धारा 27 · आगे की कार्यवाही में, उसमें वर्णित तथ्यों की सत्यता को सिद्ध करने के लिए कुछ साक्ष्यों की प्रासंगिकता।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
किसी न्यायिक कार्यवाही में, या कानून द्वारा साक्ष्य लेने के लिए अधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष, किसी गवाह द्वारा दिया गया साक्ष्य, बाद की न्यायिक कार्यवाही में, या उसी न्यायिक कार्यवाही के बाद के चरण में, उसमें वर्णित तथ्यों की सत्यता को सिद्ध करने के उद्देश्य से प्रासंगिक होता है, जब गवाह की मृत्यु हो गई हो, या वह मिल न सके, या साक्ष्य देने में असमर्थ हो, या विरोधी पक्ष द्वारा उसे कार्यवाही से दूर रखा गया हो, या यदि उसकी उपस्थिति में इतनी देरी या खर्च न हो जिसे न्यायालय मामले की परिस्थितियों में अनुचित मानता हो।
बशर्ते कि कार्यवाही उन्हीं पक्षों या उनके हित प्रतिनिधियों के बीच हो; कि पहली कार्यवाही में विरोधी पक्ष को जिरह करने का अधिकार और अवसर प्राप्त हो और पहली कार्यवाही और दूसरी कार्यवाही में विचाराधीन प्रश्न मूलतः समान हों।
स्पष्टीकरण। --आपराधिक मुकदमा या जांच इस धारा के अर्थ के अनुसार अभियोजक और आरोपी के बीच की कार्यवाही मानी जाएगी।
बशर्ते कि कार्यवाही उन्हीं पक्षों या उनके हित प्रतिनिधियों के बीच हो; कि पहली कार्यवाही में विरोधी पक्ष को जिरह करने का अधिकार और अवसर प्राप्त हो और पहली कार्यवाही और दूसरी कार्यवाही में विचाराधीन प्रश्न मूलतः समान हों।
स्पष्टीकरण। --आपराधिक मुकदमा या जांच इस धारा के अर्थ के अनुसार अभियोजक और आरोपी के बीच की कार्यवाही मानी जाएगी।
पुराने कानून में
BSA 27IEA 33
33. Relevancy of certain evidence for proving, in subsequent proceeding, the truth of facts therein stated.
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