित…
पूरा पढ़ेंसुसंगत तथ्यों के स्पष्टीकरण या पुन:स्थापन के लिए आवश्यक तथ्य
वे तथ्य, जो विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य के स्पष्टीकरण या पुन:स्थापन के लिए आवश्यक है अथवा जो किसी विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य द्वारा इंगित अनुमान का समर्थन या खण्डन करते है, अथवा जो किसी व्यक्ति या वस्तु का, जिसकी अनन्यता (परिचय / पहचान ) सुसंगत हो, अनन्यता स्थापित करते है, अथवा वह समय या स्थान स्थिर करते है, जब या…
पूरा पढ़ेंकिसी साझा योजना के संदर्भ में षड्यंत्रकारियों द्वारा कही या की गई बातें।
जहां यह मानने का उचित आधार हो कि दो या दो से अधिक व्यक्तियों ने मिलकर कोई अपराध या दंडनीय अपराध करने की साजिश रची है, तो ऐसे व्यक्तियों में से किसी एक द्वारा उनके साझा इरादे के संदर्भ में कही गई, की गई या लिखी गई कोई भी बात, उस समय के बाद जब उनमें से किसी एक ने पहली बार ऐसा इरादा किया था, साजिश में शामिल माने जाने…
पूरा पढ़ेंसामान्य परिकल्पना के बारे में षडयंत्रकारी द्वारा कही या की गई बातें
जहाँ कि यह विश्वास करने का युक्तियुक्त आधार है कि दो या अधिक व्यक्तियों ने अपराद या अनुयोज्य (व्यवहार्य ) दोष करने के लिए मिलकर षडयंत्र किया है, वहाँ उनके सामान्य आशय के बारे में उनमें से किसी एक व्यक्ति द्वारा उस समय के पश्चात् जब ऐसा आशय उनमें से किसी एक ने प्रथम बार मन में धारण किया, कही गई कोई बात उन व्यक्तियों…
पूरा पढ़ेंजब अप्रासंगिक तथ्य प्रासंगिक हो जाते हैं।
जो तथ्य अन्यथा प्रासंगिक नहीं हैं, वे भी प्रासंगिक हैं-- (1) यदि वे किसी विवादित तथ्य या प्रासंगिक तथ्य के साथ असंगत हों; (2) यदि वे स्वयं या अन्य तथ्यों के साथ मिलकर किसी विवादित तथ्य या प्रासंगिक तथ्य के अस्तित्व या गैर-अस्तित्व को अत्यधिक संभावित या असंभावित बना दें। चित्र। (क) प्रश्न यह है कि क्या 'ए' ने…
पूरा पढ़ेंवे तथ्य जा अन्यथा सुसंगत नहीं है कब सुसंगत है
वे तथ्य, जो अन्यथा सुसंगत नहीं है, सुसंगत है - १)यदि वे किसी विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य से असंगत है, २)यदि वे स्वयंमेव या अन्य तथ्यों के संसर्ग में किसी विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य का अस्तित्व याअनस्तित्व अत्यंत अधिसम्भाव्य या अनधिसम्भाव्य बनाते है । दृष्टांत : क)प्रश्न यह है कि क्या ऐ ने किसी अमुक दिन कोलकाता में…
पूरा पढ़ेंक्षतिपूर्ति के मुकदमों में वे तथ्य प्रासंगिक होते हैं जो न्यायालय को क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित करने में सक्षम बनाते हैं।
जिन मुकदमों में हर्जाने का दावा किया जाता है, उनमें कोई भी तथ्य जो न्यायालय को दिए जाने वाले हर्जाने की राशि निर्धारित करने में सक्षम बनाता है, प्रासंगिक होता है।
पूरा पढ़ेंनुकसानी के लिए वादों में रकम अवधारित करने के लिए न्यायालय को समर्थ करने की प्रवृत्ति रखने वाले तथ्य सुसंगत है
उन वादों में, जिनमें नुकसानी का दावा किया गया है, कोई भी तथ्य सुसंगत है जिससे न्यायालय नुकसानी की वह रकम अवधारित करने के लिए समर्थ हो जाए, जो अधिनिर्णीत (किया गया निर्णय ) की जानी चाहिए ।
पूरा पढ़ेंजब अधिकार या रीति-रिवाज पर सवाल उठता है तो प्रासंगिक तथ्य।
जहां किसी अधिकार या प्रथा के अस्तित्व का प्रश्न हो, वहां निम्नलिखित तथ्य प्रासंगिक होते हैं-- (क) कोई भी ऐसा लेन-देन जिसके द्वारा प्रश्नगत अधिकार या प्रथा का सृजन, दावा, संशोधन, मान्यता, अभिकथन या खंडन किया गया हो, या जो उसके अस्तित्व के साथ असंगत हो; (ख) वे विशेष उदाहरण जिनमें अधिकार या प्रथा का दावा किया गया,…
पूरा पढ़ेंजबकि अधिकार या रुढि प्रश्नगत है तब सुसंगत तथ्य
जहाँ कि किसी अधिकार या रुढि के अस्तित्व के बारे में प्रश्न है, निम्नलिखित तथ्य सुसंगत है - क)कोई संव्यवहार, जिसके द्वारा प्रश्नगत अधिकार या रुढि सृष्ट, दावाकृत, उपांतरित (परिवर्तित ), मान्यकृत, प्राख्यात या प्रत्याख्यात की गई थी या जो उसके अस्तित्व से असंगत था, ख)वे विशिष्ट उदाहरण, जिनमें वह अधिकार या रुढि दावाकृत,…
पूरा पढ़ेंऐसे तथ्य जो मन की अवस्था, शरीर की अवस्था या शारीरिक संवेदना के अस्तित्व को दर्शाते हैं।
किसी विशेष व्यक्ति के प्रति इरादा, ज्ञान, सद्भावना, लापरवाही, जल्दबाजी, दुर्भावना या सद्भावना जैसी किसी भी मानसिक स्थिति के अस्तित्व को दर्शाने वाले तथ्य, या शरीर या शारीरिक संवेदना की किसी भी स्थिति के अस्तित्व को दर्शाने वाले तथ्य, तब प्रासंगिक होते हैं, जब ऐसी किसी मानसिक या शारीरिक या शारीरिक संवेदना की स्थिति का…
पूरा पढ़ेंमन या शरीर की दशा या शारीरिक संवेदना का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्य
मन की कोई भी दशा जैसे आशय, ज्ञान, सद्भाव, उपेक्षा, उतावलापरन, किसी विशिष्ट व्यक्ति के प्रति वैमनस्य या सदिच्छा दर्शित करने वाले अथवा शरीर की या शारीरिक संवेदना की किसी दशा का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्य तब सुसंगत है, जबकि ऐसी मन की या शरीर की या शारिरिक संवेदना की किसी ऐसी दशा का अस्तित्व विवाद्य या सुसंगत है ।…
पूरा पढ़ेंवे तथ्य जो इस प्रश्न से संबंधित हैं कि कृत्य आकस्मिक था या जानबूझकर किया गया था।
जब यह सवाल उठता है कि कोई कार्य आकस्मिक था या जानबूझकर किया गया था, या किसी विशेष ज्ञान या इरादे से किया गया था, तो यह तथ्य प्रासंगिक होता है कि ऐसा कार्य समान घटनाओं की एक श्रृंखला का हिस्सा था, जिनमें से प्रत्येक में कार्य करने वाला व्यक्ति शामिल था। चित्र। (क) ए पर आरोप है कि उसने बीमाकृत धन प्राप्त करने के लिए…
पूरा पढ़ेंकार्य आकस्मिक या साशय था इस प्रश्न पर प्रकाश डालने वाला तथ्य
जबकि प्रश्न यह है कि कार्य आकस्मिक या साशय था या किसी विशिष्ट ज्ञान या आशय से किया गया था, तब यह तथ्य कि ऐसा कार्य समरुप घटनाओं की आवली ( क्रमबद्धता ) का भाग था जिनमें से हर घटना के साथ वह कार्य करने वला व्यक्ति सम्पृक्त (वास्ता रखने वाला )था, सुसंगत है । दृष्टांत : क)ऐ पर यह अभियोग है कि अपने गृह के बीमे का धन…
पूरा पढ़ेंप्रासंगिक होने पर व्यवसाय के पाठ्यक्रम का अस्तित्व।
जब यह सवाल उठता है कि कोई विशेष कार्य किया गया था या नहीं, तो किसी भी व्यावसायिक प्रक्रिया का अस्तित्व, जिसके अनुसार वह कार्य स्वाभाविक रूप से किया गया होता, एक प्रासंगिक तथ्य है। चित्र। (क) प्रश्न यह है कि क्या कोई विशेष पत्र भेजा गया था। यह तथ्य प्रासंगिक है कि सभी पत्रों को एक निश्चित स्थान पर रखना सामान्य…
