BNSS ने इसकी जगह लीCrPCकेंद्रीय कानून1973
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973
An Act to consolidate and amend the law relating to Criminal Procedure.
1973 का अधिनियम संख्या 2
- धाराएँ
- 535
- अध्याय
- 39
- इसकी जगह
- BNSS, 2023
विषय-सूची
IIConstitution of Criminal Courts and Offices§ 6–25A21 धाराएँ
- 6आपराधिक न्यायालयों के प्रकार।
- 7धारा 7. प्रादेशिक खंड
- 8धारा 8. महानगर क्षेत्र
- 9धारा 9. सेशन न्यायालय
- 10धारा 10. सहायक सेशन न्यायाधीशों की अधीनता
- 11न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय।
- 12धारा 12. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि
- 13धारा 13. विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट
- 14धारा 14. न्यायिक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय अधिकारिता
- 15धारा 15. न्यायिक मजिस्ट्रेटों की अधीनता
- 16धारा 16. महानगर मजिस्ट्रेटों के न्यायालय
- 17धारा 17. मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट
- 18धारा 18. विशेष महानगर मजिस्ट्रेट
- 19धारा 19. महानगर मजिस्ट्रेटों की अधीनता
- 20धारा 20. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
- 21धारा 21. विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट
- 22धारा 22. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय अधिकारिता
- 23धारा 23. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की अधीनता
- 24धारा 24. लोक अभियोजक
- 25धारा 25. सहायक लोक अभियोजक
- 25Aधारा 25A. अभियोजन निदेशालय
IIIPower of Courts§ 26–3510 धाराएँ
- 26धारा 26. वे न्यायालय जिनके द्वारा अपराध विचारणीय हैं
- 27धारा 27. किशोरों के मामले में अधिकारिता
- 28धारा 28. वे दंडादेश जो उच्च न्यायालय और सेशन न्यायाधीश दे सकते हैं
- 29धारा 29. वे दंडादेश जो मजिस्ट्रेट दे सकते हैं
- 30धारा 30. जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश
- 31धारा 31. एक ही विचारण में कई अपराधों के लिए दोषसिद्धि की दशा में दंडादेश
- 32धारा 32. शक्तियां प्रदान करने की रीति
- 33धारा 33. नियुक्त अधिकारियों की शक्तियां
- 34धारा 34. शक्तियों का वापस लिया जाना
- 35धारा 35. न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की शक्तियों का उनके पद-उत्तरवर्तियों द्वारा प्रयोक्तव्य होना
IVA.--powers of Superior Officers of Police · B.--aid to the Magistrates and the Police§ 36–405 धाराएँ
A.--powers of Superior Officers of Police
B.--aid to the Magistrates and the Police
VArrest of Persons§ 41–60A29 धाराएँ
- 41धारा 41. पुलिस वारंट के बिना कब गिरफ्तार कर सकेगी
- 41Aधारा 41A. पुलिस अधिकारी के समक्ष हाजिर होने की सूचना
- 41Bधारा 41B. गिरफ्तारी की प्रक्रिया और गिरफ्तारी करने वाले अधिकारी के कर्तव्य
- 41Cधारा 41C. जिलों में नियंत्रण कक्ष
- 41Dधारा 41D. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का प्रश्न किए जाने के दौरान अपनी पसंद के अधिवक्ता से मिलने का अधिकार
- 42धारा 42. नाम और निवास बताने से इंकार करने पर गिरफ्तारी
- 43धारा 43. प्राइवेट व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी और ऐसी गिरफ्तारी पर प्रक्रिया
- 44धारा 44. मजिस्ट्रेट द्वारा गिरफ्तारी
- 45धारा 45. सशस्त्र बलों के सदस्यों का गिरफ्तारी से संरक्षण
- 46धारा 46. गिरफ्तारी कैसे की जाएगी
- 47धारा 47. उस स्थान की तलाशी, जिसमें गिरफ्तार किया जाने वाला व्यक्ति घुसा हो
- 48धारा 48. अन्य अधिकारिताओं में अपराधियों का पीछा करना
- 49धारा 49. अनावश्यक अवरोध न करना
- 50धारा 50. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों की और जमानत के अधिकार की इत्तिला दिया जाना
- 50Aधारा 50A. गिरफ्तारी करने वाले व्यक्ति की, गिरफ्तारी आदि के बारे में नामनिर्दिष्ट व्यक्ति को इत्तिला देने की बाध्यता
- 51धारा 51. गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की तलाशी
- 52धारा 52. आक्रामक आयुधों को अभिगृहीत करने की शक्ति
- 53धारा 53. पुलिस अधिकारी की प्रार्थना पर चिकित्सा-व्यवसायी द्वारा अभियुक्त की परीक्षा
- 53Aधारा 53A. चिकित्सा-व्यवसायी द्वारा बलात्संग के अभियुक्त व्यक्ति की परीक्षा
- 54धारा 54. चिकित्सा अधिकारी द्वारा गिरफ्तार व्यक्ति की परीक्षा
- 54Aधारा 54A. गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान
- 55धारा 55. जब पुलिस अधिकारी अधीनस्थ को वारंट के बिना गिरफ्तारी के लिए प्रतिनियुक्त करता है तब प्रक्रिया
- 55Aधारा 55A. गिरफ्तार व्यक्ति का स्वास्थ्य और सुरक्षा
- 56धारा 56. गिरफ्तार व्यक्ति का मजिस्ट्रेट या पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के समक्ष ले जाया जाना
- 57धारा 57. गिरफ्तार व्यक्ति का चौबीस घंटे से अधिक निरुद्ध न रखा जाना
