शमनीय अपराध
इनका शमन व्यथित व्यक्ति के साथ किया जा सकता है, जिससे अभियोजन समाप्त हो जाता है। कुछ में न्यायालय की अनुज्ञा पहले अपेक्षित है; सूची बताती है कि किनमें।
76 परिणाम · संहिता की शमन-सारणी, जैसी वह प्रत्येक धारा पर लागू होती है।
- 88जिससे गर्भपात हो जाता है।भा.न्या.सं. · 7 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 306क्लर्क या नौकर द्वारा मालिक के कब्जे में मौजूद संपत्ति की चोरी।भा.न्या.सं. · 7 वर्षअजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 325धारा 325 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के लिए दण्डभा.दं.सं. · 7 वर्षजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 407धारा 407 - वाहक, आदि द्वारा आपराधिक न्यासभंगभा.दं.सं. · 7 वर्षअजमानतीयसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 408धारा 408 - लिपिक या सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंगभा.दं.सं. · 7 वर्षअजमानतीयसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 420धारा 420 - छल करना और संपत्ति परिदत्त करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करनाभा.दं.सं. · 7 वर्षअजमानतीयसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 494पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दोबारा शादी करना।भा.दं.सं. · 7 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 303चोरी।भा.न्या.सं. · 5 वर्षकोई भी मजिस्ट्रेट
- 319प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी।भा.न्या.सं. · 5 वर्षजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 325किसी जानवर को मारकर या अपंग करके उसे नुकसान पहुंचाना।भा.न्या.सं. · 5 वर्षजमानतीयसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 429धारा 429 - किसी मूल्य के ढोर, आदि को या पचास रुपए के मूल्य के किसी जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टिभा.दं.सं. · 5 वर्षजमानतीयसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 430धारा 430 - सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टिभा.दं.सं. · 5 वर्षजमानतीयसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 335धारा 335 - प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करनाभा.दं.सं. · 4 वर्षजमानतीयसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 79किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से कहे गए शब्द, हावभाव या कार्य।भा.न्या.सं. · 3 वर्षजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 322बेईमानी या कपटपूर्ण तरीके से किए गए हस्तांतरण विलेख का निष्पादन जिसमें प्रतिफल का झूठा विवरण शामिल हो।भा.न्या.सं. · 3 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 323संपत्ति को बेईमानी या धोखाधड़ी से हटाना या छिपाना।भा.न्या.सं. · 3 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 324धारा 324 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करनाभा.दं.सं. · 3 वर्षजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 344धारा 344 - दस या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोधभा.दं.सं. · 3 वर्षजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 379धारा 379 - चोरी के लिए दंडभा.दं.सं. · 3 वर्षअजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 406धारा 406 - आपराधिक न्यासभंग के लिए दंडभा.दं.सं. · 3 वर्षअजमानतीयसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 411धारा 411 - चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करनाभा.दं.सं. · 3 वर्षअजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 414धारा 414 - चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करनाभा.दं.सं. · 3 वर्षअजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 418धारा 418 - इस ज्ञान के साथ छल करना कि उस व्यक्ति को सदोष हानि हो सकती है जिसका हित संरक्षित रखने के लिए अपराधी आबद्ध हैभा.दं.सं. · 3 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 419धारा 419 - प्रतिरूपण द्वारा छल के लिए दंडभा.दं.सं. · 3 वर्षजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 509धारा 509 - शब्द, अंगविक्षेप या कार्य जो किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित हैभा.दं.सं. · 3 वर्षजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 84किसी विवाहित महिला को आपराधिक इरादे से बहला-फुसलाकर ले जाना या हिरासत में लेना।भा.न्या.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 133किसी व्यक्ति को अपमानित करने के इरादे से हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना, गंभीर उकसावे के अलावा अन्य मामलों में।भा.न्या.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 314संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग।भा.न्या.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 320लेनदारों के बीच वितरण को रोकने के लिए बेईमानी या धोखाधड़ी से संपत्ति को हटाना या छिपाना।भा.न्या.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 321बेईमानी या धोखाधड़ी से लेनदारों को ऋण उपलब्ध होने से रोकना।भा.न्या.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 352शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना।भा.न्या.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 356मानहानि।भा.न्या.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेय
- 170धारा 170 - लोक सेवक का प्रतिरूपणभा.दं.सं. · 2 वर्षअजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 338धारा 338 - ऐसे कार्य द्वारा घोर उपहति कारित करना जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाएभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 343धारा 343 - तीन या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोधभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 346धारा 346 - गुप्त स्थान में सदोष परिरोधभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- 355धारा 355 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोगभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 403धारा 403 - सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोगभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 421धारा 421 - लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपानाभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 422धारा 422 - त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करनाभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 423धारा 423 - अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादनभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 424धारा 424 - सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जानाभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 427धारा 427 - रिष्टि जिससे पचास रुपए का नुकसान होता हैभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 428धारा 428 - दस रुपए के मूल्य के जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टिभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 451धारा 451 - कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचारभा.दं.सं. · 2 वर्षअजमानतीयसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 483धारा 483 - अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का कूटकरणभा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 498किसी विवाहित महिला को आपराधिक इरादे से बहला-फुसलाकर ले जाना या हिरासत में लेना।भा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 500मानहानि के लिए दंड।भा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयसत्र न्यायालय
- 504जानबूझकर अपमान करना और शांति भंग करने के इरादे से ऐसा करना।भा.दं.सं. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयकोई भी मजिस्ट्रेट
- 138खाते में अपर्याप्त धनराशि आदि के कारण चेक का अनादरण।प.लि. अधि. · 2 वर्षजमानतीयअसंज्ञेयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
इनसे संबंधित
कौन-सी संहिता लागू होगी?
प्रक्रिया: 1 जुलाई 2024 को या उसके बाद दर्ज हर मामले पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू है; उस दिन पहले से लंबित अन्वेषण, जाँच या विचारण दंड प्रक्रिया संहिता के अधीन चलता रहता है (भा.ना.सु.सं. धारा 531(2)(क))। अपराध: 1 जुलाई 2024 को या उसके बाद किया गया कृत्य भारतीय न्याय संहिता के अधीन, उससे पहले का भारतीय दंड संहिता के अधीन।
