धारा 170 · धारा 170. साक्ष्य पर्याप्त होने पर मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाना
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170. साक्ष्य पर्याप्त होने पर मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाना
(1) यदि इस अध्याय के अधीन अन्वेषण पर पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि यथापूर्वोक्त पर्याप्त साक्ष्य या युक्तियुक्त आधार है, तो ऐसा अधिकारी अभियुक्त को ऐसे मजिस्ट्रेट के पास, जो पुलिस रिपोर्ट पर अपराध का संज्ञान करने के लिए और अभियुक्त का विचारण करने या उसे विचारण के लिए सुपुर्द करने के लिए सशक्त है, अभिरक्षा के अधीन भेजेगा, अथवा यदि अपराध जमानतीय है और अभियुक्त प्रतिभूति देने में समर्थ है, तो उससे इस बात के लिए प्रतिभूति लेगा कि वह नियत दिन को ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होगा और जब तक अन्यथा निदेश न दिया जाए तब तक ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष दिन-प्रतिदिन उपस्थित रहेगा।
(2) जब पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी किसी अभियुक्त व्यक्ति को इस धारा के अधीन मजिस्ट्रेट के पास भेजता है या ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी हाजिरी के लिए प्रतिभूति लेता है, तब वह ऐसे मजिस्ट्रेट के पास कोई ऐसा आयुध या अन्य वस्तु भेजेगा जिसका उसके समक्ष पेश किया जाना आवश्यक हो, और वह परिवादी से (यदि कोई हो) तथा उतने व्यक्तियों से, जितने उस अधिकारी को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित प्रतीत हों और जितने वह आवश्यक समझे, यह अपेक्षा करेगा कि वे मजिस्ट्रेट के समक्ष तद्द्वारा निदिष्ट रूप में हाजिर होने के लिए और अभियुक्त के विरुद्ध आरोप के मामले में, यथास्थिति, अभियोजन चलाने या साक्ष्य देने के लिए बंधपत्र निष्पादित करें।
(3) यदि बंधपत्र में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय का उल्लेख है, तो ऐसे न्यायालय के अंतर्गत कोई ऐसा न्यायालय भी समझा जाएगा जिसे ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या विचारण के लिए मामला निर्देशित करे, परन्तु यह तब जब ऐसे निर्देशन की युक्तियुक्त सूचना ऐसे परिवादी या व्यक्तियों को दे दी जाए।
(4) वह अधिकारी, जिसकी उपस्थिति में बंधपत्र निष्पादित किया जाता है, उसकी एक प्रति उसे निष्पादित करने वाले व्यक्तियों में से एक को परिदत्त करेगा और तब मूल को अपनी रिपोर्ट सहित मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा।
(1) यदि इस अध्याय के अधीन अन्वेषण पर पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि यथापूर्वोक्त पर्याप्त साक्ष्य या युक्तियुक्त आधार है, तो ऐसा अधिकारी अभियुक्त को ऐसे मजिस्ट्रेट के पास, जो पुलिस रिपोर्ट पर अपराध का संज्ञान करने के लिए और अभियुक्त का विचारण करने या उसे विचारण के लिए सुपुर्द करने के लिए सशक्त है, अभिरक्षा के अधीन भेजेगा, अथवा यदि अपराध जमानतीय है और अभियुक्त प्रतिभूति देने में समर्थ है, तो उससे इस बात के लिए प्रतिभूति लेगा कि वह नियत दिन को ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होगा और जब तक अन्यथा निदेश न दिया जाए तब तक ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष दिन-प्रतिदिन उपस्थित रहेगा।
(2) जब पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी किसी अभियुक्त व्यक्ति को इस धारा के अधीन मजिस्ट्रेट के पास भेजता है या ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष उसकी हाजिरी के लिए प्रतिभूति लेता है, तब वह ऐसे मजिस्ट्रेट के पास कोई ऐसा आयुध या अन्य वस्तु भेजेगा जिसका उसके समक्ष पेश किया जाना आवश्यक हो, और वह परिवादी से (यदि कोई हो) तथा उतने व्यक्तियों से, जितने उस अधिकारी को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित प्रतीत हों और जितने वह आवश्यक समझे, यह अपेक्षा करेगा कि वे मजिस्ट्रेट के समक्ष तद्द्वारा निदिष्ट रूप में हाजिर होने के लिए और अभियुक्त के विरुद्ध आरोप के मामले में, यथास्थिति, अभियोजन चलाने या साक्ष्य देने के लिए बंधपत्र निष्पादित करें।
(3) यदि बंधपत्र में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय का उल्लेख है, तो ऐसे न्यायालय के अंतर्गत कोई ऐसा न्यायालय भी समझा जाएगा जिसे ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या विचारण के लिए मामला निर्देशित करे, परन्तु यह तब जब ऐसे निर्देशन की युक्तियुक्त सूचना ऐसे परिवादी या व्यक्तियों को दे दी जाए।
(4) वह अधिकारी, जिसकी उपस्थिति में बंधपत्र निष्पादित किया जाता है, उसकी एक प्रति उसे निष्पादित करने वाले व्यक्तियों में से एक को परिदत्त करेगा और तब मूल को अपनी रिपोर्ट सहित मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा।
नए कानून में
CrPC 170BNSS 190
190. Cases to be sent to Magistrate, when evidence is sufficient.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
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