- 58धारा 58. पुलिस द्वारा गिरफ्तारियों की रिपोर्ट किया जाना
- 59धारा 59. गिरफ्तार व्यक्ति का उन्मोचन
- 60धारा 60. निकल भागने पर पीछा करने और पुनः पकड़ने की शक्तियां
- 60Aधारा 60A. गिरफ्तारी का संहिता के अनुसार ही किया जाना
VIA.--Summons · B.--Warrant of arrest · C.--Proclamation and attachment · D.--Other rules regarding processes§ 61–9030 धाराएँ
A.--Summons
- 61समन का प्रारूप।
- 62समन किस प्रकार तामील किया गया।
- 63धारा 63. निगमित निकायों और सोसाइटियों पर समन की तामील
- 64धारा 64. जब समन किया गया व्यक्ति न मिल सके तब तामील
- 65धारा 65. जब पूर्वोक्त रूप से तामील नहीं की जा सकती तब प्रक्रिया
- 66सरकारी कर्मचारी के रूप में सेवा।
- 67धारा 67. स्थानीय सीमाओं के बाहर समन की तामील
- 68धारा 68. ऐसे मामलों में तामील का सबूत और जब तामील करने वाला अधिकारी उपस्थित न हो तब
- 69धारा 69. साक्षी पर डाक द्वारा समन की तामील
B.--Warrant of arrest
- 70गिरफ्तारी वारंट का प्रारूप और अवधि।
- 71धारा 71. प्रतिभूति लिए जाने का निदेश देने की शक्ति
- 72धारा 72. वारंट किन्हें निदिष्ट किए जाएंगे
- 73धारा 73. वारंट किसी व्यक्ति को निदिष्ट किया जा सकेगा
- 74धारा 74. पुलिस अधिकारी को निदिष्ट वारंट
- 75धारा 75. वारंट का सार सूचित किया जाना
- 76धारा 76. गिरफ्तार व्यक्ति का न्यायालय के समक्ष विलम्ब के बिना लाया जाना
- 77धारा 77. वारंट कहां निष्पादित किया जा सकेगा
- 78धारा 78. अधिकारिता के बाहर निष्पादन के लिए वारंट का भेजा जाना
- 79धारा 79. अधिकारिता के बाहर निष्पादन के लिए पुलिस अधिकारी को निदिष्ट वारंट
- 80धारा 80. उस व्यक्ति की गिरफ्तारी पर प्रक्रिया जिसके विरुद्ध वारंट जारी किया गया है
- 81धारा 81. उस मजिस्ट्रेट द्वारा प्रक्रिया जिसके समक्ष ऐसा गिरफ्तार किया गया व्यक्ति लाया जाता है
C.--Proclamation and attachment
VIIA.--Summons to produce · B.--Search-warrants · C.--General provisions relating to searches · D.--Miscellaneous§ 91–10515 धाराएँ
A.--Summons to produce
B.--Search-warrants
- 93धारा 93. तलाशी-वारंट कब जारी किया जा सकेगा
- 94धारा 94. ऐसे स्थान की तलाशी जिसमें चुराई हुई संपत्ति, कूटरचित दस्तावेज आदि होने का संदेह है
- 95धारा 95. कतिपय प्रकाशनों को अधिहृत घोषित करने और उनके लिए तलाशी-वारंट जारी करने की शक्ति
- 96धारा 96. अधिहरण की घोषणा को अपास्त करने के लिए उच्च न्यायालय को आवेदन
- 97धारा 97. सदोष परिरुद्ध व्यक्तियों के लिए तलाशी
- 98धारा 98. अपहृत स्त्रियों के प्रत्यावर्तन के लिए विवश करने की शक्ति
C.--General provisions relating to searches
VIIAReciprocal Arrangements for Assistance in Certain Matters and Procedure for Attachment and Forfeiture of Property§ 105-I–105L12 धाराएँ
- 105-Iधारा 105I. समपहरण के बदले जुर्माना
- 105Aधारा 105A. परिभाषाएं
- 105Bधारा 105B. व्यक्तियों का अंतरण सुनिश्चित कराने में सहायता
- 105Cधारा 105C. संपत्ति की कुर्की या समपहरण के आदेशों के संबंध में सहायता
- 105Dधारा 105D. विधिविरुद्ध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान करना
- 105Eधारा 105E. संपत्ति का अभिग्रहण या कुर्की
- 105Fधारा 105F. इस अध्याय के अधीन अभिगृहीत या समपहृत संपत्ति का प्रबंध
- 105Gधारा 105G. संपत्ति के समपहरण की सूचना
- 105Hधारा 105H. कतिपय मामलों में संपत्ति का समपहरण
- 105Jधारा 105J. कतिपय अंतरणों का शून्य और अकृत होना
- 105Kधारा 105K. अनुरोध पत्र के संबंध में प्रक्रिया
- 105Lधारा 105L. इस अध्याय का लागू होना
VIIISecurity for Keeping the Peace and for Good Behaviour§ 106–12419 धाराएँ
- 106धारा 106. दोषसिद्धि पर परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति
- 107धारा 107. अन्य मामलों में परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति
- 108धारा 108. राजद्रोहात्मक बातें फैलाने वाले व्यक्तियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति
- 109धारा 109. संदिग्ध व्यक्तियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति
- 110धारा 110. अभ्यस्त अपराधियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति
- 111धारा 111. आदेश किया जाना
- 112धारा 112. न्यायालय में उपस्थित व्यक्ति के संबंध में प्रक्रिया
- 113धारा 113. ऐसे उपस्थित न होने वाले व्यक्ति की दशा में समन या वारंट
- 114धारा 114. आदेश की प्रति का समन या वारंट के साथ होना
- 115धारा 115. व्यक्तिगत हाजिरी से अभिमुक्ति देने की शक्ति
- 116धारा 116. इत्तिला की सत्यता के बारे में जांच
- 117धारा 117. प्रतिभूति देने का आदेश
- 118धारा 118. जिस व्यक्ति के विरुद्ध इत्तिला दी गई है उसका उन्मोचन
- 119धारा 119. वह अवधि, जिसके लिए प्रतिभूति अपेक्षित है, उसका प्रारंभ
- 120धारा 120. बंधपत्र की अंतर्वस्तु
- 121धारा 121. प्रतिभुओं को नामंजूर करने की शक्ति
