धारा 106 · धारा 106. दोषसिद्धि पर परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति
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106. दोषसिद्धि पर परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति
(1) जब कोई सेशन न्यायालय या प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट का न्यायालय किसी व्यक्ति को उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट अपराधों में से किसी के लिए या ऐसे किसी अपराध के दुष्प्रेरण के लिए दोषसिद्ध करता है और उसकी यह राय है कि परिशांति कायम रखने के लिए ऐसे व्यक्ति से प्रतिभूति लेना आवश्यक है, तब न्यायालय, ऐसे व्यक्ति पर दंडादेश पारित करते समय, उसे यह आदेश दे सकेगा कि वह तीन वर्ष से अनधिक ऐसी अवधि के लिए, जो वह ठीक समझे, परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभुओं सहित या रहित बंधपत्र निष्पादित करे।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपराध ये हैं—
(क) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 8 के अधीन दंडनीय कोई अपराध, जो उसकी धारा 153क या धारा 153ख या धारा 154 के अधीन दंडनीय अपराध से भिन्न है;
(ख) कोई ऐसा अपराध, जिसमें हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना या रिष्टि करना है या सम्मिलित है;
(ग) आपराधिक अभित्रास का कोई अपराध;
(घ) कोई अन्य अपराध, जिससे परिशांति भंग हुई, या जिससे परिशांति भंग होना आशयित था, या जिससे परिशांति भंग होना संभाव्य जाना गया था।
(3) यदि दोषसिद्धि अपील में या अन्यथा अपास्त कर दी जाती है, तो इस प्रकार निष्पादित बंधपत्र शून्य हो जाएगा।
(4) इस धारा के अधीन आदेश अपील न्यायालय द्वारा भी, या पुनरीक्षण की अपनी शक्तियों का प्रयोग करते समय न्यायालय द्वारा भी, किया जा सकेगा।
(1) जब कोई सेशन न्यायालय या प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट का न्यायालय किसी व्यक्ति को उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट अपराधों में से किसी के लिए या ऐसे किसी अपराध के दुष्प्रेरण के लिए दोषसिद्ध करता है और उसकी यह राय है कि परिशांति कायम रखने के लिए ऐसे व्यक्ति से प्रतिभूति लेना आवश्यक है, तब न्यायालय, ऐसे व्यक्ति पर दंडादेश पारित करते समय, उसे यह आदेश दे सकेगा कि वह तीन वर्ष से अनधिक ऐसी अवधि के लिए, जो वह ठीक समझे, परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभुओं सहित या रहित बंधपत्र निष्पादित करे।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपराध ये हैं—
(क) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 8 के अधीन दंडनीय कोई अपराध, जो उसकी धारा 153क या धारा 153ख या धारा 154 के अधीन दंडनीय अपराध से भिन्न है;
(ख) कोई ऐसा अपराध, जिसमें हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना या रिष्टि करना है या सम्मिलित है;
(ग) आपराधिक अभित्रास का कोई अपराध;
(घ) कोई अन्य अपराध, जिससे परिशांति भंग हुई, या जिससे परिशांति भंग होना आशयित था, या जिससे परिशांति भंग होना संभाव्य जाना गया था।
(3) यदि दोषसिद्धि अपील में या अन्यथा अपास्त कर दी जाती है, तो इस प्रकार निष्पादित बंधपत्र शून्य हो जाएगा।
(4) इस धारा के अधीन आदेश अपील न्यायालय द्वारा भी, या पुनरीक्षण की अपनी शक्तियों का प्रयोग करते समय न्यायालय द्वारा भी, किया जा सकेगा।
नए कानून में
CrPC 106BNSS 125
125. Security for keeping peace on conviction.
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संबंधित कानूनी धाराएँ
- संबंधितभा.दं.सं. §153Aधारा 153A - धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना
- संबंधितभा.दं.सं. §153Bधारा 153B - राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, प्राख्यान
- संबंधितभा.दं.सं. §154धारा 154 - उस भूमि का स्वामी या अधिभोगी, जिस पर विधिविरुद्ध जमाव किया जाता है