पूरा पढ़ेंकारबार के अनुक्रम का अस्तित्व कब सुसंगत है
जबकि प्रश्न यह है कि क्या कोई विशिष्ट कार्य किया गया था, तब कारबार के ऐसे किसी भी अनुक्रम का अस्तित्व, जिसके अनुसार वह कार्य स्वभावत: किया जाता, सुसंगत तथ्य है । दृष्टांत : क)प्रश्न यह ह कि क्या एक विशिष्ट पत्र प्रषित किया गया था । ये तथ्य कि कारबार का यह साधारण अनुक्रम था कि वे सभी पत्र, जो किसी खास स्थान में रख दिए…
पूरा पढ़ेंप्रवेश की परिभाषा।
स्वीकारोक्ति एक मौखिक, दस्तावेजी या इलेक्ट्रॉनिक रूप में दिया गया बयान है, जो किसी विवादित तथ्य या प्रासंगिक तथ्य के बारे में कोई अनुमान लगाता है, और जो नीचे उल्लिखित व्यक्तियों में से किसी एक द्वारा और नीचे उल्लिखित परिस्थितियों में दिया गया हो।
पूरा पढ़ेंप्रवेश की परिभाषा।
स्वीकारोक्ति एक बयान है, 1 [मौखिक या दस्तावेजी या इलेक्ट्रॉनिक रूप में निहित], जो किसी विवादित तथ्य या प्रासंगिक तथ्य के बारे में कोई अनुमान लगाता है, और जो निम्नलिखित में से किसी भी व्यक्ति द्वारा और परिस्थितियों के तहत किया जाता है।
पूरा पढ़ेंमुकदमे में शामिल पक्ष या उसके प्रतिनिधि द्वारा प्रवेश।
(1) कार्यवाही में किसी पक्ष द्वारा या ऐसे किसी पक्ष के किसी एजेंट द्वारा दिए गए बयान, जिन्हें न्यायालय मामले की परिस्थितियों के अनुसार, उनके द्वारा स्पष्ट रूप से या परोक्ष रूप से उन्हें देने के लिए अधिकृत मानता है, स्वीकारोक्ति हैं। (2) द्वारा दिए गए कथन-- (i) मुकदमों में पक्षकार जो प्रतिनिधि के रूप में मुकदमा कर रहे…
पूरा पढ़ेंस्वीकृति - कार्यवाही के पक्षकार या उसके अभिकर्ता द्वारा
वे कथन स्वीकृतियाँ है, जिन्हें कार्यवाही के किसी पक्षकार ने किया हो, या ऐसे किसी पक्षकार के ऐसे किसी अभिकर्ता ने किया हो जिसे मामले की परिस्थितियों में न्यायालय उन कथनों को करने के लिए उस पक्षकार द्वारा अभिव्यक्त या विवक्षित रुप से प्राधिकृत किया हुआ मानता है । प्रतिनिधिक रुप से वादकर्ता द्वारा - वाद से ऐसे पक्षकारों…
पूरा पढ़ेंउन व्यक्तियों द्वारा स्वीकारोक्ति जिनकी स्थिति मुकदमे में पक्षकार के विरुद्ध सिद्ध की जानी चाहिए।
जिन व्यक्तियों की स्थिति या दायित्व को मुकदमे के किसी पक्ष के विरुद्ध सिद्ध करना आवश्यक है, उनके द्वारा दिए गए कथन स्वीकारोक्ति माने जाते हैं, यदि ऐसे कथन उनके द्वारा या उनके विरुद्ध लाए गए मुकदमे में उनकी स्थिति या दायित्व के संबंध में प्रासंगिक हों, और यदि वे कथन उस समय दिए गए हों जब कथन देने वाला व्यक्ति ऐसी स्थिति…
पूरा पढ़ेंउन व्यक्तियों द्वारा स्वीकृतियाँ जिनकी स्थिति वाद के प्रक्षकारां के विरुद्ध साबित की जानी चाहिए
वे कथन, जो उन व्यक्तियों द्वारा किए गए है जिनकी वाद के किसी पक्षकार के विरुद्ध स्थिति या दायित्व साबित करना आवश्यक है, स्वीकृतियाँ है, यदि ऐसे कथन ऐसे व्यक्तियों द्वारा, या उन पर लाए गए वाद में ऐसी स्थिति या दायित्व के संबंध में ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध सुसंगत होते और यदि वे उस समय किए गए हो जबकि उन्हें करने वाला…
पूरा पढ़ेंमुकदमे में पक्षकार द्वारा स्पष्ट रूप से संदर्भित व्यक्तियों द्वारा स्वीकारोक्तियाँ।
किसी विवादित मामले के संबंध में जिन व्यक्तियों से मुकदमे के पक्षकारों ने स्पष्ट रूप से जानकारी मांगी हो, उनके द्वारा दिए गए बयान स्वीकारोक्ति माने जाते हैं। चित्रण सवाल यह है कि क्या A द्वारा B को बेचा गया घोड़ा स्वस्थ है या नहीं। A, B से कहता है-- "जाओ और C से पूछो, C को इसके बारे में सब पता है"। C का यह कथन एक…
पूरा पढ़ेंवाद के पक्षकार द्वारा अभिव्यक्त रुप से निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा स्वीकृतियाँ
वे कथन, जो उन व्यक्तियों द्वारा किए गए है जिनको वाद के किसी पक्षकार ने किसी विवादग्रस्त विषय के बारे में जानकारी के लिए अभिव्यक्त रुप से निर्दिष्ट किया है, स्वीकृतियाँ है । दृष्टांत : प्रश्न यह है कि क्या ऐ द्वारा बी को बेचा हुआ घोडा अच्छा है । बी से ऐ कहता है कि जाकर सी से पूछ लो, सी इस बारे में सबकुछ जानता है । सी…
पूरा पढ़ेंउन व्यक्तियों के विरुद्ध और उनके द्वारा या उनकी ओर से स्वीकारोक्तियों का प्रमाण।
स्वीकारोक्तियाँ प्रासंगिक होती हैं और उन्हें स्वीकारोक्ति करने वाले व्यक्ति या उसके प्रतिनिधि के विरुद्ध सिद्ध किया जा सकता है; लेकिन स्वीकारोक्ति करने वाले व्यक्ति या उसके प्रतिनिधि द्वारा या उनकी ओर से उन्हें सिद्ध नहीं किया जा सकता है, सिवाय निम्नलिखित मामलों के, अर्थात्:-- (1) स्वीकारोक्ति को स्वीकारोक्ति करने…
पूरा पढ़ेंस्वीकृतियों का उन्हें करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध और उनके द्वारा या उनकी और से साबित किया जाना
स्वीकृतियाँ उन्हें करने वाले व्यक्ति के या उसके हित प्रतिनिधि के विरुद्ध सुसंगत है और साबित की जा सकेगी, किन्तु उन्हें करने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी और से या उसके हित प्रतिनिधि द्वारा निम्नलिखित अवस्थाओं में के सिवाय उन्हे साबित नहीं किया जा सकेगा :- १)कोई स्वीकृति उसे करने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से तब…
पूरा पढ़ेंजब दस्तावेजों की विषयवस्तु के संबंध में मौखिक स्वीकारोक्ति प्रासंगिक हो।
किसी दस्तावेज़ की विषयवस्तु के संबंध में मौखिक स्वीकारोक्ति तब तक प्रासंगिक नहीं होती, जब तक कि उसे साबित करने का प्रस्ताव करने वाला पक्ष यह न दिखा दे कि वह नीचे दिए गए नियमों के अनुसार ऐसे दस्तावेज़ की विषयवस्तु के द्वितीयक साक्ष्य प्रस्तुत करने का हकदार है, या जब तक प्रस्तुत दस्तावेज़ की प्रामाणिकता पर प्रश्नचिह्न न…
पूरा पढ़ेंदस्तावेजों की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियाँ कब सुसंगत होती है
किसी दस्तावेज की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियाँ तब तक सुसंगत नहीं होती, यदि और जब तक उन्हें साबित करने की प्रस्थापना करने वाला पक्षकार यह दर्शित न कर दे कि ऐसी दस्तावेज की अंतर्वस्तुओं का द्वितीयक साक्ष्य देने का वह एतस्मिन पश्चात दिए हुए नियमों के अधीन हकदार है, अथवा जब तक पेश की गई दस्तावेज का असली होना…
पूरा पढ़ेंहटाई गई धारा
DELETED
इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियाँ कब सुसंगत होती है
किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियाँ तब तक सुसंगत नहीं होती जब तक पेश किए गए इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख का असली होना प्रश्नगत न हो ।
पूरा पढ़ेंप्रासंगिक होने पर दीवानी मामलों में स्वीकारोक्ति।
दीवानी मामलों में कोई भी स्वीकारोक्ति प्रासंगिक नहीं होती है, यदि वह इस स्पष्ट शर्त पर की गई हो कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाना चाहिए, या ऐसी परिस्थितियों में की गई हो जिससे न्यायालय यह अनुमान लगा सके कि पक्षकारों ने आपस में सहमति व्यक्त की थी कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाना चाहिए। स्पष्टीकरण। -इस धारा में ऐसा कुछ भी…
पूरा पढ़ेंसिविल मामलों में स्वीकृतियाँ कब सुसंगत होती है
सिविल मामलों में कोई भी स्वीकृति सुसंगत नहीं है, यदि वह या तो इस अभिव्यक्त शर्त पर की गई हो कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाएगा या ऐसी परिस्थितियाँ के अधीन दी गई हो जिनसे न्यायालय यह अनुमान कर सके कि पक्षकार इस बात पर परस्पर समहत हो गए थे कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाना चाहिए । स्पष्टीकरण : इस धारा की कोई भी बात किसी…
पूरा पढ़ेंप्रलोभन, धमकी, दबाव या वादे के कारण लिया गया इकबालिया बयान, जब आपराधिक कार्यवाही में अप्रासंगिक हो।
किसी आपराधिक कार्यवाही में किसी आरोपी व्यक्ति द्वारा दिया गया इकबालिया बयान अप्रासंगिक होता है, यदि न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि इकबालिया बयान किसी प्राधिकारी व्यक्ति द्वारा आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोप के संबंध में किसी प्रलोभन, धमकी, दबाव या वादे के कारण दिया गया है, और न्यायालय की राय में, यह पर्याप्त…
पूरा पढ़ेंउत्प्रेरणा, धमकी या वचन द्वारा कराई गई संस्वीकृति दाण्डिक कार्यवाही में कब विसंगत होती है
अभियुक्त व्यक्ति द्वारा की गई संस्वीकृति दाण्डिक कार्यवाही में विसंगत होती है, यदि उसके किए जाने के बारे में न्यायालय को प्रतीत होता हो कि अभियुक्त व्यक्ति के विरुद्ध आरोप के बारे में वह ऐसी उत्प्रेरणा, धमकी या वचन द्वारा कराई गई है जो प्राधिकारवान् व्यक्ति की ओर से दिया गया है और जो न्यायालय की राय में इसके लिए…
पूरा पढ़ेंप्रलोभन, धमकी, दबाव या वादे के कारण लिया गया इकबालिया बयान, जब आपराधिक कार्यवाही में अप्रासंगिक हो।
किसी आपराधिक कार्यवाही में किसी आरोपी व्यक्ति द्वारा दिया गया इकबालिया बयान अप्रासंगिक होता है, यदि न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि इकबालिया बयान किसी प्राधिकारी व्यक्ति द्वारा आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोप के संबंध में किसी प्रलोभन, धमकी, दबाव या वादे के कारण दिया गया है, और न्यायालय की राय में, यह पर्याप्त…
पूरा पढ़ेंउत्पेरणा, धमकी या वचन से पैदा हुए मन पर प्रभाव के दूर हो जाने के पश्चात् की गई संस्वीकृति सुसंगत है
यदि ऐसी कोई संस्वीकृति, जैसी धारा २४ में निर्दिष्ट है, न्यायालय की राय में उसके मन पर प्रभाव के, जो ऐसी किसी उत्प्रेरणा, धमकी या वचन से कारित हुआ है, पूर्णत: दूर हो जाने के पश्चात् की गई है, तो वह सुसंगत है ।
पूरा पढ़ेंप्रलोभन, धमकी, दबाव या वादे के कारण लिया गया इकबालिया बयान, जब आपराधिक कार्यवाही में अप्रासंगिक हो।
किसी आपराधिक कार्यवाही में किसी आरोपी व्यक्ति द्वारा दिया गया इकबालिया बयान अप्रासंगिक होता है, यदि न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि इकबालिया बयान किसी प्राधिकारी व्यक्ति द्वारा आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोप के संबंध में किसी प्रलोभन, धमकी, दबाव या वादे के कारण दिया गया है, और न्यायालय की राय में, यह पर्याप्त…
पूरा पढ़ेंअन्यथा सुसंगत संस्वीकृति का गुप्त रखने के वचन आदि के कारण विसंगत न हो जाना
यदि ऐसी संस्वीकृति अन्यथा सुसंगत है, तो वह केवल इसलिए कि वह गुप्त रखने के वचन के अधीन या उसे अभिप्राप्त करने के प्रयोजनार्थ अभियुक्त व्यक्ति से की गई प्रवंचना (धोका देने का या ठगने का काम) के परिणामस्वरुप, या उस समय जबकि वह मत्त था, की गई थी अथवा इसलिए कि ऐसे प्रश्नों के, चाहे उनका रुप कैसा ही क्यों न रहा हो, उत्तर…
पूरा पढ़ेंपुलिस अधिकारी के समक्ष अपराध स्वीकारोक्ति।
(1) किसी पुलिस अधिकारी के समक्ष दिया गया कोई भी इकबालिया बयान किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध सिद्ध नहीं किया जाएगा। (2) किसी पुलिस अधिकारी की हिरासत में रहते हुए किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया कोई भी इकबालिया बयान, जब तक कि वह मजिस्ट्रेट की तत्काल उपस्थिति में न दिया गया हो, उसके विरुद्ध सिद्ध नहीं किया जाएगा।…
पूरा पढ़ेंपुलिस ऑफिसर से की गई संस्वीकृति का साबित न किया जाना
पुलिस ऑफिसर से की गई कोई भी संस्वीकृति किसी अपराध के अभियुक्त व्यक्ति के विरुद्ध साबित न की जाएगी ।
पूरा पढ़ेंपुलिस अधिकारी के समक्ष अपराध स्वीकारोक्ति।
(1) किसी पुलिस अधिकारी के समक्ष दिया गया कोई भी इकबालिया बयान किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध सिद्ध नहीं किया जाएगा। (2) किसी पुलिस अधिकारी की हिरासत में रहते हुए किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया कोई भी इकबालिया बयान, जब तक कि वह मजिस्ट्रेट की तत्काल उपस्थिति में न दिया गया हो, उसके विरुद्ध सिद्ध नहीं किया जाएगा।…
पूरा पढ़ेंपुलिस ऑफिसर से की गई संस्वीकृति का साबित न किया जाना
पुलिस ऑफिसर से की गई कोई भी संस्वीकृति किसी अपराध के अभियुक्त व्यक्ति के विरुद्ध साबित न की जाएगी ।
पूरा पढ़ेंपुलिस अधिकारी के समक्ष अपराध स्वीकारोक्ति।
(1) किसी पुलिस अधिकारी के समक्ष दिया गया कोई भी इकबालिया बयान किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध सिद्ध नहीं किया जाएगा। (2) किसी पुलिस अधिकारी की हिरासत में रहते हुए किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया कोई भी इकबालिया बयान, जब तक कि वह मजिस्ट्रेट की तत्काल उपस्थिति में न दिया गया हो, उसके विरुद्ध सिद्ध नहीं किया जाएगा।…
पूरा पढ़ेंपुलिस की अभिरक्षा में होते हुए अभियुक्त द्वारा की गई संस्वीकृति का उसके विरुद्ध साबित न किया जाना
