धारा 230 · मृत्युदंड के अपराध में दोषसिद्धि प्राप्त करने के इरादे से झूठे साक्ष्य देना या गढ़ना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई झूठी गवाही देता है या गढ़ता है, इस इरादे से कि वह किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने का कारण बने, जो भारत में उस समय लागू कानून के अनुसार मृत्युदंड योग्य है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, और उस पर पचास हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट झूठी गवाही के परिणामस्वरूप किसी निर्दोष व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है और उसे फाँसी दी जाती है, तो ऐसी झूठी गवाही देने वाले व्यक्ति को या तो मृत्युदंड दिया जाएगा या उपधारा (1) में निर्दिष्ट दंड दिया जाएगा।
(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट झूठी गवाही के परिणामस्वरूप किसी निर्दोष व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है और उसे फाँसी दी जाती है, तो ऐसी झूठी गवाही देने वाले व्यक्ति को या तो मृत्युदंड दिया जाएगा या उपधारा (1) में निर्दिष्ट दंड दिया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- आजीवन कारावास
- जुर्माना
- ₹50,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 230IPC 194
194. Giving or fabricating false evidence with intent to procure conviction of capital offence.
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