धारा 470 · धारा 470. कतिपय दशाओं में समय का अपवर्जन
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470. कतिपय दशाओं में समय का अपवर्जन
(1) परिसीमा-काल की संगणना करने में, वह समय अपवर्जित किया जाएगा जिसके दौरान कोई व्यक्ति अपराधी के विरुद्ध अन्य अभियोजन का, चाहे प्रथम बार के न्यायालय में या अपील या पुनरीक्षण न्यायालय में, सम्यक् तत्परता से संचालन करता रहा है:
परन्तु ऐसा कोई अपवर्जन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि वह अभियोजन उन्हीं तथ्यों से संबंधित न हो और सद्भावपूर्वक ऐसे न्यायालय में न चलाया गया हो जो अधिकारिता के अभाव या उसी प्रकार के अन्य कारण से उसे ग्रहण करने में असमर्थ है।
(2) जहां किसी अपराध के बारे में अभियोजन का संस्थित किया जाना किसी व्यादेश या आदेश द्वारा रोक दिया गया है, वहां परिसीमा-काल की संगणना करने में, ऐसे व्यादेश या आदेश के चालू रहने की अवधि, वह दिन जिसको वह जारी किया गया या किया गया था, और वह दिन जिसको वह वापस लिया गया, अपवर्जित किए जाएंगे।
(3) जहां किसी अपराध के लिए अभियोजन की सूचना दी गई है, अथवा जहां तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन संस्थित करने के लिए सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की पूर्व सम्मति या मंजूरी अपेक्षित है, वहां परिसीमा-काल की संगणना करने में ऐसी सूचना की अवधि, अथवा यथास्थिति, ऐसी सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय, अपवर्जित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण—सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय की संगणना करने में, वह तारीख, जिसको सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए आवेदन किया गया था, और सरकार या अन्य प्राधिकारी के आदेश की प्राप्ति की तारीख, दोनों अपवर्जित की जाएंगी।
(4) परिसीमा-काल की संगणना करने में, वह समय अपवर्जित किया जाएगा जिसके दौरान अपराधी—
(क) भारत से, अथवा भारत के बाहर के ऐसे किसी राज्यक्षेत्र से, जो केंद्रीय सरकार के प्रशासन के अधीन है, अनुपस्थित रहा है, या
(ख) फरार होकर या अपने को छिपाकर गिरफ्तारी से बचता रहा है।
(1) परिसीमा-काल की संगणना करने में, वह समय अपवर्जित किया जाएगा जिसके दौरान कोई व्यक्ति अपराधी के विरुद्ध अन्य अभियोजन का, चाहे प्रथम बार के न्यायालय में या अपील या पुनरीक्षण न्यायालय में, सम्यक् तत्परता से संचालन करता रहा है:
परन्तु ऐसा कोई अपवर्जन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि वह अभियोजन उन्हीं तथ्यों से संबंधित न हो और सद्भावपूर्वक ऐसे न्यायालय में न चलाया गया हो जो अधिकारिता के अभाव या उसी प्रकार के अन्य कारण से उसे ग्रहण करने में असमर्थ है।
(2) जहां किसी अपराध के बारे में अभियोजन का संस्थित किया जाना किसी व्यादेश या आदेश द्वारा रोक दिया गया है, वहां परिसीमा-काल की संगणना करने में, ऐसे व्यादेश या आदेश के चालू रहने की अवधि, वह दिन जिसको वह जारी किया गया या किया गया था, और वह दिन जिसको वह वापस लिया गया, अपवर्जित किए जाएंगे।
(3) जहां किसी अपराध के लिए अभियोजन की सूचना दी गई है, अथवा जहां तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन संस्थित करने के लिए सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की पूर्व सम्मति या मंजूरी अपेक्षित है, वहां परिसीमा-काल की संगणना करने में ऐसी सूचना की अवधि, अथवा यथास्थिति, ऐसी सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय, अपवर्जित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण—सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय की संगणना करने में, वह तारीख, जिसको सम्मति या मंजूरी अभिप्राप्त करने के लिए आवेदन किया गया था, और सरकार या अन्य प्राधिकारी के आदेश की प्राप्ति की तारीख, दोनों अपवर्जित की जाएंगी।
(4) परिसीमा-काल की संगणना करने में, वह समय अपवर्जित किया जाएगा जिसके दौरान अपराधी—
(क) भारत से, अथवा भारत के बाहर के ऐसे किसी राज्यक्षेत्र से, जो केंद्रीय सरकार के प्रशासन के अधीन है, अनुपस्थित रहा है, या
(ख) फरार होकर या अपने को छिपाकर गिरफ्तारी से बचता रहा है।
नए कानून में
CrPC 470BNSS 516
516. Exclusion of time in certain cases.
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