किसी भी व्यक्ति द्वारा उस समय, जब कि वह पुलिस ऑफिसर की अभिरक्षा में है, की गई कोई भी संस्वीकृति ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध साबित न की जाएगी, जब तक कि वह मजिस्ट्रेट की तुरन्त उपस्थिति में न की गई हो । स्पष्टीकरण : इस धारा में "मजिस्ट्रेट" के अन्तर्गत फोर्ट सेण्ट जॉर्ज की प्रेसिडेन्सी में या अन्यत्र मजिस्ट्रेटी कृत्यों का…
पूरा पढ़ेंपुलिस अधिकारी के समक्ष अपराध स्वीकारोक्ति।
(1) किसी पुलिस अधिकारी के समक्ष दिया गया कोई भी इकबालिया बयान किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध सिद्ध नहीं किया जाएगा। (2) किसी पुलिस अधिकारी की हिरासत में रहते हुए किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया कोई भी इकबालिया बयान, जब तक कि वह मजिस्ट्रेट की तत्काल उपस्थिति में न दिया गया हो, उसके विरुद्ध सिद्ध नहीं किया जाएगा।…
पूरा पढ़ेंअभियुक्त से प्राप्त जानकारी में से कितनी साबित की जा सकेगी
परन्तु जब कि किसी अपराध के अभियुक्त व्यक्ति से, जो पुलिस ऑफिसर की अभिरक्षा में है, प्राप्त जानकारी के परिणामस्वरूप किसी तथ्य के पता चलने का अभिसाक्ष्य दिया जाता है, तब ऐसी जानकारी में से उतनी, चाहे वह संस्वीकृति की कोटि में आती हो या न आती हो, जितनी एतद्द्वारा पता चले तथ्य से स्पष्टत: संबंधित है, साबित की जा सकेगी ।
पूरा पढ़ेंसिद्ध इकबालिया बयान पर विचार करना, जो बयान देने वाले व्यक्ति और उसी अपराध के लिए संयुक्त रूप से मुकदमे का सामना कर रहे अन्य लोगों को प्रभावित करता है।
जब एक से अधिक व्यक्तियों पर एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से मुकदमा चलाया जा रहा हो, और ऐसे व्यक्तियों में से किसी एक द्वारा स्वयं और उनमें से किसी अन्य व्यक्ति के बारे में दिया गया बयान सिद्ध हो जाता है, तो न्यायालय ऐसे बयान को बयान देने वाले व्यक्ति के साथ-साथ उस अन्य व्यक्ति के विरुद्ध भी ध्यान में रख सकता है।…
पूरा पढ़ेंसाबित संस्वीकृति को, जो उसे करने वाले व्यक्ति तथा एक ही अपराध के लिए संयुक्त रुप से विचरित अन्य को प्रभावित करती है विचार में लेना
जबकि एक से अधिक व्यक्ति एक ही अपराध के लिए संयुक्त रुप से विचारित है, तथा ऐसे व्यक्तियों में से किसी एक के द्वारा, अपने को और ऐसे व्यक्तियों में से किसी अन्य को प्रभावित करने वाली की गई संस्वीकृति को साबित किया जाता है, तब न्यायालय ऐसी संस्वीकृति को ऐसे अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध तथा ऐसी संस्वीकृति करने वाले व्यक्ति…
पूरा पढ़ेंस्वीकारोक्ति निर्णायक प्रमाण नहीं है, लेकिन इससे कानूनी कार्यवाही पर रोक लग सकती है।
स्वीकारोक्तियाँ स्वीकृत मामलों का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं, लेकिन वे इसके बाद दिए गए प्रावधानों के तहत रोक के रूप में कार्य कर सकती हैं।
पूरा पढ़ेंस्वीकारोक्ति निर्णायक प्रमाण नहीं है, लेकिन इससे कानूनी कार्यवाही पर रोक लग सकती है।
स्वीकारोक्तियाँ स्वीकृत मामलों का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं, लेकिन वे इसके बाद दिए गए प्रावधानों के तहत रोक के रूप में कार्य कर सकती हैं।
पूरा पढ़ेंऐसे मामले जिनमें किसी मृत व्यक्ति या ऐसे व्यक्ति द्वारा दिए गए प्रासंगिक तथ्य का कथन प्रासंगिक होता है जिसका पता नहीं लगाया जा सकता है।
किसी मृत व्यक्ति द्वारा, या जिसका पता नहीं लगाया जा सकता है, या जो साक्ष्य देने में असमर्थ हो गया है, या जिसकी उपस्थिति में देरी या खर्च की राशि इतनी अधिक हो सकती है कि मामले की परिस्थितियों में न्यायालय को अनुचित लगे, द्वारा दिए गए प्रासंगिक तथ्यों के लिखित या मौखिक बयान निम्नलिखित मामलों में स्वयं प्रासंगिक तथ्य…
पूरा पढ़ेंऐसे मामले जिनमें किसी मृत या अनुपलब्ध व्यक्ति द्वारा प्रासंगिक तथ्य का कथन प्रासंगिक होता है। जब यह मृत्यु के कारण से संबंधित हो; या व्यवसाय के दौरान किया गया हो; या कथनकर्ता के हित के विरुद्ध हो; या सार्वजनिक अधिकार या रीति-रिवाज, या सामान्य हित के मामलों के बारे में राय देता हो; या रिश्तेदारी के अस्तित्व से संबंधित हो; या वसीयत या पारिवारिक मामलों से संबंधित विलेख में किया गया हो; या धारा 13 के खंड (क) में उल्लिखित लेनदेन से संबंधित दस्तावेज में किया गया हो; या अनेक व्यक्तियों द्वारा किया गया हो और विचाराधीन मामले से संबंधित भावनाओं को व्यक्त करता हो।
किसी मृत व्यक्ति द्वारा, या जिसका पता नहीं लगाया जा सकता है, या जो साक्ष्य देने में असमर्थ हो गया है, या जिसकी उपस्थिति में देरी या खर्च की राशि इतनी अधिक हो सकती है कि मामले की परिस्थितियों में न्यायालय को अनुचित लगे, द्वारा दिए गए प्रासंगिक तथ्यों के लिखित या मौखिक बयान स्वयं निम्नलिखित मामलों में प्रासंगिक तथ्य…
पूरा पढ़ेंआगे की कार्यवाही में, उसमें वर्णित तथ्यों की सत्यता को सिद्ध करने के लिए कुछ साक्ष्यों की प्रासंगिकता।
किसी न्यायिक कार्यवाही में, या कानून द्वारा साक्ष्य लेने के लिए अधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष, किसी गवाह द्वारा दिया गया साक्ष्य, बाद की न्यायिक कार्यवाही में, या उसी न्यायिक कार्यवाही के बाद के चरण में, उसमें वर्णित तथ्यों की सत्यता को सिद्ध करने के उद्देश्य से प्रासंगिक होता है, जब गवाह की मृत्यु हो गई हो, या वह मिल…
पूरा पढ़ेंकिसी साक्ष्य में कथित तथ्यों की सत्यता को पश्चात्वर्ती कार्यवाही में साबित करने के लिए उस साक्ष्य की सुसंगति
वह साक्ष्य, जो किसी साक्षी ने किसी न्यायिक कार्यवाही में, या विधि द्वारा उसे लेने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष दिया है, उन तथ्यों की सत्यता को, जो उस साक्ष्य में कथित है, किसी पश्चात्वर्ती न्यायिक कार्यवाही में या उसी न्यायिक कार्यवाही के आगामी प्रक्रम में साबित करने के प्रयोजन के लिए तब सुसंगत है, जबकि वह…
पूरा पढ़ेंजहां आवश्यक हो, लेखा-पुस्तकों में प्रविष्टियाँ।
व्यवसाय के दौरान नियमित रूप से रखी जाने वाली लेखा-पुस्तकों में दर्ज प्रविष्टियाँ, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी गई प्रविष्टियाँ भी शामिल हैं, तब प्रासंगिक होती हैं जब वे किसी ऐसे मामले से संबंधित हों जिसकी न्यायालय को जाँच करनी हो, लेकिन ऐसे विवरण अकेले किसी व्यक्ति पर दायित्व का आरोप लगाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं…
