धारा 192 · जानबूझकर दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना - यदि दंगा होता है; यदि दंगा नहीं होता है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जो कोई भी दुर्भावनापूर्वक या जानबूझकर कोई अवैध कार्य करके किसी व्यक्ति को उकसाता है, इस इरादे से या यह जानते हुए कि ऐसा उकसावा दंगा करने का अपराध का कारण बनेगा, तो यदि ऐसे उकसावे के परिणामस्वरूप दंगा किया जाता है, तो उसे एक वर्ष तक की कारावास की सजा, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा; और यदि दंगा नहीं किया जाता है, तो उसे छह महीने तक की कारावास की सजा, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 1 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 192IPC 153
153. Wantonly giving provocation with intent to cause riot—if rioting be committed; if not committed.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
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