- 122धारा 122. प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम पर कारावास
- 123धारा 123. प्रतिभूति देने में असफल रहने के कारण कारावासित व्यक्तियों को छोड़ने की शक्ति
- 124धारा 124. बंधपत्र की अनवसित अवधि के लिए प्रतिभूति
IXOrder for Maintenance of Wives, Children and Parents§ 125–1284 धाराएँ
XA.--Unlawful assemblies · B.--Public nuisances · C.--Urgent cases of nuisance or apprehended danger · D.--Disputes as to immovable property§ 129–14821 धाराएँ
A.--Unlawful assemblies
B.--Public nuisances
- 133धारा 133. न्यूसेंस को हटाने के लिए सशर्त आदेश
- 134धारा 134. आदेश की तामील या अधिसूचना
- 135धारा 135. जिस व्यक्ति को आदेश संबोधित है, वह उसका पालन करे या कारण दर्शित करे
- 136धारा 136. उसके ऐसा करने में असफल रहने के परिणाम
- 137धारा 137. जहां लोक अधिकार का अस्तित्व प्रत्याख्यात किया जाता है वहां प्रक्रिया
- 138धारा 138. जहां वह कारण दर्शित करने के लिए हाजिर होता है वहां प्रक्रिया
- 139धारा 139. स्थानीय अन्वेषण और विशेषज्ञ की परीक्षा का निदेश देने की मजिस्ट्रेट की शक्ति
- 140धारा 140. लिखित अनुदेश आदि देने की मजिस्ट्रेट की शक्ति
- 141धारा 141. आदेश के पूर्ण किए जाने पर प्रक्रिया और अवज्ञा के परिणाम
- 142धारा 142. जांच लंबित रहने तक व्यादेश
- 143धारा 143. मजिस्ट्रेट लोक न्यूसेंस की पुनरावृत्ति या उसे चालू रखने का प्रतिषेध कर सकेगा
C.--Urgent cases of nuisance or apprehended danger
XIPreventive Action of the Police§ 149–1535 धाराएँ
XIIInformation to the Police and Their Powers to Investigate§ 154–17626 धाराएँ
- 154धारा 154. संज्ञेय मामलों में इत्तिला
- 155धारा 155. असंज्ञेय मामलों के बारे में इत्तिला और ऐसे मामलों का अन्वेषण
- 156धारा 156. संज्ञेय मामलों का अन्वेषण करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति
- 157धारा 157. अन्वेषण के लिए प्रक्रिया
- 158धारा 158. रिपोर्ट किस प्रकार भेजी जाए
- 159धारा 159. अन्वेषण या प्रारंभिक जांच करने की शक्ति
- 160धारा 160. साक्षियों की हाजिरी की अपेक्षा करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति
- 161धारा 161. पुलिस द्वारा साक्षियों की परीक्षा
- 162धारा 162. पुलिस को दिए गए कथनों पर हस्ताक्षर न किया जाना: कथनों का साक्ष्य में उपयोग
- 163धारा 163. कोई प्रलोभन न दिया जाना
- 164धारा 164. संस्वीकृतियों और कथनों का अभिलेखन
- 164Aधारा 164A. बलात्संग की पीड़िता की चिकित्सीय परीक्षा
- 165धारा 165. पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी
- 166धारा 166. पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी कब अन्य अधिकारी से तलाशी-वारंट जारी करने की अपेक्षा कर सकता है
- 166Aधारा 166A. भारत से बाहर किसी देश या स्थान में अन्वेषण के लिए सक्षम प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र
- 166Bधारा 166B. भारत में अन्वेषण के लिए भारत से बाहर किसी देश या स्थान से किसी न्यायालय या प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र
- 167धारा 167. जब चौबीस घंटे में अन्वेषण पूरा न हो सके तब प्रक्रिया
- 168धारा 168. अधीनस्थ पुलिस अधिकारी द्वारा अन्वेषण की रिपोर्ट
- 169धारा 169. साक्ष्य के अपर्याप्त होने पर अभियुक्त का छोड़ा जाना
- 170धारा 170. साक्ष्य पर्याप्त होने पर मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाना
- 171धारा 171. परिवादी और साक्षियों से पुलिस अधिकारी के साथ जाने की अपेक्षा न किया जाना और उनका अवरोध के अधीन न होना
- 172धारा 172. अन्वेषण में कार्यवाही की डायरी
- 173धारा 173. अन्वेषण पूरा होने पर पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट
- 174धारा 174. पुलिस का आत्महत्या आदि पर जांच करना और रिपोर्ट देना
- 175धारा 175. व्यक्तियों को समन करने की शक्ति
- 176धारा 176. मजिस्ट्रेट द्वारा मृत्यु के कारण की जांच
XIIIJurisdiction of the Criminal Courts in Inquiries and Trials§ 177–18913 धाराएँ
- 177धारा 177. जांच और विचारण का मामूली स्थान
- 178धारा 178. जांच या विचारण का स्थान
- 179धारा 179. वह अपराध जहां कार्य किया गया है या परिणाम निकला है वहां विचारणीय
- 180धारा 180. विचारण का स्थान, जहां कार्य किसी अन्य अपराध से संबंध के कारण अपराध है
- 181धारा 181. कुछ अपराधों के मामले में विचारण का स्थान
- 182धारा 182. पत्रों आदि द्वारा किए गए अपराध
- 183धारा 183. यात्रा या जलयात्रा में किया गया अपराध
- 184धारा 184. एक साथ विचारणीय अपराधों के लिए विचारण का स्थान
- 185धारा 185. भिन्न सेशन खंडों में मामलों का विचारण किए जाने का आदेश देने की शक्ति
- 186धारा 186. संदेह की दशा में उच्च न्यायालय द्वारा यह विनिश्चित किया जाना कि जांच या विचारण किस जिले में होगा