पूरा पढ़ेंलेखा पुस्तकों की प्रविष्टियां, जिनके अंतर्गत वे भी है, जो इलेक्ट्रॉनिक रुप में रखी गई हो, कब सुसंगत है
कारबार में अनुक्रम में नियमित रुप से रखी गई लेखा पुस्तकों की प्रविष्टियां, जिनके अंतर्गत वे भी है, जो इलेक्ट्रॉनिक रुप में रखी गई हो जब कभी वे ऐसे विषय का निर्देश करती है जिसमें न्यायालय को जाँच करनी है, सुसंगत है, किन्तु अकेले ऐसे कथन ही किसी व्यक्ति को दायित्त से भारित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं होंगे ।…
पूरा पढ़ेंकर्तव्य पालन के दौरान सार्वजनिक अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में दर्ज की गई प्रविष्टि की प्रासंगिकता।
किसी सार्वजनिक या अन्य आधिकारिक पुस्तक, रजिस्टर या अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में किसी विवादित तथ्य या प्रासंगिक तथ्य का उल्लेख करते हुए की गई प्रविष्टि, जो किसी लोक सेवक द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उस देश के कानून द्वारा विशेष रूप से निर्धारित कर्तव्य के पालन में की गई…
पूरा पढ़ेंकर्तव्य पालन में की गई लोक अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की प्रविष्टियों की सुसंगति
किसी लोक या अन्य राजकिय पुस्तक, रजिस्टर या अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में की गई प्रविष्टि, जो किसी विवाद्यक या सुसंगत तथ्य का कथन करती है और किसी लोक सेवक द्वारा अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में या उस देश की, जिसमें ऐसी पुस्तक, रजिस्टय या अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख रखा जाता है, विधि द्वारा विशेष रुप से व्यादिष्ट…
पूरा पढ़ेंमानचित्रों, चार्टों और योजनाओं में दिए गए कथनों की प्रासंगिकता।
सार्वजनिक बिक्री के लिए आम तौर पर उपलब्ध कराए गए प्रकाशित मानचित्रों या चार्टों में, या केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार के अधिकार के तहत बनाए गए मानचित्रों या योजनाओं में, विवादित तथ्यों या प्रासंगिक तथ्यों के बारे में दिए गए विवरण, जो आमतौर पर ऐसे मानचित्रों, चार्टों या योजनाओं में दर्शाए या बताए जाते हैं, स्वयं…
पूरा पढ़ेंमानचित्रों, चार्टों और रेखांको के कथनों की सुसंगति
विवाद्यक तथ्यों या सुसंगत तथ्यों के वे कथन, जो प्रकाशित मानचित्रों या चार्टों में, जो लोक विक्रय के लिए साधारणत: प्रस्थापित किए जाते है, अथवा केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के प्राधिकार के अधीन बनाए गए मानचित्रों या रेखांको में किए गए है उन विषयों के बारे में जो ऐसे मानचित्रों, चार्टों या रेखांको में प्राय: रुपित…
पूरा पढ़ेंकुछ अधिनियमों या अधिसूचनाओं में निहित सार्वजनिक प्रकृति के तथ्यों के संबंध में कथन की प्रासंगिकता।
जब न्यायालय को किसी सार्वजनिक प्रकृति के तथ्य के अस्तित्व के संबंध में राय बनानी हो, तो किसी केंद्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम में निहित किसी विवरण में या संबंधित आधिकारिक राजपत्र में या किसी मुद्रित कागज में या इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रूप में प्रकाशित किसी अधिसूचना में, जो ऐसे राजपत्र के रूप में प्रस्तुत की गई हो,…
पूरा पढ़ेंकिन्हीं अधिनियमों या अधिसूचनाओं में अंतर्विष्ट लोक प्रकृति के तथ्य के बारे में कथन की सुसंगति
जबकि न्यायालय को किसी लोक प्रकृति के तथ्य के अस्तित्व के बारे में राय बनानी है तब यूनाइटेड किंगडम की पार्लिया मेंट के ऐक्ट में या किसी केन्द्रीय अधिनियम, प्रांतीय अधिनियम या राज्य अधिनियम में या शासकिय राजपत्र में प्रकाशित किसी सरकारी अधिसूचना या क्राउन रिप्रेजेंटेटीव द्वारा की गई अधिसूचना में या लंदन गजट या हिज…
पूरा पढ़ेंकानून की पुस्तकों में निहित किसी भी कानून से संबंधित कथनों की प्रासंगिकता, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रूप भी शामिल हैं।
जब न्यायालय को किसी देश के कानून के संबंध में कोई राय बनानी होती है, तो उस देश की सरकार के अधिकार के तहत मुद्रित या प्रकाशित किसी पुस्तक में निहित ऐसे कानून का कोई भी कथन, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रूप भी शामिल हैं, और उस देश के न्यायालयों के किसी निर्णय की रिपोर्ट, जो इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रूप में किसी पुस्तक…
पूरा पढ़ेंविधि की पुस्तकों में अंतर्विष्ट किसी विधि के कथनों की सुसंगति
जबकि न्यायालय को किसी देश की विधि के बारे में राय बनानी है, तब ऐसी विधि का कोई भी कथन, जो ऐसी किसी पुस्तक में अंतर्विष्ट है, जो ऐसे देश की सरकार के प्राधिकार के अधीन मुद्रित या प्रकाशित और ऐसी किसी विधि को अंतर्विष्ट करने वाली तात्पर्यित है, और ऐसे देश के न्यायालयों के किसी विनिर्णय की कोई रिपोर्ट जो ऐसी व्यवस्थाओं की…
पूरा पढ़ेंजब कोई बयान किसी बातचीत, दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, पुस्तक या पत्रों या कागजों की श्रृंखला का हिस्सा हो तो क्या साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
जब साक्ष्य के रूप में दिया गया कोई भी कथन किसी लंबे कथन, किसी वार्तालाप, किसी पृथक दस्तावेज़ का भाग हो, या किसी पुस्तक का भाग हो, या किसी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का भाग हो, या पत्रों या कागज़ों की एक जुड़ी हुई श्रृंखला का भाग हो, तो न्यायालय द्वारा उस विशेष मामले में कथन की प्रकृति और प्रभाव तथा जिन परिस्थितियों में वह…
पूरा पढ़ेंजबकि कथन किसी बातचीत, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, पुस्तक अथवा पत्रों या कागज-पत्रों की आवली (क्रमबद्धत) का भाग हो, तब क्या साक्ष्य दिया जाए
जबकि कोई कथन, जिसका साक्ष्य दिया जाता है, किसी वृहत्तर (दीर्घतर) कथन का या किसी बातचीत का भाग है या किसी एकल दस्तावेज का भाग है या किसी एकल दस्तावेज का भाग है या किसी ऐसी दस्तावेज में अंतर्विष्ट है, जो किसी पुस्तक का अथवा पत्रों या कागज-पत्रों की संसक्त आवली (क्रमबद्धता) का भाग है या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के भाग में…
पूरा पढ़ेंद्वितीय मुकदमा या सुनवाई को रोकने के लिए प्रासंगिक पूर्व निर्णय।
किसी भी ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री का अस्तित्व, जो कानून द्वारा किसी न्यायालय को किसी मुकदमे का संज्ञान लेने या सुनवाई करने से रोकता है, एक प्रासंगिक तथ्य है जब यह प्रश्न उठता है कि क्या ऐसे न्यायालय को ऐसे मुकदमे का संज्ञान लेना चाहिए या ऐसी सुनवाई करनी चाहिए।
