धारा 265E · धारा 265E. मामले का निपटारा
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
265E. मामले का निपटारा
जहां धारा 265घ के अधीन मामले का संतोषप्रद निपटारा तैयार कर लिया गया है, वहां न्यायालय मामले का निपटारा निम्नलिखित रीति से करेगा, अर्थात्:—
(क) न्यायालय धारा 265घ के अधीन निपटारे के अनुसार पीड़ित को प्रतिकर अधिनिर्णीत करेगा और दंड की मात्रा पर, धारा 360 के अधीन सदाचरण की परिवीक्षा पर या भर्त्सना के पश्चात् अभियुक्त को छोड़े जाने पर, अथवा अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (1958 का 20) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अधीन अभियुक्त के साथ कार्यवाही किए जाने पर पक्षकारों को सुनेगा, और अभियुक्त पर दंड अधिरोपित करने के लिए आगे के खंडों में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का अनुसरण करेगा;
(ख) खंड (क) के अधीन पक्षकारों को सुनने के पश्चात्, यदि न्यायालय की यह राय है कि अभियुक्त के मामले में धारा 360 या अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (1958 का 20) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंध आकर्षित होते हैं, तो वह, यथास्थिति, अभियुक्त को परिवीक्षा पर छोड़ सकेगा या ऐसी किसी विधि का फायदा दे सकेगा;
(ग) खंड (ख) के अधीन पक्षकारों को सुनने के पश्चात्, यदि न्यायालय यह पाता है कि अभियुक्त द्वारा किए गए अपराध के लिए विधि के अधीन न्यूनतम दंड उपबंधित है, तो वह अभियुक्त को ऐसे न्यूनतम दंड के आधे का दंडादेश दे सकेगा;
(घ) खंड (ख) के अधीन पक्षकारों को सुनने के पश्चात् यदि न्यायालय यह पाता है कि अभियुक्त द्वारा किया गया अपराध खंड (ख) या खंड (ग) के अंतर्गत नहीं आता है, तो वह अभियुक्त को, यथास्थिति, ऐसे अपराध के लिए उपबंधित या बढ़ाए जाने योग्य दंड के एक-चौथाई का दंडादेश दे सकेगा।
जहां धारा 265घ के अधीन मामले का संतोषप्रद निपटारा तैयार कर लिया गया है, वहां न्यायालय मामले का निपटारा निम्नलिखित रीति से करेगा, अर्थात्:—
(क) न्यायालय धारा 265घ के अधीन निपटारे के अनुसार पीड़ित को प्रतिकर अधिनिर्णीत करेगा और दंड की मात्रा पर, धारा 360 के अधीन सदाचरण की परिवीक्षा पर या भर्त्सना के पश्चात् अभियुक्त को छोड़े जाने पर, अथवा अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (1958 का 20) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अधीन अभियुक्त के साथ कार्यवाही किए जाने पर पक्षकारों को सुनेगा, और अभियुक्त पर दंड अधिरोपित करने के लिए आगे के खंडों में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का अनुसरण करेगा;
(ख) खंड (क) के अधीन पक्षकारों को सुनने के पश्चात्, यदि न्यायालय की यह राय है कि अभियुक्त के मामले में धारा 360 या अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (1958 का 20) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंध आकर्षित होते हैं, तो वह, यथास्थिति, अभियुक्त को परिवीक्षा पर छोड़ सकेगा या ऐसी किसी विधि का फायदा दे सकेगा;
(ग) खंड (ख) के अधीन पक्षकारों को सुनने के पश्चात्, यदि न्यायालय यह पाता है कि अभियुक्त द्वारा किए गए अपराध के लिए विधि के अधीन न्यूनतम दंड उपबंधित है, तो वह अभियुक्त को ऐसे न्यूनतम दंड के आधे का दंडादेश दे सकेगा;
(घ) खंड (ख) के अधीन पक्षकारों को सुनने के पश्चात् यदि न्यायालय यह पाता है कि अभियुक्त द्वारा किया गया अपराध खंड (ख) या खंड (ग) के अंतर्गत नहीं आता है, तो वह अभियुक्त को, यथास्थिति, ऐसे अपराध के लिए उपबंधित या बढ़ाए जाने योग्य दंड के एक-चौथाई का दंडादेश दे सकेगा।
नए कानून में
CrPC 265EBNSS 293
293. Disposal of case.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