- 187धारा 187. स्थानीय अधिकारिता से परे किए गए अपराध के लिए समन या वारंट जारी करने की शक्ति
- 188धारा 188. भारत के बाहर किया गया अपराध
- 189धारा 189. भारत के बाहर किए गए अपराधों से संबंधित साक्ष्य की प्राप्ति
XIVConditions Requisite for Initiation of Proceedings§ 190–19913 धाराएँ
- 190धारा 190. मजिस्ट्रेटों द्वारा अपराधों का संज्ञान
- 191धारा 191. अभियुक्त के आवेदन पर अंतरण
- 192धारा 192. मजिस्ट्रेटों को मामलों का सौंपा जाना
- 193धारा 193. सत्र न्यायालयों द्वारा अपराधों का संज्ञान
- 194धारा 194. अपर और सहायक सत्र न्यायाधीशों द्वारा उन्हें सौंपे गए मामलों का विचारण
- 195लोक सेवकों के वैधानिक अधिकार की अवमानना, सार्वजनिक न्याय के विरुद्ध अपराध और साक्ष्य के रूप में दिए गए दस्तावेजों से संबंधित अपराधों के लिए अभियोजन।
- 195Aधारा 195A. धमकी आदि की दशा में साक्षियों के लिए प्रक्रिया
- 196धारा 196. राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसा अपराध करने के आपराधिक षड्यंत्र के लिए अभियोजन
- 197धारा 197. न्यायाधीशों और लोक सेवकों का अभियोजन
- 198धारा 198. विवाह के विरुद्ध अपराधों के लिए अभियोजन
- 198Aधारा 198A. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498क के अधीन अपराधों का अभियोजन
- 198Bधारा 198B. अपराध का संज्ञान
- 199धारा 199. मानहानि के लिए अभियोजन
XVICommencement of Proceedings Before Magistrates§ 204–2107 धाराएँ
- 204धारा 204. आदेशिका का जारी किया जाना
- 205धारा 205. मजिस्ट्रेट अभियुक्त की वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकेगा
- 206धारा 206. लघु अपराध के मामलों में विशेष समन
- 207अभियुक्त को पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की प्रति उपलब्ध कराएं।
- 208धारा 208. सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय अन्य मामलों में अभियुक्त को कथनों और दस्तावेजों की प्रतियां देना
- 209धारा 209. जब अपराध केवल सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय हो तब मामले का सत्र न्यायालय को सुपुर्द किया जाना
- 210धारा 210. जब उसी अपराध के संबंध में परिवाद-मामला और पुलिस अन्वेषण दोनों हों तब अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया
XVIIA.--Form of charges · B.--Joinder of charges§ 211–22414 धाराएँ
A.--Form of charges
- 211धारा 211. आरोप की अंतर्वस्तु
- 212धारा 212. समय, स्थान और व्यक्ति के बारे में विशिष्टियां
- 213धारा 213. अपराध किए जाने की रीति कब कथित की जानी चाहिए
- 214धारा 214. आरोप में शब्दों का वह अर्थ लिया जाना जो उस विधि में है जिसके अधीन अपराध दंडनीय है
- 215धारा 215. गलतियों का प्रभाव
- 216धारा 216. न्यायालय आरोप परिवर्तित कर सकेगा
- 217धारा 217. आरोप परिवर्तित किए जाने पर साक्षियों का पुनः बुलाया जाना
B.--Joinder of charges
- 218धारा 218. पृथक् अपराधों के लिए पृथक् आरोप
- 219धारा 219. वर्ष के भीतर किए गए एक ही किस्म के तीन अपराधों का आरोप एक साथ लगाया जा सकेगा
- 220धारा 220. एक से अधिक अपराधों के लिए विचारण
- 221धारा 221. जहां यह संदेहपूर्ण है कि कौन-सा अपराध किया गया है
- 222धारा 222. जब साबित हुआ अपराध आरोपित अपराध में सम्मिलित है
- 223धारा 223. कौन-से व्यक्ति संयुक्ततः आरोपित किए जा सकेंगे
- 224धारा 224. कई आरोपों में से एक पर दोषसिद्धि होने पर शेष आरोपों का प्रत्याहरण
XVIIITrial Before a Court of Session§ 225–23713 धाराएँ
- 225धारा 225. विचारण का लोक अभियोजक द्वारा संचालित किया जाना
- 226धारा 226. अभियोजन के मामले का प्रारंभिक कथन
- 227धारा 227. उन्मोचन
- 228धारा 228. आरोप की विरचना
- 229दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि।
- 230अभियोजन साक्ष्य प्रस्तुत करने की तिथि।
- 231अभियोजन के लिए साक्ष्य।
- 232बरी होना।
- 233रक्षात्मक मुद्रा में प्रवेश करना।
- 234धारा 234. तर्क
- 235धारा 235. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि का निर्णय
- 236धारा 236. पूर्व दोषसिद्धि
- 237धारा 237. धारा 199(2) के अधीन संस्थित मामलों में प्रक्रिया
XIXA.--Cases instituted on a police report · B.--Cases instituted otherwise than on police report · C.--Conclusion of trial§ 238–25013 धाराएँ
A.--Cases instituted on a police report
B.--Cases instituted otherwise than on police report
XXTrial of Summons--cases by Magistrates§ 251–2599 धाराएँ
- 251धारा 251. अभियोग का सार बताया जाना
- 252धारा 252. दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि
- 253धारा 253. क्षुद्र मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति में दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि
- 254धारा 254. दोषसिद्ध न किए जाने पर प्रक्रिया
