धारा 265 · धारा 265. अन्यथा अनुपबंधित दशाओँ में विधिपूर्वक पकड़ने मैं प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
265. जो कोई स्वयं अपने या किसी अन्य व्यक्ति के विधिपूर्वक पकड़े जाने में जानबूझकर कोई प्रतिरोध करता है या अवैध बाधा डालता है या किसी अभिरक्षा में से, जिसमें वह विधिपूर्वक निरदूध हो, निकत्र भागता है या निकल भागने का प्रयत्न करता है या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी अभिरक्षा में से, जिसमें वह व्यक्ति विधिपूर्वक निरुदृध हो, छुड़ाता है या छुड़ाने का प्रयत्न करता है वह किसी ऐसी दशा में, जिसके लिए धारा 262 या धारा 263 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में उपबंध नहीं है, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 6 माह
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 265IPC 225B
225B. Resistance or obstruction to lawful apprehension, or escape or rescue in cases not otherwise provided for.
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