धारा 232 · किसी भी व्यक्ति को झूठी गवाही देने के लिए धमकाना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई किसी दूसरे व्यक्ति को उसकी जान, प्रतिष्ठा या संपत्ति को, या किसी ऐसे व्यक्ति की जान या प्रतिष्ठा को, जिसमें उस व्यक्ति का हित हो, इस इरादे से कि वह व्यक्ति झूठी गवाही दे, कोई हानि पहुँचाने की धमकी देता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से, जो सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट झूठे साक्ष्य के परिणामस्वरूप किसी निर्दोष व्यक्ति को मृत्युदंड या सात वर्ष से अधिक कारावास की सजा दी जाती है, तो धमकी देने वाले व्यक्ति को उसी प्रकार और उसी सीमा तक उसी प्रकार का दंड और सजा दी जाएगी जिस प्रकार उस निर्दोष व्यक्ति को दी जाती है।
(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट झूठे साक्ष्य के परिणामस्वरूप किसी निर्दोष व्यक्ति को मृत्युदंड या सात वर्ष से अधिक कारावास की सजा दी जाती है, तो धमकी देने वाले व्यक्ति को उसी प्रकार और उसी सीमा तक उसी प्रकार का दंड और सजा दी जाएगी जिस प्रकार उस निर्दोष व्यक्ति को दी जाती है।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- मृत्युदंड
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 232IPC 195A
195A. Threatening any person to give false evidence.
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