- 255धारा 255. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
- 256धारा 256. परिवादी की अनुपस्थिति या मृत्यु
- 257शिकायत वापस लेना।
- 258धारा 258. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
- 259धारा 259. समन-मामलों को वारंट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति
XXISummary Trials§ 260–2656 धाराएँ
XXIAPlea Bargaining§ 265-I–265L12 धाराएँ
- 265-Iधारा 265I. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश में मुजरा किया जाना
- 265Aधारा 265A. अध्याय का लागू होना
- 265Bधारा 265B. अभिवाक् सौदेबाजी के लिए आवेदन
- 265Cधारा 265C. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत
- 265Dधारा 265D. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे की रिपोर्ट का न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना
- 265Eधारा 265E. मामले का निपटारा
- 265Fधारा 265F. न्यायालय का निर्णय
- 265Gधारा 265G. निर्णय की अंतिमता
- 265Hधारा 265H. अभिवाक् सौदेबाजी में न्यायालय की शक्ति
- 265Jधारा 265J. व्यावृत्ति
- 265Kधारा 265K. अभियुक्त के कथनों का उपयोग न किया जाना
- 265Lधारा 265L. अध्याय का लागू न होना
XXIIAttendance of Persons Confined or Detained in Prisons§ 266–2716 धाराएँ
- 266धारा 266. परिभाषाएं
- 267धारा 267. बंदियों की उपस्थिति अपेक्षित करने की शक्ति
- 268धारा 268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति
- 269धारा 269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना
- 270धारा 270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
- 271धारा 271. कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन निकालने की शक्ति
XXIIIA.--Mode of taking and recording evidence · B.--Commissions for the examination of witnesses§ 272–29929 धाराएँ
A.--Mode of taking and recording evidence
- 272धारा 272. न्यायालयों की भाषा
- 273धारा 273. साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना
- 274धारा 274. समन-मामलों और जांचों में अभिलेख
- 275धारा 275. वारंट-मामलों में अभिलेख
- 276धारा 276. सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण में अभिलेख
- 277धारा 277. साक्ष्य के अभिलेख की भाषा
- 278धारा 278. ऐसे साक्ष्य के पूरा हो जाने पर उसके संबंध में प्रक्रिया
- 279धारा 279. अभियुक्त या उसके प्लीडर के लिए साक्ष्य का विवर्तन
- 280धारा 280. साक्षी के हाव-भाव के संबंध में टिप्पणियां
- 281धारा 281. अभियुक्त की परीक्षा का अभिलेख
- 282धारा 282. दुभाषिए का सही-सही विवर्तन करने के लिए आबद्ध होना
- 283धारा 283. उच्च न्यायालय में अभिलेख
B.--Commissions for the examination of witnesses
- 284धारा 284. साक्षी की हाजिरी कब अभिमुक्त की जा सकेगी और कमीशन कब निकाला जा सकेगा
- 285धारा 285. कमीशन किसे जारी किया जाए
- 286धारा 286. कमीशनों का निष्पादन
- 287धारा 287. पक्षकार साक्षियों की परीक्षा कर सकेंगे
- 288धारा 288. कमीशन की वापसी
- 289धारा 289. कार्यवाही का स्थगन
- 290धारा 290. विदेशी कमीशनों का निष्पादन
- 291धारा 291. चिकित्सीय साक्षी का अभिसाक्ष्य
- 291Aधारा 291A. मजिस्ट्रेट की शिनाख्त रिपोर्ट
- 292टकसाल के अधिकारियों के साक्ष्य।
- 293धारा 293. कतिपय सरकारी वैज्ञानिक विशेषज्ञों की रिपोर्टें
- 294धारा 294. कुछ दस्तावेजों का औपचारिक रूप से साबित किया जाना आवश्यक नहीं
- 295धारा 295. लोक सेवकों के आचरण के सबूत में शपथपत्र
- 296धारा 296. औपचारिक प्रकृति के साक्ष्य का शपथपत्र पर दिया जाना
- 297धारा 297. वे प्राधिकारी जिनके समक्ष शपथपत्रों पर शपथ ली जा सकेगी
- 298धारा 298. पूर्व दोषसिद्धि या दोषमुक्ति किस प्रकार साबित की जाए
- 299धारा 299. अभियुक्त की अनुपस्थिति में साक्ष्य का अभिलेखन
XXIVGeneral Provisions as to Inquiries and Trials§ 300–32729 धाराएँ
- 300धारा 300. एक बार दोषसिद्ध या दोषमुक्त किए गए व्यक्ति का उसी अपराध के लिए विचारण न किया जाना
- 301धारा 301. लोक अभियोजकों द्वारा उपसंजाति
- 302अभियोजन चलाने की अनुमति।
- 303जिस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही शुरू की गई है, उसे बचाव का अधिकार है।
- 304धारा 304. कतिपय मामलों में राज्य के व्यय पर अभियुक्त को विधिक सहायता
- 305धारा 305. जब निगम या रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभियुक्त है तब प्रक्रिया
- 306धारा 306. सहअपराधी को क्षमादान
- 307धारा 307. क्षमादान का निदेश देने की शक्ति
- 308धारा 308. क्षमादान की शर्तों का पालन न करने वाले व्यक्ति का विचारण
- 309धारा 309. कार्यवाहियों को मुल्तवी या स्थगित करने की शक्ति
- 310धारा 310. स्थानीय निरीक्षण
- 311महत्वपूर्ण गवाह को बुलाने या उपस्थित व्यक्ति से पूछताछ करने का अधिकार।
- 311Aकिसी व्यक्ति को नमूना हस्ताक्षर या लिखावट देने का आदेश देने का मजिस्ट्रेट का अधिकार।