पूरा पढ़ेंद्वितीय वाद या विचारण के वारणार्थ (वर्जन योग्य) पूर्व निर्णय सुसंगत है
किसी ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री का अस्तित्व, जो किसी न्यायालय को किसी वाद के संज्ञान से या कोई विचारण करने से विधि द्वारा निवारित करता है, सुसंगत तथ्य है जबकि प्रश्न यह हो कि क्या ऐसे वाद का संज्ञान या ऐसा विचारण करना चाहिए ।
पूरा पढ़ेंवसीयतनामा आदि के अधिकार क्षेत्र में कुछ निर्णयों की प्रासंगिकता।
(1) सक्षम न्यायालय या न्यायाधिकरण का कोई अंतिम निर्णय, आदेश या डिक्री, वसीयतनामा, वैवाहिक वसीयतनामा, नौसेना वसीयतनामा या दिवालियापन वसीयतनामा क्षेत्राधिकार के प्रयोग में, जो किसी व्यक्ति को कोई कानूनी चरित्र प्रदान करता है या उससे छीन लेता है, या जो किसी व्यक्ति को ऐसे किसी चरित्र का हकदार घोषित करता है, या किसी…
पूरा पढ़ेंप्रोबेट (संप्रभाव /वसीयतनामा) इत्यादि विषयक अधिकारिता के किन्हीं निर्णयों की सुसंगति
किसी सक्षम न्यायालय के प्रोबेट विषयक, विवाह विषयक, नावधिकरण (जल सेना से संबंधित) विषयक या दिवाला विषयक अधिकारिता के प्रयोग में दिया हुआ अंतिम निर्णय, आदेश या डिक्री, जो किसी व्यक्ति को, या से कोई विधिक हैसियत प्रदान करती है या ले लेती है या जो सर्वत: न कि किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति के विरुद्ध किसी व्यक्ति को ऐसी किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 35 में उल्लिखित निर्णयों, आदेशों या डिक्री के अलावा अन्य निर्णयों, आदेशों या डिक्री की प्रासंगिकता और प्रभाव।
धारा 35 में उल्लिखित निर्णयों, आदेशों या आदेशों के अलावा अन्य निर्णय, आदेश या आदेश प्रासंगिक हैं यदि वे जांच से संबंधित सार्वजनिक प्रकृति के मामलों से संबंधित हैं; लेकिन ऐसे निर्णय, आदेश या आदेश उनमें कही गई बातों का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। चित्रण। A, B पर अपनी ज़मीन पर अतिक्रमण का मुकदमा करता है। B का दावा है कि उस…
पूरा पढ़ेंधारा ४१ में वर्णित भिन्न निर्णयों, आदेशों या डिक्रियों की सुसंगति और प्रभाव
वे निर्णय, आदेश या डिक्रियाँ जो धार ४१ में वर्णित से भिन्न है, यदि वे जाँच में सुसंगत लोक प्रकृति की बातों से संबंधित है, तो वे सुसंगत है, किन्तु ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्रियाँ उन बातों का निश्चायक सबूत नहीं है जिनका वे कथन करती है । दृष्टांत : ऐ अपनी भूमि पर अतिचार (अतिक्रमण / बलात् प्रवेश या बिना आज्ञा प्रवेश ) के…
पूरा पढ़ेंधारा 34, 35 और 36 में उल्लिखित निर्णयों आदि के अलावा, जब वे प्रासंगिक हों।
धारा 34, 35 और 36 में उल्लिखित निर्णयों, आदेशों या डिक्री के अलावा अन्य निर्णय, आदेश या डिक्री अप्रासंगिक हैं, जब तक कि ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री का अस्तित्व विवाद का विषय न हो, या इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के तहत प्रासंगिक न हो। चित्र। (a) A और B अलग-अलग C पर मानहानि का मुकदमा करते हैं, जो उन दोनों पर ही…
पूरा पढ़ेंधाराओं ४० से ४२ में वर्णित से भिन्न निर्णय आदि कब सुसंगत है
धाराएँ ४०, ४१ और ४२ में वर्णित भिन्न निर्णय, आदेश या डिक्रियाँ विसंगत है जब तक कि ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री का अस्तित्व विवाद्यक तथ्य न हो या वह इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अन्तर्गत सुसंगत न हो । दृष्टांत : क)ऐ और बी किसी अपमान लेख के लिए जो उनमें से हर एक पर लांछन लगाता है, सी पर पृथक्-पृथक् वाद लाते है । हर एक…
पूरा पढ़ेंनिर्णय प्राप्त करने में धोखाधड़ी या मिलीभगत, या न्यायालय की अक्षमता, सिद्ध की जा सकती है।
किसी मुकदमे या अन्य कार्यवाही में कोई भी पक्ष यह प्रदर्शित कर सकता है कि कोई भी निर्णय, आदेश या डिक्री जो धारा 34, 35 या 36 के तहत प्रासंगिक है, और जिसे विरोधी पक्ष द्वारा सिद्ध किया गया है, उसे किसी ऐसे न्यायालय द्वारा दिया गया था जो उसे देने के लिए सक्षम नहीं था, या धोखाधड़ी या मिलीभगत से प्राप्त किया गया था।
पूरा पढ़ेंनिणय अभिप्राप्त करने में कपट या दुस्संधि अथवा न्यायालय की अक्षमता साबित की जा सकेगी
वाद या अन्य कार्यवाही का कोई भी पक्षकार यह दर्शित कर सकेगा कि कोई निर्णय, आदेश या डिक्री जो धारा ४०, ४१ या ४२ के अधीन सुसंगत है और जो प्रतिपक्षी द्वारा साबित की जा चुकी है, ऐसे न्यायालय द्वारा दी गई थी, जो उसे देने के लिए अक्षम था, या कपट या दुस्संधि द्वारा अभिप्राप्त की गई थी ।
पूरा पढ़ेंविशेषज्ञों की राय।
(1) जब न्यायालय को विदेशी विधि, विज्ञान, कला, या किसी अन्य क्षेत्र के विषय पर, या लिखावट या उंगलियों के निशान की पहचान के विषय पर कोई राय बनानी हो, तो उस विषय पर ऐसे विदेशी विधि, विज्ञान, कला, या किसी अन्य क्षेत्र में, या लिखावट या उंगलियों के निशान की पहचान से संबंधित प्रश्नों में विशेष रूप से कुशल व्यक्तियों की राय…
पूरा पढ़ेंविशेषज्ञों की राय
जब की न्यायालय को विदेशी विधि की या विज्ञान की या कला की किसी बात पर या अंगुली चिन्हों की अनन्यता के बारे में राय बनानी हो तो तब उस बात पर ऐसी विदेशी विधि, विज्ञान या कला में या हस्तलेख या अंगुली चिन्हों की अनन्यता विषयक प्रश्नों में विशेष कुशल व्यक्तियों की राय सुसंगत तथ्य है । ऐसे व्यक्ति विशेषज्ञ कहलाते है ।…
पूरा पढ़ेंविशेषज्ञों की राय।
(1) जब न्यायालय को विदेशी विधि, विज्ञान, कला, या किसी अन्य क्षेत्र के विषय पर, या लिखावट या उंगलियों के निशान की पहचान के विषय पर कोई राय बनानी हो, तो उस विषय पर ऐसे विदेशी विधि, विज्ञान, कला, या किसी अन्य क्षेत्र में, या लिखावट या उंगलियों के निशान की पहचान से संबंधित प्रश्नों में विशेष रूप से कुशल व्यक्तियों की राय…
पूरा पढ़ेंविशेषज्ञों की राय
जब की न्यायालय को विदेशी विधि की या विज्ञान की या कला की किसी बात पर या अंगुली चिन्हों की अनन्यता के बारे में राय बनानी हो तो तब उस बात पर ऐसी विदेशी विधि, विज्ञान या कला में या हस्तलेख या अंगुली चिन्हों की अनन्यता विषयक प्रश्नों में विशेष कुशल व्यक्तियों की राय सुसंगत तथ्य है । ऐसे व्यक्ति विशेषज्ञ कहलाते है ।…
पूरा पढ़ेंविशेषज्ञों की राय।
