धारा 321 · बेईमानी या धोखाधड़ी से लेनदारों को ऋण उपलब्ध होने से रोकना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जो कोई बेईमानी या कपट से अपने या किसी अन्य व्यक्ति के ऋण के भुगतान के लिए कानून के अनुसार देय किसी ऋण या मांग को उपलब्ध कराने से रोकता है, उसे दो वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 2 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 321IPC 422
422. Dishonestly or fraudulently preventing debt being available for creditors.
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