- 312धारा 312. परिवादियों और साक्षियों के व्यय
- 313धारा 313. अभियुक्त की परीक्षा करने की शक्ति
- 314धारा 314. मौखिक तर्क और तर्कों का ज्ञापन
- 315आरोपी व्यक्ति सक्षम गवाह होगा।
- 316जानकारी प्रकट करने के लिए किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं डाला जाएगा।
- 317कुछ मामलों में अभियुक्तों की अनुपस्थिति में भी पूछताछ और मुकदमा चलाने का प्रावधान।
- 318धारा 318. जहां अभियुक्त कार्यवाहियों को नहीं समझता वहां प्रक्रिया
- 319धारा 319. ऐसे अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही करने की शक्ति जो अपराध के दोषी प्रतीत होते हैं
- 320धारा 320. अपराधों का शमन
- 321धारा 321. अभियोजन का वापस लिया जाना
- 322धारा 322. उन मामलों में प्रक्रिया जिनका निपटारा मजिस्ट्रेट नहीं कर सकता
- 323धारा 323. जब जांच या विचारण प्रारंभ होने के पश्चात् मजिस्ट्रेट यह पाता है कि मामला सुपुर्द किया जाना चाहिए तब प्रक्रिया
- 324धारा 324. सिक्का, स्टाम्प-विधि या संपत्ति के विरुद्ध अपराधों के लिए पूर्व में दोषसिद्ध व्यक्तियों का विचारण
- 325धारा 325. जब मजिस्ट्रेट पर्याप्त कठोर दंडादेश नहीं दे सकता तब प्रक्रिया
- 326धारा 326. आंशिक रूप से एक मजिस्ट्रेट द्वारा और आंशिक रूप से दूसरे द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर दोषसिद्धि या सुपुर्दगी
- 327धारा 327. न्यायालय का खुला होना
XXVProvisions as to Accused Persons of Unsound Mind§ 328–33912 धाराएँ
- 328धारा 328. विकृतचित्त अभियुक्त की दशा में प्रक्रिया
- 329धारा 329. न्यायालय के समक्ष विचारित विकृतचित्त व्यक्ति के मामले में प्रक्रिया
- 330धारा 330. अन्वेषण या विचारण के लंबित रहने तक विकृतचित्त व्यक्ति का छोड़ा जाना
- 331धारा 331. जांच या विचारण का पुनः आरंभ
- 332धारा 332. मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष अभियुक्त के हाजिर होने पर प्रक्रिया
- 333धारा 333. जब अभियुक्त स्वस्थचित्त रहा प्रतीत होता है
- 334धारा 334. चित्त-विकृति के आधार पर दोषमुक्ति का निर्णय
- 335धारा 335. ऐसे आधार पर दोषमुक्त किए गए व्यक्ति का सुरक्षित अभिरक्षा में निरुद्ध किया जाना
- 336धारा 336. भारसाधक अधिकारी को कृत्यों का निर्वहन करने के लिए सशक्त करने की राज्य सरकार की शक्ति
- 337धारा 337. जहां विकृतचित्त बंदी को प्रतिरक्षा करने में समर्थ बताया जाता है वहां प्रक्रिया
- 338धारा 338. जहां निरुद्ध विकृतचित्त व्यक्ति को छोड़े जाने योग्य घोषित किया जाता है वहां प्रक्रिया
- 339धारा 339. पागल का नातेदार या मित्र की देखरेख में परिदान
XXVIProvisions as to Offences Affecting the Administration of Justice§ 340–35213 धाराएँ
- 340धारा 340. धारा 195 में वर्णित मामलों में प्रक्रिया
- 341धारा 341. अपील
- 342धारा 342. खर्चे के बारे में आदेश देने की शक्ति
- 343धारा 343. संज्ञान करने वाले मजिस्ट्रेट की प्रक्रिया
- 344धारा 344. मिथ्या साक्ष्य देने के विचारण के लिए संक्षिप्त प्रक्रिया
- 345धारा 345. अवमान के कुछ मामलों में प्रक्रिया
- 346धारा 346. जहां न्यायालय यह समझता है कि मामले में धारा 345 के अधीन कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए वहां प्रक्रिया
- 347धारा 347. रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार कब सिविल न्यायालय समझा जाएगा
- 348धारा 348. क्षमायाचना प्रस्तुत किए जाने पर अपराधी का उन्मोचन
- 349धारा 349. उत्तर देने या दस्तावेज पेश करने से इन्कार करने वाले व्यक्ति का कारावास या सुपुर्दगी
- 350धारा 350. समन के आज्ञापालन में साक्षी के उपस्थित न होने पर दंड के लिए संक्षिप्त प्रक्रिया
- 351धारा 351. धारा 344, 345, 349 और 350 के अधीन दोषसिद्धियों से अपील
- 352धारा 352. कतिपय न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों का अपने समक्ष किए गए कतिपय अपराधों का विचारण न करना
XXVIIThe Judgment§ 353–36516 धाराएँ
- 353धारा 353. निर्णय
- 354निर्णय की भाषा और विषयवस्तु।
- 355धारा 355. महानगर मजिस्ट्रेट का निर्णय
- 356धारा 356. पूर्व दोषसिद्ध अपराधी का पता अधिसूचित करने का आदेश
- 357मुआवजा देने का आदेश।
- 357Aधारा 357A. पीड़ित प्रतिकर स्कीम
- 357Bधारा 357B. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326क या धारा 376कख या धारा 376घ या धारा 376घक या धारा 376घख के अधीन जुर्माने के अतिरिक्त प्रतिकर
- 357Cपीड़ितों का उपचार।
- 358धारा 358. निराधार रूप से गिरफ्तार कराए गए व्यक्तियों को प्रतिकर
- 359धारा 359. असंज्ञेय मामलों में खर्चा देने का आदेश
- 360धारा 360. सदाचरण की परिवीक्षा पर या भर्त्सना के पश्चात् छोड़ने का आदेश
- 361धारा 361. कुछ मामलों में विशेष कारणों का अभिलिखित किया जाना
- 362धारा 362. न्यायालय द्वारा निर्णय में परिवर्तन न किया जाना
