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जानबूझकर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से, या इस ज्ञान के साथ कि वह किसी व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, कोई कार्य करता है और इस प्रकार किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाता है, तो उसे “स्वेच्छा से चोट पहुँचाना” कहा जाता है। (2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता…
पूरा पढ़ेंधारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई किसी कार्य को इस आशय से करता है कि तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे या इस ज्ञान के साथ करता है कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे और तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करता है, वह “स्वेच्छया उपहति करता है”, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंजानबूझकर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से, या इस ज्ञान के साथ कि वह किसी व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, कोई कार्य करता है और इस प्रकार किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाता है, तो उसे “स्वेच्छा से चोट पहुँचाना” कहा जाता है। (2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता…
पूरा पढ़ेंधारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई किसी कार्य को इस आशय से करता है कि तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे या इस ज्ञान के साथ करता है कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे और तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करता है, वह “स्वेच्छया उपहति करता है”, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंबेईमानी या धोखाधड़ी से लेनदारों को ऋण उपलब्ध होने से रोकना।
जो कोई बेईमानी या कपट से अपने या किसी अन्य व्यक्ति के ऋण के भुगतान के लिए कानून के अनुसार देय किसी ऋण या मांग को उपलब्ध कराने से रोकता है, उसे दो वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 422 - त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना
त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना जो कोई किसी त्रऐंण का या मांग का, जो स्वयं उसको या किसी अन्य व्यक्ति को शोध्य हो, अपने या ऐसे अन्य व्यक्ति के त्रऐंणों को चुकाने के लिए विधि के अनुसार उपलभ्य होना कपटपूर्वक या बेईमानी से निवारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास…
पूरा पढ़ें- BNS §115IPC §321बदलाव हुआ
जानबूझकर चोट पहुंचाना।
धारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §115(1)IPC §321
जानबूझकर चोट पहुंचाना।
धारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §321IPC §422
बेईमानी या धोखाधड़ी से लेनदारों को ऋण उपलब्ध होने से रोकना।
धारा 422 - त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना
