धारा 141 · न्यायाधीश को साक्ष्य की स्वीकार्यता के संबंध में निर्णय लेना है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब कोई पक्ष किसी तथ्य का साक्ष्य देने का प्रस्ताव करता है, तो न्यायाधीश साक्ष्य देने का प्रस्ताव करने वाले पक्ष से पूछ सकता है कि यदि वह तथ्य सिद्ध हो जाता है, तो वह किस प्रकार प्रासंगिक होगा; और न्यायाधीश साक्ष्य को स्वीकार करेगा यदि वह सोचता है कि यदि वह तथ्य सिद्ध हो जाता है, तो वह प्रासंगिक होगा, अन्यथा नहीं।
(2) यदि सिद्ध किया जाने वाला तथ्य ऐसा तथ्य है जिसके साक्ष्य किसी अन्य तथ्य के सिद्ध होने पर ही स्वीकार्य हैं, तो पहले उल्लेखित तथ्य का साक्ष्य दिए जाने से पहले ऐसे अंतिम उल्लेखित तथ्य को सिद्ध किया जाना चाहिए, जब तक कि पक्षकार ऐसे तथ्य का प्रमाण देने का वचन न दे और न्यायालय ऐसे वचन से संतुष्ट न हो।
(3) यदि किसी एक कथित तथ्य की प्रासंगिकता किसी अन्य कथित तथ्य के पहले सिद्ध होने पर निर्भर करती है, तो न्यायाधीश अपने विवेक से या तो दूसरे तथ्य के सिद्ध होने से पहले पहले तथ्य का साक्ष्य देने की अनुमति दे सकता है, या पहले तथ्य का साक्ष्य दिए जाने से पहले दूसरे तथ्य का साक्ष्य देने की आवश्यकता कर सकता है।
चित्र।
(क) किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा दिए गए प्रासंगिक तथ्य के कथन को सिद्ध करने का प्रस्ताव है जिसे मृत माना जाता है, और यह कथन धारा 26 के अंतर्गत प्रासंगिक है। कथन को सिद्ध करने का प्रस्ताव करने वाले व्यक्ति को कथन के साक्ष्य प्रस्तुत करने से पहले यह सिद्ध करना होगा कि वह व्यक्ति मृत है।
(ख) किसी खोए हुए दस्तावेज़ की विषयवस्तु को उसकी प्रतिलिपि द्वारा सिद्ध करने का प्रस्ताव है। प्रतिलिपि प्रस्तुत करने से पहले, प्रतिलिपि प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को यह सिद्ध करना होगा कि मूल दस्तावेज़ खो गया है।
(ग) ए पर चोरी की संपत्ति को यह जानते हुए प्राप्त करने का आरोप है कि वह चोरी की है। यह साबित करना प्रस्तावित है कि उसने संपत्ति पर अपना अधिकार होने से इनकार किया था। इनकार की प्रासंगिकता संपत्ति की पहचान पर निर्भर करती है। न्यायालय अपने विवेक से, या तो संपत्ति पर अधिकार होने से इनकार साबित होने से पहले उसकी पहचान अनिवार्य कर सकता है, या संपत्ति की पहचान होने से पहले ही अधिकार होने से इनकार साबित करने की अनुमति दे सकता है।
(घ) तथ्य A को सिद्ध करने का प्रस्ताव है, जिसे विवादित तथ्य का कारण या परिणाम बताया गया है। तथ्य A को विवादित तथ्य का कारण या परिणाम मानने से पहले कई मध्यवर्ती तथ्य B, C और D का अस्तित्व सिद्ध होना आवश्यक है। न्यायालय या तो A को B, C या D से पहले सिद्ध करने की अनुमति दे सकता है, या A को सिद्ध करने की अनुमति देने से पहले B, C और D को सिद्ध करने की आवश्यकता बता सकता है।
(2) यदि सिद्ध किया जाने वाला तथ्य ऐसा तथ्य है जिसके साक्ष्य किसी अन्य तथ्य के सिद्ध होने पर ही स्वीकार्य हैं, तो पहले उल्लेखित तथ्य का साक्ष्य दिए जाने से पहले ऐसे अंतिम उल्लेखित तथ्य को सिद्ध किया जाना चाहिए, जब तक कि पक्षकार ऐसे तथ्य का प्रमाण देने का वचन न दे और न्यायालय ऐसे वचन से संतुष्ट न हो।
(3) यदि किसी एक कथित तथ्य की प्रासंगिकता किसी अन्य कथित तथ्य के पहले सिद्ध होने पर निर्भर करती है, तो न्यायाधीश अपने विवेक से या तो दूसरे तथ्य के सिद्ध होने से पहले पहले तथ्य का साक्ष्य देने की अनुमति दे सकता है, या पहले तथ्य का साक्ष्य दिए जाने से पहले दूसरे तथ्य का साक्ष्य देने की आवश्यकता कर सकता है।
चित्र।
(क) किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा दिए गए प्रासंगिक तथ्य के कथन को सिद्ध करने का प्रस्ताव है जिसे मृत माना जाता है, और यह कथन धारा 26 के अंतर्गत प्रासंगिक है। कथन को सिद्ध करने का प्रस्ताव करने वाले व्यक्ति को कथन के साक्ष्य प्रस्तुत करने से पहले यह सिद्ध करना होगा कि वह व्यक्ति मृत है।
(ख) किसी खोए हुए दस्तावेज़ की विषयवस्तु को उसकी प्रतिलिपि द्वारा सिद्ध करने का प्रस्ताव है। प्रतिलिपि प्रस्तुत करने से पहले, प्रतिलिपि प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को यह सिद्ध करना होगा कि मूल दस्तावेज़ खो गया है।
(ग) ए पर चोरी की संपत्ति को यह जानते हुए प्राप्त करने का आरोप है कि वह चोरी की है। यह साबित करना प्रस्तावित है कि उसने संपत्ति पर अपना अधिकार होने से इनकार किया था। इनकार की प्रासंगिकता संपत्ति की पहचान पर निर्भर करती है। न्यायालय अपने विवेक से, या तो संपत्ति पर अधिकार होने से इनकार साबित होने से पहले उसकी पहचान अनिवार्य कर सकता है, या संपत्ति की पहचान होने से पहले ही अधिकार होने से इनकार साबित करने की अनुमति दे सकता है।
(घ) तथ्य A को सिद्ध करने का प्रस्ताव है, जिसे विवादित तथ्य का कारण या परिणाम बताया गया है। तथ्य A को विवादित तथ्य का कारण या परिणाम मानने से पहले कई मध्यवर्ती तथ्य B, C और D का अस्तित्व सिद्ध होना आवश्यक है। न्यायालय या तो A को B, C या D से पहले सिद्ध करने की अनुमति दे सकता है, या A को सिद्ध करने की अनुमति देने से पहले B, C और D को सिद्ध करने की आवश्यकता बता सकता है।
पुराने कानून में
BSA 141IEA 136
136. Judge to decide as to admissibility of evidence.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
