अपराध को उसके परिणाम से खोजें
नाम से नहीं — परिणाम से। किन अपराधों में दस वर्ष का दंड है। किनमें पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है। किनका शमन हो सकता है।
दंड के अनुसार
- मृत्युदंड से दंडनीय अपराध98विधि-पुस्तक की सर्वाधिक गंभीर श्रेणी। मृत्युदंड वह अधिकतम दंड है जो न्यायालय दे सकता है, न्यूनतम नहीं — इनमें से हर अपराध में इससे कम दंड भी दिया जा सकता है।
- आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध230आजीवन कारावास का अर्थ है दोषी के शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास, जब तक कि लघुकरण या परिहार न हो — न कि चौदह या बीस वर्ष की नियत अवधि, जो एक सामान्य और महँगी भ्रांति है।
- 10 वर्ष या अधिक से दंडनीय अपराध535इसमें आजीवन कारावास या मृत्युदंड वाले सभी अपराध सम्मिलित हैं, जो किसी भी नियत अवधि से अधिक हैं।
- 7 वर्ष या अधिक से दंडनीय अपराध858सात वर्ष वह सीमा है जिसका प्रयोग संहिता कई स्थानों पर करती है, और इसे उलटा पढ़ लेना आसान है। बीएनएसएस की धारा 35(1)(ख) उस संज्ञेय अपराध को समेटती है जो सात वर्ष से कम या सात वर्ष तक के कारावास से दंडनीय है, और धारा 35(3) ऐसी हर दशा में — जहाँ धारा 35(1) के अधीन गिरफ़्तारी अपेक्षित नहीं है — गिरफ़्तारी के बजाय हाज़िर होने का नोटिस देना अपेक्षित करती है। अर्थात् जो अपराध सात वर्ष तक के कारावास से दंडनीय है, वह नोटिस की उस व्यवस्था के भीतर आता है, उससे नीचे नहीं। यह सूची सात वर्ष या अधिक पर खींची गई है, इसलिए इसमें वह सीमा-रेखा भी है और उससे ऊपर के अपराध भी।
- 3 वर्ष से कम से दंडनीय अपराध3895तीन वर्ष वह रेखा है जो प्रथम अनुसूची का अवशिष्ट नियम खींचता है: इससे कम में अपराध सामान्यतः असंज्ञेय और जमानतीय होता है, तथा किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय।
- अनिवार्य न्यूनतम दंड वाले अपराध896न्यायालय कही गई अवधि से कम दंड नहीं दे सकता, चाहे तथ्य कितने भी सहानुभूतिपूर्ण हों — यद्यपि कुछ धाराएँ लेखबद्ध कारणों से कम दंड की अनुज्ञा देती हैं।
- केवल जुर्माने से दंडनीय अपराध2412इनमें कारावास का कोई उपबंध नहीं है — धारा केवल जुर्माने तक सीमित है।
पुलिस और जमानत प्रक्रिया के अनुसार
- अजमानतीय अपराध1830अजमानतीय का अर्थ यह नहीं कि जमानत नहीं मिल सकती। इसका अर्थ है कि जमानत अधिकार का विषय नहीं है — न्यायालय को विवेकाधिकार है, और वह प्रायः जमानत देता है।
- जमानतीय अपराध6196जमानत अधिकार का विषय है। पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी या न्यायालय अभियुक्त को जमानत पर छोड़ेगा यदि वह जमानत देने को तैयार है।
- संज्ञेय अपराध2552पुलिस मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना प्रथम इत्तिला रिपोर्ट दर्ज कर अन्वेषण कर सकती है, और बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है।
- असंज्ञेय अपराध5473पुलिस मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना अन्वेषण नहीं कर सकती। इसीलिए थाना प्राथमिकी लेने से इनकार कर परिवाद न्यायालय में ले जाने का निदेश दे सकता है — और इसीलिए जाने से पहले वर्गीकरण जान लेना महत्वपूर्ण है।
- शमनीय अपराध76इनका शमन व्यथित व्यक्ति के साथ किया जा सकता है, जिससे अभियोजन समाप्त हो जाता है। कुछ में न्यायालय की अनुज्ञा पहले अपेक्षित है; सूची बताती है कि किनमें।
- अपराध जिनका शमन पीड़ित न्यायालय के बिना कर सकता है40यहाँ की सबसे संकीर्ण और सबसे उपयोगी सूची: शमन के लिए किसी अनुज्ञा की आवश्यकता नहीं, अतः समझौता होते ही मामला समाप्त हो जाता है।
भा.ना.सु.सं. क्या अनुमति देती है
- प्ली बार्गेनिंग (सौदा-अभिवाक्) के योग्य अपराध5381सात वर्ष तक के कारावास से दंडनीय, और आजीवन कारावास या मृत्युदंड से नहीं। तब भी अपवर्जित: देश की सामाजिक-आर्थिक दशा को प्रभावित करने वाले अपराध, और किसी स्त्री या बालक के विरुद्ध अपराध (दं.प्र.सं. में चौदह वर्ष से कम आयु का बालक कहा गया था)। आवेदन आरोप विरचित होने के 30 दिन के भीतर करना होता है (भा.ना.सु.सं. धारा 290; दं.प्र.सं. में कोई समय-सीमा नहीं थी)।
- संक्षिप्त विचारण योग्य अपराध4691भा.ना.सु.सं. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को तीन वर्ष तक से दंडनीय किसी भी अपराध का संक्षिप्त विचारण करने देती है — दं.प्र.सं. में यह सीमा दो वर्ष थी। संक्षिप्त विचारण में तीन मास से अधिक का दंड नहीं दिया जा सकता।
- किशोर न्याय अधिनियम के अधीन जघन्य अपराध130न्यूनतम सात वर्ष या अधिक के दंड वाले अपराध। केवल इन्हीं में सोलह या सत्रह वर्ष के बालक का बोर्ड द्वारा प्रारंभिक निर्धारण होकर उसका वयस्क के रूप में विचारण हो सकता है (किशोर न्याय अधिनियम धारा 15 और 18(3))। शेष अपराध छोटे (तीन वर्ष तक) या गंभीर हैं।
विचारण करने वाले न्यायालय के अनुसार
- सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय अपराध355सर्वाधिक गंभीर अपराध। सेशन न्यायालय सीधे संज्ञान नहीं ले सकता — मामला मजिस्ट्रेट द्वारा सुपुर्दगी पर उस तक पहुँचता है।
- प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय अपराध1253मध्यम श्रेणी — किसी भी मजिस्ट्रेट के लिए बहुत गंभीर, किंतु सेशन के लिए पर्याप्त गंभीर नहीं।
- किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय अपराध6148सबसे हल्की श्रेणी, और सबसे बड़ी।
इन सूचियों की सीमा
ये सूचियाँ केवल उन धाराओं को दिखाती हैं जिनका वर्गीकरण इस संग्रह में हो चुका है — यह सम्पूर्ण विधि-पुस्तक नहीं है। किसी अपराध का यहाँ न होना यह नहीं दर्शाता कि वह इस श्रेणी में नहीं आता।
