धारा 267 · धारा 267. न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का जानबूझकर अपमान या उसके कार्य में विघ्न ।
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267. जो कोई किसी लोक सेवक का उस समय, जबकि ऐसा लोक सेवक न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में बैठा हुआ हो, जानबूझकर कोई अपमान करेगा या उसके कार्य कोई विघ्न डालेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 6 माह
- जुर्माना
- ₹5,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 267IPC 228
228. Intentional insult or interruption to public servant sitting in judicial proceeding.
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