धारा 119 · संपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई भी पीड़ित से, या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति से, कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति जबरन वसूलने के उद्देश्य से, या पीड़ित या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से, जो अवैध हो या जिससे अपराध करने में सुविधा हो, स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(2) जो कोई भी उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी उद्देश्य से स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाता है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
(2) जो कोई भी उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी उद्देश्य से स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाता है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- आजीवन कारावास
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 119IPC 327
327. Voluntarily causing hurt to extort property, or to constrain to an illegal to an act.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
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