(1) जब न्यायालय को विदेशी विधि, विज्ञान, कला, या किसी अन्य क्षेत्र के विषय पर, या लिखावट या उंगलियों के निशान की पहचान के विषय पर कोई राय बनानी हो, तो उस विषय पर ऐसे विदेशी विधि, विज्ञान, कला, या किसी अन्य क्षेत्र में, या लिखावट या उंगलियों के निशान की पहचान से संबंधित प्रश्नों में विशेष रूप से कुशल व्यक्तियों की राय…
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के परीक्षक की राय
जब न्यायालय को किसी कार्यवाही में किसी कम्प्युटर साधन या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक या अंकीय रुप से पारेषित या भंडारित किसी सूचना से संबंधित किसी विषय पर कोई राय बनानी होती है तब सूचना प्रौद्योगिकि अधिनियम, २००० (२००० का २१ ) की धारा ७९-क में निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के परीक्षक की राय सुसंगत तथ्य है । स्पष्टीकरण :…
पूरा पढ़ेंविशेषज्ञों की राय से संबंधित तथ्य।
जो तथ्य अन्यथा प्रासंगिक नहीं हैं, वे प्रासंगिक हो जाते हैं यदि वे विशेषज्ञों की राय का समर्थन करते हैं या उनसे असंगत हैं, जब ऐसी राय प्रासंगिक हो। चित्र। (क) प्रश्न यह है कि क्या 'ए' किसी विशेष विष से विषग्रस्त हुआ था। यह तथ्य प्रासंगिक है कि उस विष से विषग्रस्त अन्य व्यक्तियों ने कुछ ऐसे लक्षण प्रदर्शित किए…
पूरा पढ़ेंविशेषज्ञों की रायों से संबंधित तथ्य
वे तथ्य, जो अन्यथा सुसंगत नहीं है, सुसंगत होते है, यदि वे विशेषज्ञों की रायों का समर्थन करते हो या उनसे असंगत हो जबकि ऐसी रायें सुसंगत हों । दृष्टांत : क)प्रश्न यह है कि क्या ऐ को अमुक विष दिया गया था । यह तथ्य सुसंगत है कि अन्य व्यक्तियों में भी, जिन्हें वह विष दिया गया था, अमुक लक्षण प्रकट हुए थे, जिनका उस विष के…
पूरा पढ़ेंप्रासंगिक होने पर, लिखावट और हस्ताक्षर के संबंध में राय।
(1) जब न्यायालय को यह राय बनानी हो कि कोई दस्तावेज किसके द्वारा लिखा या हस्ताक्षरित किया गया है, तो उस व्यक्ति की लिखावट से परिचित किसी व्यक्ति की राय, जिसके द्वारा इसे लिखा या हस्ताक्षरित माना जाता है, कि यह उस व्यक्ति द्वारा लिखा या हस्ताक्षरित किया गया था या नहीं, एक प्रासंगिक तथ्य है। स्पष्टीकरण।- किसी व्यक्ति को…
पूरा पढ़ेंहस्तलेख के बारे में राय कब सुसंगत है
जबकि न्यायालय को राय बनानी हो कि कोई दस्तावेज किसी व्यक्ति ने लिखि या हस्ताक्षरित की थी, तब उस व्यक्ति के हस्तलेख से, जिसके द्वारा वह लिखी या हस्ताक्षरित की गई अनुमानित की जाती है, परिचित किसी व्यक्ति की यह राय कि वह उस व्यक्ति द्वारा लिखी या हस्ताक्षरित की गई थी अथवा लिखी या हस्ताक्षरित नहीं की गई धी, सुसंगत तथ्य है…
पूरा पढ़ें- BSA §1IEA §1
संक्षिप्त शीर्षक, आवेदन और प्रारंभ तिथि।
संक्षिप्त शीर्षक।
- BSA §2IEA §3बदलाव हुआ
परिभाषाएँ।
व्याख्या-खंड।
- BSA §2IEA §4बदलाव हुआ
परिभाषाएँ।
उपधारणा कर सकेगा (निर्णय या अनुमान / कुछ विवादित तथ्यों की सत्यता के बारे में कोई निष्कर्ष )
- BSA §3IEA §5
मामले से संबंधित तथ्यों और प्रासंगिक तथ्यों के साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
विवाद्यक तथ्यों और सुसंगत तथ्यों को साक्ष्य दिया जा सकेगा
- BSA §4IEA §6बदलाव हुआ
एक ही लेन-देन के अंतर्गत आने वाले तथ्यों की प्रासंगिकता।
एक ही संव्यवहार (कार्य-विवरण) के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगति
- BSA §5IEA §7
वे तथ्य जो विवादित तथ्यों या प्रासंगिक तथ्यों के अवसर, कारण या परिणाम हों।
वे तथ्य जो विवाद्यक तथ्यों के प्रसंग, हेतुक (कारण / मामला ) या परिणाम है
- BSA §6IEA §8
उद्देश्य, तैयारी और पूर्व या बाद का आचरण।
- BSA §7IEA §9
विवाद में उल्लिखित तथ्य या प्रासंगिक तथ्यों को स्पष्ट करने या प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक तथ्य।
सुसंगत तथ्यों के स्पष्टीकरण या पुन:स्थापन के लिए आवश्यक तथ्य
- BSA §8IEA §10
किसी साझा योजना के संदर्भ में षड्यंत्रकारियों द्वारा कही या की गई बातें।
सामान्य परिकल्पना के बारे में षडयंत्रकारी द्वारा कही या की गई बातें
- BSA §9IEA §11
जब अप्रासंगिक तथ्य प्रासंगिक हो जाते हैं।
वे तथ्य जा अन्यथा सुसंगत नहीं है कब सुसंगत है
- BSA §10IEA §12
क्षतिपूर्ति के मुकदमों में वे तथ्य प्रासंगिक होते हैं जो न्यायालय को क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित करने में सक्षम बनाते हैं।
नुकसानी के लिए वादों में रकम अवधारित करने के लिए न्यायालय को समर्थ करने की प्रवृत्ति रखने वाले तथ्य सुसंगत है
- BSA §11IEA §13
जब अधिकार या रीति-रिवाज पर सवाल उठता है तो प्रासंगिक तथ्य।
जबकि अधिकार या रुढि प्रश्नगत है तब सुसंगत तथ्य
- BSA §12IEA §14
ऐसे तथ्य जो मन की अवस्था, शरीर की अवस्था या शारीरिक संवेदना के अस्तित्व को दर्शाते हैं।
मन या शरीर की दशा या शारीरिक संवेदना का अस्तित्व दर्शित करने वाले तथ्य
- BSA §13IEA §15
वे तथ्य जो इस प्रश्न से संबंधित हैं कि कृत्य आकस्मिक था या जानबूझकर किया गया था।
कार्य आकस्मिक या साशय था इस प्रश्न पर प्रकाश डालने वाला तथ्य
- BSA §14IEA §16
प्रासंगिक होने पर व्यवसाय के पाठ्यक्रम का अस्तित्व।
कारबार के अनुक्रम का अस्तित्व कब सुसंगत है
- BSA §15IEA §17
प्रवेश की परिभाषा।
- BSA §16IEA §18
मुकदमे में शामिल पक्ष या उसके प्रतिनिधि द्वारा प्रवेश।
स्वीकृति - कार्यवाही के पक्षकार या उसके अभिकर्ता द्वारा
- BSA §17IEA §19
उन व्यक्तियों द्वारा स्वीकारोक्ति जिनकी स्थिति मुकदमे में पक्षकार के विरुद्ध सिद्ध की जानी चाहिए।
उन व्यक्तियों द्वारा स्वीकृतियाँ जिनकी स्थिति वाद के प्रक्षकारां के विरुद्ध साबित की जानी चाहिए
- BSA §18IEA §20
मुकदमे में पक्षकार द्वारा स्पष्ट रूप से संदर्भित व्यक्तियों द्वारा स्वीकारोक्तियाँ।
वाद के पक्षकार द्वारा अभिव्यक्त रुप से निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा स्वीकृतियाँ
- BSA §19IEA §21
उन व्यक्तियों के विरुद्ध और उनके द्वारा या उनकी ओर से स्वीकारोक्तियों का प्रमाण।
स्वीकृतियों का उन्हें करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध और उनके द्वारा या उनकी और से साबित किया जाना
- BSA §20IEA §22
जब दस्तावेजों की विषयवस्तु के संबंध में मौखिक स्वीकारोक्ति प्रासंगिक हो।
दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियाँ कब सुसंगत होती है
- BSA §DELETEDIEA §22A.
