CrPC 105Bअध्याय VIIA · Reciprocal Arrangements for Assistance in Certain Matters and Procedure for Attachment and Forfeiture of Propertyअब BNSS 114
धारा 105B · धारा 105B. व्यक्तियों का अंतरण सुनिश्चित कराने में सहायता
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
105B. व्यक्तियों का अंतरण सुनिश्चित कराने में सहायता
(1) जहां भारत में कोई न्यायालय, किसी दांडिक मामले के संबंध में, यह चाहता है कि उसके द्वारा जारी किया गया किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का ऐसा वारंट, जिसमें उससे हाजिर होने या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने की अपेक्षा की गई है, किसी संविदाकारी राज्य में किसी स्थान पर निष्पादित किया जाए, वहां वह ऐसे वारंट को दो प्रतियों में ऐसे प्ररूप में, ऐसे न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को, ऐसे प्राधिकारी के माध्यम से भेजेगा, जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, और वह न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, यथास्थिति, उसे निष्पादित कराएगा।
(2) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी, यदि किसी अपराध के अन्वेषण या उसमें की किसी जांच के दौरान अन्वेषण अधिकारी द्वारा, या अन्वेषण अधिकारी से वरिष्ठ पंक्ति के किसी अधिकारी द्वारा, यह आवेदन किया जाता है कि किसी संविदाकारी राज्य में किसी स्थान में के किसी व्यक्ति की उपस्थिति ऐसे अन्वेषण या जांच के संबंध में अपेक्षित है, और न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी उपस्थिति इस प्रकार अपेक्षित है, तो वह उक्त व्यक्ति के विरुद्ध समन या वारंट, दो प्रतियों में, ऐसे न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को, ऐसे प्ररूप में जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, उसे तामील या निष्पादित कराने के लिए जारी करेगा।
(3) जहां भारत में किसी न्यायालय को, किसी दांडिक मामले के संबंध में, किसी संविदाकारी राज्य के न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का ऐसा वारंट प्राप्त हुआ है जिसमें उससे उस न्यायालय में या किसी अन्य अन्वेषण अभिकरण के समक्ष हाजिर होने, या हाजिर होकर कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने, की अपेक्षा की गई है, वहां वह ऐसे निष्पादित किया जाएगा मानो वह ऐसा वारंट हो जो उसे अपनी स्थानीय सीमाओं के भीतर निष्पादन के लिए भारत के किसी अन्य न्यायालय से प्राप्त हुआ हो।
(4) जहां उपधारा (3) के अनुसरण में किसी संविदाकारी राज्य को अंतरित किया गया व्यक्ति भारत में बंदी है, वहां भारत का न्यायालय या केंद्रीय सरकार ऐसी शर्तें अधिरोपित कर सकेगी जो वह न्यायालय या सरकार ठीक समझे।
(5) जहां उपधारा (1) या उपधारा (2) के अनुसरण में भारत को अंतरित किया गया व्यक्ति किसी संविदाकारी राज्य में बंदी है, वहां भारत का न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए वह बंदी भारत को अंतरित किया गया है, अनुपालित की जाती हैं, और ऐसा बंदी ऐसी अभिरक्षा में तथा ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए रखा जाएगा, जिनका केंद्रीय सरकार लिखित रूप में निदेश दे।
(1) जहां भारत में कोई न्यायालय, किसी दांडिक मामले के संबंध में, यह चाहता है कि उसके द्वारा जारी किया गया किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का ऐसा वारंट, जिसमें उससे हाजिर होने या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने की अपेक्षा की गई है, किसी संविदाकारी राज्य में किसी स्थान पर निष्पादित किया जाए, वहां वह ऐसे वारंट को दो प्रतियों में ऐसे प्ररूप में, ऐसे न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को, ऐसे प्राधिकारी के माध्यम से भेजेगा, जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, और वह न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, यथास्थिति, उसे निष्पादित कराएगा।
(2) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी, यदि किसी अपराध के अन्वेषण या उसमें की किसी जांच के दौरान अन्वेषण अधिकारी द्वारा, या अन्वेषण अधिकारी से वरिष्ठ पंक्ति के किसी अधिकारी द्वारा, यह आवेदन किया जाता है कि किसी संविदाकारी राज्य में किसी स्थान में के किसी व्यक्ति की उपस्थिति ऐसे अन्वेषण या जांच के संबंध में अपेक्षित है, और न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी उपस्थिति इस प्रकार अपेक्षित है, तो वह उक्त व्यक्ति के विरुद्ध समन या वारंट, दो प्रतियों में, ऐसे न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को, ऐसे प्ररूप में जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, उसे तामील या निष्पादित कराने के लिए जारी करेगा।
(3) जहां भारत में किसी न्यायालय को, किसी दांडिक मामले के संबंध में, किसी संविदाकारी राज्य के न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का ऐसा वारंट प्राप्त हुआ है जिसमें उससे उस न्यायालय में या किसी अन्य अन्वेषण अभिकरण के समक्ष हाजिर होने, या हाजिर होकर कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने, की अपेक्षा की गई है, वहां वह ऐसे निष्पादित किया जाएगा मानो वह ऐसा वारंट हो जो उसे अपनी स्थानीय सीमाओं के भीतर निष्पादन के लिए भारत के किसी अन्य न्यायालय से प्राप्त हुआ हो।
(4) जहां उपधारा (3) के अनुसरण में किसी संविदाकारी राज्य को अंतरित किया गया व्यक्ति भारत में बंदी है, वहां भारत का न्यायालय या केंद्रीय सरकार ऐसी शर्तें अधिरोपित कर सकेगी जो वह न्यायालय या सरकार ठीक समझे।
(5) जहां उपधारा (1) या उपधारा (2) के अनुसरण में भारत को अंतरित किया गया व्यक्ति किसी संविदाकारी राज्य में बंदी है, वहां भारत का न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए वह बंदी भारत को अंतरित किया गया है, अनुपालित की जाती हैं, और ऐसा बंदी ऐसी अभिरक्षा में तथा ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए रखा जाएगा, जिनका केंद्रीय सरकार लिखित रूप में निदेश दे।
नए कानून में
CrPC 105BBNSS 114
114. Assistance in securing transfer of persons.
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