धारा 123 · धारा 123. प्रतिभूति देने में असफल रहने के कारण कारावासित व्यक्तियों को छोड़ने की शक्ति
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123. प्रतिभूति देने में असफल रहने के कारण कारावासित व्यक्तियों को छोड़ने की शक्ति
(1) जब कभी जिला मजिस्ट्रेट की, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की, यह राय है कि इस अध्याय के अधीन प्रतिभूति देने में असफल रहने के कारण कारावासित कोई व्यक्ति समुदाय को या किसी अन्य व्यक्ति को संकट में डाले बिना छोड़ा जा सकता है, तब वह ऐसे व्यक्ति को उन्मोचित करने का आदेश दे सकेगा।
(2) जब कभी कोई व्यक्ति इस अध्याय के अधीन प्रतिभूति देने में असफल रहने के कारण कारावासित किया गया है, तब उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय, या जहां आदेश किसी अन्य न्यायालय द्वारा किया गया था वहां जिला मजिस्ट्रेट, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रतिभूति की रकम या प्रतिभुओं की संख्या या वह समय, जिसके लिए प्रतिभूति की अपेक्षा की गई है, कम करने वाला आदेश कर सकेगा।
(3) उपधारा (1) के अधीन आदेश ऐसे व्यक्ति के उन्मोचन का निदेश या तो बिना शर्त दे सकेगा या किन्हीं ऐसी शर्तों पर दे सकेगा, जिन्हें ऐसा व्यक्ति स्वीकार करता है:
परन्तु अधिरोपित की गई कोई शर्त तब प्रवर्तनीय नहीं रहेगी, जब वह अवधि समाप्त हो जाएगी जिसके लिए ऐसे व्यक्ति को प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया था।
(4) राज्य सरकार वे शर्तें विहित कर सकेगी, जिन पर सशर्त उन्मोचन किया जा सकेगा।
(5) यदि कोई शर्त, जिस पर किसी व्यक्ति को उन्मोचित किया गया है, जिला मजिस्ट्रेट की, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की, जिसके द्वारा उन्मोचन का आदेश किया गया था, या उसके उत्तरवर्ती की, राय में पूरी नहीं की गई है, तो वह उसे रद्द कर सकेगा।
(6) जब उन्मोचन का सशर्त आदेश उपधारा (5) के अधीन रद्द कर दिया गया है, तब ऐसा व्यक्ति किसी पुलिस अधिकारी द्वारा वारंट के बिना गिरफ्तार किया जा सकेगा, और तब वह जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष, पेश किया जाएगा।
(7) जब तक ऐसा व्यक्ति मूल आदेश के निबंधनों के अनुसार उस अवधि के अनवसित भाग के लिए प्रतिभूति न दे दे, जिसके लिए वह प्रथमतः सुपुर्द किया गया था या निरुद्ध रखे जाने का आदेश दिया गया था (ऐसा भाग उस तारीख के, जिसको उन्मोचन की शर्तों का भंग हुआ, और उस तारीख के, जिसको ऐसे सशर्त उन्मोचन के सिवाय वह छोड़े जाने का हकदार होता, बीच की अवधि के बराबर की अवधि समझा जाएगा), तब तक जिला मजिस्ट्रेट, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ऐसे व्यक्ति को ऐसा अनवसित भाग भोगने के लिए कारागार को प्रतिप्रेषित कर सकेगा।
(8) उपधारा (7) के अधीन कारागार को प्रतिप्रेषित किया गया व्यक्ति, धारा 122 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस न्यायालय या मजिस्ट्रेट को, जिसने ऐसा आदेश किया था, या उसके उत्तरवर्ती को, यथापूर्वोक्त अनवसित भाग के लिए मूल आदेश के निबंधनों के अनुसार प्रतिभूति देने पर किसी भी समय छोड़ दिया जाएगा।
(9) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय, किसी भी समय, लेखबद्ध किए जाने वाले पर्याप्त कारणों से, इस अध्याय के अधीन अपने द्वारा किए गए किसी आदेश से निष्पादित परिशांति कायम रखने या सदाचार के लिए किसी बंधपत्र को रद्द कर सकेगा, और जिला मजिस्ट्रेट, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ऐसा रद्दकरण वहां कर सकेगा, जहां ऐसा बंधपत्र उसके आदेश के अधीन या उसके जिले में किसी अन्य न्यायालय के आदेश के अधीन निष्पादित किया गया था।
(10) किसी अन्य व्यक्ति के शांतिपूर्ण आचरण या सदाचार के लिए कोई प्रतिभू, जिसे इस अध्याय के अधीन बंधपत्र निष्पादित करने का आदेश दिया गया है, किसी भी समय ऐसा आदेश करने वाले न्यायालय को बंधपत्र रद्द करने के लिए आवेदन कर सकेगा, और ऐसा आवेदन किए जाने पर, न्यायालय समन या वारंट, जैसा वह ठीक समझे, जारी करेगा, जिसमें उस व्यक्ति से, जिसके लिए ऐसा प्रतिभू आबद्ध है, अपने समक्ष उपस्थित होने या लाए जाने की अपेक्षा की जाएगी।
