धारा 299 · किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिनमें उनके धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना शामिल है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जो कोई भी जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से भारत के किसी भी वर्ग के नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से, बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा, संकेतों द्वारा, दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों द्वारा या किसी अन्य माध्यम से, उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करता है या अपमान करने का प्रयास करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 3 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 299IPC 295A
295A. Deliberate and malicious acts, intended to outrage religious feelings of any class by insulting its religion or religious beliefs.
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