हटाई गई धारा
इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियाँ कब सुसंगत होती है
BSA §DELETEDIEA §22A. - BSA §21IEA §23
प्रासंगिक होने पर दीवानी मामलों में स्वीकारोक्ति।
सिविल मामलों में स्वीकृतियाँ कब सुसंगत होती है
- BSA §22IEA §24बदलाव हुआ
प्रलोभन, धमकी, दबाव या वादे के कारण लिया गया इकबालिया बयान, जब आपराधिक कार्यवाही में अप्रासंगिक हो।
उत्प्रेरणा, धमकी या वचन द्वारा कराई गई संस्वीकृति दाण्डिक कार्यवाही में कब विसंगत होती है
- BSA §22IEA §28
प्रलोभन, धमकी, दबाव या वादे के कारण लिया गया इकबालिया बयान, जब आपराधिक कार्यवाही में अप्रासंगिक हो।
उत्पेरणा, धमकी या वचन से पैदा हुए मन पर प्रभाव के दूर हो जाने के पश्चात् की गई संस्वीकृति सुसंगत है
- BSA §22IEA §29
प्रलोभन, धमकी, दबाव या वादे के कारण लिया गया इकबालिया बयान, जब आपराधिक कार्यवाही में अप्रासंगिक हो।
अन्यथा सुसंगत संस्वीकृति का गुप्त रखने के वचन आदि के कारण विसंगत न हो जाना
- BSA §23IEA §25
पुलिस अधिकारी के समक्ष अपराध स्वीकारोक्ति।
पुलिस ऑफिसर से की गई संस्वीकृति का साबित न किया जाना
- BSA §23IEA §25
पुलिस अधिकारी के समक्ष अपराध स्वीकारोक्ति।
पुलिस ऑफिसर से की गई संस्वीकृति का साबित न किया जाना
- BSA §23IEA §26
पुलिस अधिकारी के समक्ष अपराध स्वीकारोक्ति।
पुलिस की अभिरक्षा में होते हुए अभियुक्त द्वारा की गई संस्वीकृति का उसके विरुद्ध साबित न किया जाना
- BSA §23IEA §27
पुलिस अधिकारी के समक्ष अपराध स्वीकारोक्ति।
अभियुक्त से प्राप्त जानकारी में से कितनी साबित की जा सकेगी
- BSA §24IEA §30बदलाव हुआ
सिद्ध इकबालिया बयान पर विचार करना, जो बयान देने वाले व्यक्ति और उसी अपराध के लिए संयुक्त रूप से मुकदमे का सामना कर रहे अन्य लोगों को प्रभावित करता है।
साबित संस्वीकृति को, जो उसे करने वाले व्यक्ति तथा एक ही अपराध के लिए संयुक्त रुप से विचरित अन्य को प्रभावित करती है विचार में लेना
- BSA §25IEA §31
स्वीकारोक्ति निर्णायक प्रमाण नहीं है, लेकिन इससे कानूनी कार्यवाही पर रोक लग सकती है।
- BSA §26IEA §32बदलाव हुआ
ऐसे मामले जिनमें किसी मृत व्यक्ति या ऐसे व्यक्ति द्वारा दिए गए प्रासंगिक तथ्य का कथन प्रासंगिक होता है जिसका पता नहीं लगाया जा सकता है।
ऐसे मामले जिनमें किसी मृत या अनुपलब्ध व्यक्ति द्वारा प्रासंगिक तथ्य का कथन प्रासंगिक होता है। जब यह मृत्यु के कारण से संबंधित हो; या व्यवसाय के दौरान किया गया हो; या कथनकर्ता के हित के विरुद्ध हो; या सार्वजनिक अधिकार या रीति-रिवाज, या सामान्य हित के मामलों के बारे में राय देता हो; या रिश्तेदारी के अस्तित्व से संबंधित हो; या वसीयत या पारिवारिक मामलों से संबंधित विलेख में किया गया हो; या धारा 13 के खंड (क) में उल्लिखित लेनदेन से संबंधित दस्तावेज में किया गया हो; या अनेक व्यक्तियों द्वारा किया गया हो और विचाराधीन मामले से संबंधित भावनाओं को व्यक्त करता हो।
- BSA §27IEA §33
आगे की कार्यवाही में, उसमें वर्णित तथ्यों की सत्यता को सिद्ध करने के लिए कुछ साक्ष्यों की प्रासंगिकता।
किसी साक्ष्य में कथित तथ्यों की सत्यता को पश्चात्वर्ती कार्यवाही में साबित करने के लिए उस साक्ष्य की सुसंगति
- BSA §28IEA §34
जहां आवश्यक हो, लेखा-पुस्तकों में प्रविष्टियाँ।
लेखा पुस्तकों की प्रविष्टियां, जिनके अंतर्गत वे भी है, जो इलेक्ट्रॉनिक रुप में रखी गई हो, कब सुसंगत है
- BSA §29IEA §35
कर्तव्य पालन के दौरान सार्वजनिक अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में दर्ज की गई प्रविष्टि की प्रासंगिकता।
कर्तव्य पालन में की गई लोक अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की प्रविष्टियों की सुसंगति
- BSA §30IEA §36
मानचित्रों, चार्टों और योजनाओं में दिए गए कथनों की प्रासंगिकता।
मानचित्रों, चार्टों और रेखांको के कथनों की सुसंगति
- BSA §31IEA §37बदलाव हुआ
कुछ अधिनियमों या अधिसूचनाओं में निहित सार्वजनिक प्रकृति के तथ्यों के संबंध में कथन की प्रासंगिकता।
किन्हीं अधिनियमों या अधिसूचनाओं में अंतर्विष्ट लोक प्रकृति के तथ्य के बारे में कथन की सुसंगति
- BSA §32IEA §38बदलाव हुआ
कानून की पुस्तकों में निहित किसी भी कानून से संबंधित कथनों की प्रासंगिकता, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रूप भी शामिल हैं।
विधि की पुस्तकों में अंतर्विष्ट किसी विधि के कथनों की सुसंगति
- BSA §33IEA §39
जब कोई बयान किसी बातचीत, दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, पुस्तक या पत्रों या कागजों की श्रृंखला का हिस्सा हो तो क्या साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
जबकि कथन किसी बातचीत, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, पुस्तक अथवा पत्रों या कागज-पत्रों की आवली (क्रमबद्धत) का भाग हो, तब क्या साक्ष्य दिया जाए
- BSA §34IEA §40
द्वितीय मुकदमा या सुनवाई को रोकने के लिए प्रासंगिक पूर्व निर्णय।
द्वितीय वाद या विचारण के वारणार्थ (वर्जन योग्य) पूर्व निर्णय सुसंगत है
- BSA §35IEA §41बदलाव हुआ
वसीयतनामा आदि के अधिकार क्षेत्र में कुछ निर्णयों की प्रासंगिकता।
प्रोबेट (संप्रभाव /वसीयतनामा) इत्यादि विषयक अधिकारिता के किन्हीं निर्णयों की सुसंगति
- BSA §36IEA §42
धारा 35 में उल्लिखित निर्णयों, आदेशों या डिक्री के अलावा अन्य निर्णयों, आदेशों या डिक्री की प्रासंगिकता और प्रभाव।
धारा ४१ में वर्णित भिन्न निर्णयों, आदेशों या डिक्रियों की सुसंगति और प्रभाव
- BSA §37IEA §43
धारा 34, 35 और 36 में उल्लिखित निर्णयों आदि के अलावा, जब वे प्रासंगिक हों।
धाराओं ४० से ४२ में वर्णित से भिन्न निर्णय आदि कब सुसंगत है
- BSA §38IEA §44
निर्णय प्राप्त करने में धोखाधड़ी या मिलीभगत, या न्यायालय की अक्षमता, सिद्ध की जा सकती है।
निणय अभिप्राप्त करने में कपट या दुस्संधि अथवा न्यायालय की अक्षमता साबित की जा सकेगी
- BSA §39IEA §45बदलाव हुआ
विशेषज्ञों की राय।
विशेषज्ञों की राय
- BSA §39IEA §45
विशेषज्ञों की राय।
विशेषज्ञों की राय
- BSA §39IEA §45A
विशेषज्ञों की राय।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के परीक्षक की राय
- BSA §40IEA §46
विशेषज्ञों की राय से संबंधित तथ्य।
विशेषज्ञों की रायों से संबंधित तथ्य
- BSA §41IEA §47
प्रासंगिक होने पर, लिखावट और हस्ताक्षर के संबंध में राय।
हस्तलेख के बारे में राय कब सुसंगत है
