धारा 253 · धारा 253. ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है।
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253. जब किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध या आरोपित व्यक्ति उस अपराध के लिए वैध अभिरक्षा में होते हुए ऐसी अभिरक्षा से निकल आगे, या जब कभी कोई रोक सेवक ऐसे लौक सेवक की विधिपूर्ण शक्तियों का प्रयोग करते हुए किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति को पकड़ने का आदेश दे, तब जो कोई ऐसे निकल भागने को या पकड़े जाने के आदेश को जानते हुए, उस व्यक्ति को पकड़ा जाना निवारित करने के आशय से उसे संश्रय देगा या छिपाएगा, वह निम्नलिखित रीति से दंडित किया जाएगा,-
(क) यदि वह अपराध, जिसके लिए वह व्यक्ति अभिरक्षा में था या पकड़े जाने के लिए आदेशित है, मृत्यु से दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास सै, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा ;
(ख) यदि वह अपराध आजीवन कारावास से या दस वर्ष के कारावास से दंडनीय हो, तो वह जुर्माने सहित या रहित दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा ;
(ग) यदि वह अपराध ऐसे कारावास से दंडनीय हो, जो एक वर्ष तक का, न कि दस वर्ष तक का हो सकता है, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से, जिसकी अवधि उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौंथाई तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण--इस धारा में “अपराध” के अंतर्गत कोई भी ऐसा कार्य या लोप भी आता है, जिसका कोई व्यक्ति भारत से बाहर दोषी होना अभिकथित हो, जो यदि वह भारत में उसका दोषी होता, तो अपराध के रूप में दंडनीय होता और जिसके लिए, वह प्रत्यर्पण से संबंधित किसी विधि के अधीन या अन्यथा भारत में पकड़े जाने या अभिरक्षा में निरुद्ध किए जाने के दायित्व के अधीन हो, और प्रत्येक ऐसा कार्य या लोप इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसे दंडनीय समझा जाएगा, मानो अभियुक्त व्यक्ति भारत में उसका दोषी हुआ था ।
अपवाद--इस धारा के उपबंधों का विस्तार ऐसे मामले पर नहीं है, जिसमें संश्रय देना या छिपाना पकड़े जाने वाले व्यक्ति के पति या पत्नी द्वारा हो ।
(क) यदि वह अपराध, जिसके लिए वह व्यक्ति अभिरक्षा में था या पकड़े जाने के लिए आदेशित है, मृत्यु से दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास सै, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा ;
(ख) यदि वह अपराध आजीवन कारावास से या दस वर्ष के कारावास से दंडनीय हो, तो वह जुर्माने सहित या रहित दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा ;
(ग) यदि वह अपराध ऐसे कारावास से दंडनीय हो, जो एक वर्ष तक का, न कि दस वर्ष तक का हो सकता है, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से, जिसकी अवधि उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौंथाई तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण--इस धारा में “अपराध” के अंतर्गत कोई भी ऐसा कार्य या लोप भी आता है, जिसका कोई व्यक्ति भारत से बाहर दोषी होना अभिकथित हो, जो यदि वह भारत में उसका दोषी होता, तो अपराध के रूप में दंडनीय होता और जिसके लिए, वह प्रत्यर्पण से संबंधित किसी विधि के अधीन या अन्यथा भारत में पकड़े जाने या अभिरक्षा में निरुद्ध किए जाने के दायित्व के अधीन हो, और प्रत्येक ऐसा कार्य या लोप इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसे दंडनीय समझा जाएगा, मानो अभियुक्त व्यक्ति भारत में उसका दोषी हुआ था ।
अपवाद--इस धारा के उपबंधों का विस्तार ऐसे मामले पर नहीं है, जिसमें संश्रय देना या छिपाना पकड़े जाने वाले व्यक्ति के पति या पत्नी द्वारा हो ।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- मृत्युदंड / आजीवन कारावास
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
पुराने कानून में
BNS 253IPC 216
216. Harbouring offender who has escaped from custody or whose apprehension has been ordered.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