(1) जब कभी जिला मजिस्ट्रेट की, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की, यह राय है कि इस अध्याय के अधीन प्रतिभूति देने में असफल रहने के कारण कारावासित कोई व्यक्ति समुदाय को या किसी अन्य व्यक्ति को संकट में डाले बिना छोड़ा जा सकता है, तब वह ऐसे व्यक्ति को उन्मोचित करने का आदेश दे सकेगा।
(2) जब कभी कोई व्यक्ति इस अध्याय के अधीन प्रतिभूति देने में असफल रहने के कारण कारावासित किया गया है, तब उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय, या जहां आदेश किसी अन्य न्यायालय द्वारा किया गया था वहां जिला मजिस्ट्रेट, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रतिभूति की रकम या प्रतिभुओं की संख्या या वह समय, जिसके लिए प्रतिभूति की अपेक्षा की गई है, कम करने वाला आदेश कर सकेगा।
(3) उपधारा (1) के अधीन आदेश ऐसे व्यक्ति के उन्मोचन का निदेश या तो बिना शर्त दे सकेगा या किन्हीं ऐसी शर्तों पर दे सकेगा, जिन्हें ऐसा व्यक्ति स्वीकार करता है:
परन्तु अधिरोपित की गई कोई शर्त तब प्रवर्तनीय नहीं रहेगी, जब वह अवधि समाप्त हो जाएगी जिसके लिए ऐसे व्यक्ति को प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया था।
(4) राज्य सरकार वे शर्तें विहित कर सकेगी, जिन पर सशर्त उन्मोचन किया जा सकेगा।
(5) यदि कोई शर्त, जिस पर किसी व्यक्ति को उन्मोचित किया गया है, जिला मजिस्ट्रेट की, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की, जिसके द्वारा उन्मोचन का आदेश किया गया था, या उसके उत्तरवर्ती की, राय में पूरी नहीं की गई है, तो वह उसे रद्द कर सकेगा।
(6) जब उन्मोचन का सशर्त आदेश उपधारा (5) के अधीन रद्द कर दिया गया है, तब ऐसा व्यक्ति किसी पुलिस अधिकारी द्वारा वारंट के बिना गिरफ्तार किया जा सकेगा, और तब वह जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष, पेश किया जाएगा।
(7) जब तक ऐसा व्यक्ति मूल आदेश के निबंधनों के अनुसार उस अवधि के अनवसित भाग के लिए प्रतिभूति न दे दे, जिसके लिए वह प्रथमतः सुपुर्द किया गया था या निरुद्ध रखे जाने का आदेश दिया गया था (ऐसा भाग उस तारीख के, जिसको उन्मोचन की शर्तों का भंग हुआ, और उस तारीख के, जिसको ऐसे सशर्त उन्मोचन के सिवाय वह छोड़े जाने का हकदार होता, बीच की अवधि के बराबर की अवधि समझा जाएगा), तब तक जिला मजिस्ट्रेट, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ऐसे व्यक्ति को ऐसा अनवसित भाग भोगने के लिए कारागार को प्रतिप्रेषित कर सकेगा।
(8) उपधारा (7) के अधीन कारागार को प्रतिप्रेषित किया गया व्यक्ति, धारा 122 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस न्यायालय या मजिस्ट्रेट को, जिसने ऐसा आदेश किया था, या उसके उत्तरवर्ती को, यथापूर्वोक्त अनवसित भाग के लिए मूल आदेश के निबंधनों के अनुसार प्रतिभूति देने पर किसी भी समय छोड़ दिया जाएगा।
(9) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय, किसी भी समय, लेखबद्ध किए जाने वाले पर्याप्त कारणों से, इस अध्याय के अधीन अपने द्वारा किए गए किसी आदेश से निष्पादित परिशांति कायम रखने या सदाचार के लिए किसी बंधपत्र को रद्द कर सकेगा, और जिला मजिस्ट्रेट, धारा 117 के अधीन किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के मामले में, या किसी अन्य मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ऐसा रद्दकरण वहां कर सकेगा, जहां ऐसा बंधपत्र उसके आदेश के अधीन या उसके जिले में किसी अन्य न्यायालय के आदेश के अधीन निष्पादित किया गया था।
(10) किसी अन्य व्यक्ति के शांतिपूर्ण आचरण या सदाचार के लिए कोई प्रतिभू, जिसे इस अध्याय के अधीन बंधपत्र निष्पादित करने का आदेश दिया गया है, किसी भी समय ऐसा आदेश करने वाले न्यायालय को बंधपत्र रद्द करने के लिए आवेदन कर सकेगा, और ऐसा आवेदन किए जाने पर, न्यायालय समन या वारंट, जैसा वह ठीक समझे, जारी करेगा, जिसमें उस व्यक्ति से, जिसके लिए ऐसा प्रतिभू आबद्ध है, अपने समक्ष उपस्थित होने या लाए जाने की अपेक्षा की जाएगी।
नए कानून में
CrPC 123BNSS 142
142. Power to release persons imprisoned for failing to give security.
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