धारा 240 · धारा 240. आरोप की विरचना
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240. आरोप की विरचना
(1) यदि ऐसे विचार, परीक्षा, यदि कोई हो, और सुनवाई पर मजिस्ट्रेट की यह राय है कि यह उपधारणा करने का आधार है कि अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है, जो इस अध्याय के अधीन विचारणीय है और जिसका विचारण करने के लिए ऐसा मजिस्ट्रेट सक्षम है तथा जो उसकी राय में उसके द्वारा पर्याप्त रूप से दंडित किया जा सकता है, तो वह अभियुक्त के विरुद्ध लिखित रूप में आरोप विरचित करेगा।
(2) तब वह आरोप अभियुक्त को पढ़कर सुनाया और समझाया जाएगा, और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह आरोपित अपराध का दोषी होने का अभिवाक् करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है।
(1) यदि ऐसे विचार, परीक्षा, यदि कोई हो, और सुनवाई पर मजिस्ट्रेट की यह राय है कि यह उपधारणा करने का आधार है कि अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है, जो इस अध्याय के अधीन विचारणीय है और जिसका विचारण करने के लिए ऐसा मजिस्ट्रेट सक्षम है तथा जो उसकी राय में उसके द्वारा पर्याप्त रूप से दंडित किया जा सकता है, तो वह अभियुक्त के विरुद्ध लिखित रूप में आरोप विरचित करेगा।
(2) तब वह आरोप अभियुक्त को पढ़कर सुनाया और समझाया जाएगा, और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह आरोपित अपराध का दोषी होने का अभिवाक् करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है।
नए कानून में
CrPC 240BNSS 263
263. Framing of charge.
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