- 363धारा 363. निर्णय की प्रति अभियुक्त और अन्य व्यक्तियों को दिया जाना
- 364धारा 364. निर्णय का अनुवाद कब किया जाए
- 365धारा 365. सेशन न्यायालय द्वारा निष्कर्ष और दंडादेश की प्रति जिला मजिस्ट्रेट को भेजा जाना
XXVIIISubmission of Death Sentences for Confirmation§ 366–3716 धाराएँ
- 366मृत्युदंड की सजा को पुष्टि के लिए सत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
- 367धारा 367. आगे जांच किए जाने या अतिरिक्त साक्ष्य लिए जाने का निदेश देने की शक्ति
- 368धारा 368. उच्च न्यायालय की दंडादेश की पुष्टि करने या दोषसिद्धि को अभिशून्य करने की शक्ति
- 369धारा 369. पुष्टि या नए दंडादेश पर दो न्यायाधीशों द्वारा हस्ताक्षर किया जाना
- 370धारा 370. मतभेद की दशा में प्रक्रिया
- 371धारा 371. पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय को प्रस्तुत मामलों में प्रक्रिया
XXIXAppeals§ 372–39423 धाराएँ
- 372धारा 372. जब तक अन्यथा उपबंधित न हो, कोई अपील न होना
- 373धारा 373. परिशांति या सदाचार कायम रखने के लिए प्रतिभूति की अपेक्षा करने वाले, अथवा प्रतिभू को स्वीकार करने से इनकार करने या उसे नामंजूर करने वाले, आदेशों से अपील
- 374दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील।
- 375धारा 375. कुछ मामलों में अपील न होना जब अभियुक्त दोष स्वीकार कर लेता है
- 376धारा 376. क्षुद्र मामलों में अपील न होना
- 377धारा 377. दंडादेश के विरुद्ध राज्य सरकार द्वारा अपील
- 378धारा 378. दोषमुक्ति की दशा में अपील
- 379धारा 379. कुछ मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील
- 380धारा 380. कुछ मामलों में अपील का विशेष अधिकार
- 381धारा 381. सेशन न्यायालय में अपील किस प्रकार सुनी जाए
- 382धारा 382. अपील की अर्जी
- 383धारा 383. जब अपीलार्थी कारागार में हो तब प्रक्रिया
- 384धारा 384. अपील का संक्षेपतः खारिज किया जाना
- 385धारा 385. उन अपीलों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया जो संक्षेपतः खारिज नहीं की जातीं
- 386धारा 386. अपील न्यायालय की शक्तियां
- 387धारा 387. अधीनस्थ अपील न्यायालय के निर्णय
- 388धारा 388. अपील पर उच्च न्यायालय के आदेश का अवर न्यायालय को प्रमाणित किया जाना
- 389धारा 389. अपील लंबित रहने तक दंडादेश का निलंबन; अपीलार्थी का जमानत पर छोड़ा जाना
- 390धारा 390. दोषमुक्ति से अपील में अभियुक्त की गिरफ्तारी
- 391धारा 391. अपील न्यायालय द्वारा अतिरिक्त साक्ष्य लिया जाना या उसके लिए जाने का निदेश देना
- 392धारा 392. वह प्रक्रिया जहां अपील न्यायालय के न्यायाधीश समान रूप से विभाजित हैं
- 393धारा 393. अपील पर निर्णयों और आदेशों की अंतिमता
- 394धारा 394. अपीलों का उपशमन
XXXReference and Revision§ 395–40511 धाराएँ
- 395धारा 395. उच्च न्यायालय को निर्देश
- 396धारा 396. उच्च न्यायालय के विनिश्चय के अनुसार मामले का निपटारा
- 397पुनरीक्षण की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अभिलेखों की मांग करना।
- 398धारा 398. जांच का आदेश देने की शक्ति
- 399धारा 399. सेशन न्यायाधीश की पुनरीक्षण शक्तियां
- 400धारा 400. अपर सत्र न्यायाधीश की शक्ति
- 401उच्च न्यायालय की पुनरीक्षण शक्तियां।
- 402धारा 402. पुनरीक्षण मामलों को वापस लेने या अंतरित करने की उच्च न्यायालय की शक्ति
- 403धारा 403. पक्षकारों को सुनने का न्यायालय का विकल्प
- 404धारा 404. महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा अपने विनिश्चय के आधारों का ऐसा कथन जिस पर उच्च न्यायालय द्वारा विचार किया जाएगा
- 405धारा 405. उच्च न्यायालय के आदेश का अवर न्यायालय को प्रमाणित किया जाना
XXXITransfer of Criminal Cases§ 406–4127 धाराएँ
- 406धारा 406. मामलों और अपीलों को अंतरित करने की उच्चतम न्यायालय की शक्ति
- 407धारा 407. उच्च न्यायालय की मामलों और अपीलों को अंतरित करने की शक्ति
- 408धारा 408. मामलों और अपीलों को अंतरित करने की सत्र न्यायाधीश की शक्ति
- 409धारा 409. सेशन न्यायाधीशों द्वारा मामलों और अपीलों का वापस लिया जाना
- 410धारा 410. न्यायिक मजिस्ट्रेटों द्वारा मामलों का वापस लिया जाना
- 411धारा 411. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों द्वारा मामलों का सौंपा जाना या वापस लिया जाना
- 412धारा 412. कारणों का अभिलिखित किया जाना
XXXIIA.--Death Sentences · B.--Imprisonment · C.--Levy of fine · D.--General provisions regarding execution · E.--Suspension, remission and commutation of sentences§ 413–43524 धाराएँ
A.--Death Sentences
B.--Imprisonment
C.--Levy of fine
D.--General provisions regarding execution
- 425धारा 425. वारंट कौन जारी कर सकेगा
- 426धारा 426. निकल भागे सिद्धदोष व्यक्ति के बारे में दंडादेश कब प्रभावी होगा
