संक्षिप्त विचारण योग्य अपराध

भा.ना.सु.सं. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को तीन वर्ष तक से दंडनीय किसी भी अपराध का संक्षिप्त विचारण करने देती है — दं.प्र.सं. में यह सीमा दो वर्ष थी। संक्षिप्त विचारण में तीन मास से अधिक का दंड नहीं दिया जा सकता।

4691 परिणाम · भा.ना.सु.सं. धारा 283(2) (दं.प्र.सं. धारा 260) और धारा 285(2) (दं.प्र.सं. धारा 262(2))। संक्षिप्त विचारण करना या न करना मजिस्ट्रेट का विवेक है, अभियुक्त का नहीं।

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कौन-सी संहिता लागू होगी?

प्रक्रिया: 1 जुलाई 2024 को या उसके बाद दर्ज हर मामले पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू है; उस दिन पहले से लंबित अन्वेषण, जाँच या विचारण दंड प्रक्रिया संहिता के अधीन चलता रहता है (भा.ना.सु.सं. धारा 531(2)(क))। अपराध: 1 जुलाई 2024 को या उसके बाद किया गया कृत्य भारतीय न्याय संहिता के अधीन, उससे पहले का भारतीय दंड संहिता के अधीन।