धारा 158 · ऐसे कैदी को भागने में सहायता करना, उसे बचाना या उसे शरण देना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जो कोई भी जानबूझकर किसी राजकीय कैदी या युद्धबंदी को वैध हिरासत से भागने में सहायता करता है या सहायता प्रदान करता है, या ऐसे किसी कैदी को छुड़ाता है या छुड़ाने का प्रयास करता है, या वैध हिरासत से भागे हुए किसी कैदी को शरण देता है या छुपाता है, या ऐसे कैदी को पुनः पकड़ने में किसी प्रकार का प्रतिरोध करता है या करने का प्रयास करता है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
स्पष्टीकरण.—भारत में किसी राज्य बंदी या युद्धबंदी को, जिसे पैरोल पर कुछ निश्चित सीमाओं के भीतर घूमने की अनुमति दी गई है, यदि वह उन सीमाओं से बाहर चला जाता है जिनके भीतर उसे घूमने की अनुमति है, तो उसे वैध हिरासत से भागने वाला माना जाता है।
स्पष्टीकरण.—भारत में किसी राज्य बंदी या युद्धबंदी को, जिसे पैरोल पर कुछ निश्चित सीमाओं के भीतर घूमने की अनुमति दी गई है, यदि वह उन सीमाओं से बाहर चला जाता है जिनके भीतर उसे घूमने की अनुमति है, तो उसे वैध हिरासत से भागने वाला माना जाता है।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- आजीवन कारावास
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 158IPC 130
130. Aiding escape of, rescuing or harbouring such prisoner.
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