धारा 77 · ताक-झांक करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जो कोई भी किसी महिला को निजी कृत्य करते हुए देखता है, या उसकी छवि बनाता है, ऐसी परिस्थितियों में जहां महिला को सामान्यतः यह अपेक्षा होती है कि उसे न तो अपराधी द्वारा और न ही अपराधी के इशारे पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा देखा जा रहा है, या ऐसी छवि को प्रसारित करता है, तो उसे पहली बार दोषी पाए जाने पर कम से कम एक वर्ष से लेकर तीन वर्ष तक के कारावास की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा, और दूसरी या उसके बाद की बार दोषी पाए जाने पर कम से कम तीन वर्ष से लेकर सात वर्ष तक के कारावास की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
स्पष्टीकरण 1.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “निजी कृत्य” में किसी ऐसे स्थान पर किया गया अवलोकन का कृत्य शामिल है, जहाँ परिस्थितियों के अनुसार निजता की उम्मीद की जा सकती है और जहाँ पीड़ित के जननांग, नितंब या स्तन खुले हों या केवल अंतर्वस्त्र से ढके हों; या पीड़ित शौचालय का उपयोग कर रहा हो; या पीड़ित कोई ऐसा यौन कृत्य कर रहा हो जो सामान्यतः सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाता है।
स्पष्टीकरण 2.—जहां पीड़ित व्यक्ति छवियों को कैप्चर करने या किसी भी कार्य के लिए सहमति देता है, लेकिन उन्हें तीसरे व्यक्तियों को प्रसारित करने के लिए सहमति नहीं देता है और जहां ऐसी छवि या कार्य प्रसारित किया जाता है, तो ऐसा प्रसार इस धारा के तहत अपराध माना जाएगा।
स्पष्टीकरण 1.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “निजी कृत्य” में किसी ऐसे स्थान पर किया गया अवलोकन का कृत्य शामिल है, जहाँ परिस्थितियों के अनुसार निजता की उम्मीद की जा सकती है और जहाँ पीड़ित के जननांग, नितंब या स्तन खुले हों या केवल अंतर्वस्त्र से ढके हों; या पीड़ित शौचालय का उपयोग कर रहा हो; या पीड़ित कोई ऐसा यौन कृत्य कर रहा हो जो सामान्यतः सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाता है।
स्पष्टीकरण 2.—जहां पीड़ित व्यक्ति छवियों को कैप्चर करने या किसी भी कार्य के लिए सहमति देता है, लेकिन उन्हें तीसरे व्यक्तियों को प्रसारित करने के लिए सहमति नहीं देता है और जहां ऐसी छवि या कार्य प्रसारित किया जाता है, तो ऐसा प्रसार इस धारा के तहत अपराध माना जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 7 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 1 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 77IPC 354C
354C. Voyeurism.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