- 427धारा 427. उस अपराधी के बारे में दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से ही दंडादिष्ट है
- 428धारा 428. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना
- 429धारा 429. व्यावृत्ति
- 430धारा 430. दंडादेश के निष्पादन पर वारंट का लौटाया जाना
- 431धारा 431. संदाय के लिए आदिष्ट धन का जुर्माने के रूप में वसूलीय होना
E.--Suspension, remission and commutation of sentences
- 432धारा 432. दंडादेशों को निलंबित करने या उनका परिहार करने की शक्ति
- 433धारा 433. दंडादेश के लघुकरण की शक्ति
- 433Aधारा 433A. कतिपय मामलों में परिहार या लघुकरण की शक्तियों पर निर्बंधन
- 434धारा 434. मृत्यु दंडादेशों की दशा में केंद्रीय सरकार की समवर्ती शक्ति
- 435धारा 435. कुछ मामलों में राज्य सरकार का केंद्रीय सरकार से परामर्श के पश्चात् कार्य करना
XXXIIIProvisions as to Bail and Bonds§ 436–45019 धाराएँ
- 436धारा 436. किन मामलों में जमानत ली जाएगी
- 436Aधारा 436A. वह अधिकतम अवधि जिसके लिए विचाराधीन बंदी निरुद्ध रखा जा सकेगा
- 437धारा 437. अजमानतीय अपराध की दशा में कब जमानत ली जा सकेगी
- 437Aधारा 437A. जमानत द्वारा अभियुक्त से अगले अपील न्यायालय के समक्ष हाजिर होने की अपेक्षा करना
- 438धारा 438. गिरफ्तारी की आशंका करने वाले व्यक्ति को जमानत मंजूर करने के लिए निदेश
- 439धारा 439. जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां
- 440धारा 440. बंधपत्र की रकम और उसमें कमी
- 441धारा 441. अभियुक्त और प्रतिभुओं का बंधपत्र
- 441Aधारा 441A. प्रतिभुओं द्वारा घोषणा
- 442धारा 442. अभिरक्षा से उन्मोचन
- 443धारा 443. जब पहले ली गई जमानत अपर्याप्त हो तब पर्याप्त जमानत का आदेश देने की शक्ति
- 444धारा 444. प्रतिभुओं का उन्मोचन
- 445धारा 445. बंधपत्र के बजाय निक्षेप
- 446धारा 446. बंधपत्र समपहृत हो जाने पर प्रक्रिया
- 446Aधारा 446A. बंधपत्र और जमानत-बंधपत्र का रद्दकरण
- 447धारा 447. प्रतिभू के दिवालिया होने या मरने की दशा में अथवा जब बंधपत्र समपहृत हो जाता है तब प्रक्रिया
- 448धारा 448. अवयस्क से अपेक्षित बंधपत्र
- 449धारा 449. धारा 446 के अधीन आदेशों से अपील
- 450धारा 450. कुछ बंधपत्रों पर शोध्य रकम उद्गृहीत करने का निदेश देने की शक्ति
XXXIVDisposal of Property§ 451–4599 धाराएँ
- 451धारा 451. कुछ मामलों में विचारण के लंबित रहने तक संपत्ति की अभिरक्षा और उसके व्ययन के लिए आदेश
- 452धारा 452. विचारण की समाप्ति पर संपत्ति के व्ययन के लिए आदेश
- 453धारा 453. अभियुक्त पर पाए गए धन में से निर्दोष क्रेता को संदाय
- 454धारा 454. धारा 452 या धारा 453 के अधीन आदेशों के विरुद्ध अपील
- 455धारा 455. मानहानिकारक और अन्य सामग्री का नष्ट किया जाना
- 456धारा 456. स्थावर संपत्ति का कब्जा प्रत्यावर्तित करने की शक्ति
- 457धारा 457. संपत्ति के अभिग्रहण पर पुलिस द्वारा प्रक्रिया
- 458धारा 458. छह मास के भीतर कोई दावेदार हाजिर न होने पर प्रक्रिया
- 459धारा 459. नाशवान संपत्ति बेचने की शक्ति
XXXVIrregular Proceedings§ 460–4667 धाराएँ
- 460धारा 460. वे अनियमितताएं जो कार्यवाहियों को दूषित नहीं करतीं
- 461धारा 461. वे अनियमितताएं जो कार्यवाहियों को दूषित करती हैं
- 462धारा 462. गलत स्थान में कार्यवाहियां
- 463धारा 463. धारा 164 या धारा 281 के उपबंधों का अनुपालन न होना
- 464धारा 464. आरोप की विरचना का लोप, या आरोप के अभाव, या आरोप में त्रुटि का प्रभाव
- 465धारा 465. निष्कर्ष या दंडादेश किस दशा में त्रुटि, लोप या अनियमितता के कारण उलटा जा सकेगा
- 466धारा 466. दोष या त्रुटि से कुर्की का विधिविरुद्ध न होना
XXXVILimitation for Taking Cognizance of Certain Offences§ 467–4737 धाराएँ
XXXVIIMiscellaneous§ 474–48411 धाराएँ
- 474धारा 474. उच्च न्यायालय के समक्ष विचारण
- 475धारा 475. सेना न्यायालय द्वारा विचारणीय व्यक्तियों का कमान अधिकारियों को परिदान
- 476धारा 476. प्ररूप
- 477धारा 477. उच्च न्यायालय की नियम बनाने की शक्ति
- 478धारा 478. कतिपय मामलों में कार्यपालक मजिस्ट्रेटों को आवंटित कृत्यों को परिवर्तित करने की शक्ति
- 479धारा 479. वे मामले जिनमें न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट वैयक्तिक रूप से हितबद्ध है
- 480धारा 480. व्यवसायरत प्लीडर का कतिपय न्यायालयों में मजिस्ट्रेट के रूप में न बैठना
- 481धारा 481. विक्रय से संबद्ध लोक सेवक का संपत्ति क्रय या उसके लिए बोली न लगाना
- 482धारा 482. उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्ति की व्यावृत्ति
- 483धारा 483. न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों पर सतत अधीक्षण रखने का उच्च न्यायालय का कर्तव्य
- 484निरसन और बचत।
इसकी जगह BNSS
1 जुलाई 2024 से BNSS ने CrPC की जगह ली।
- CrPC 41ABNSS 35(3), 35(4) 35(5), 35(6)
- CrPC 125BNSS 144
- CrPC 144BNSS 163
- CrPC 156(3)BNSS 175(3)
