धारा 243 · धारा 243. प्रतिरक्षा के लिए साक्ष्य
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
243. प्रतिरक्षा के लिए साक्ष्य
(1) तब अभियुक्त से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करे और अपना साक्ष्य पेश करे; और यदि अभियुक्त कोई लिखित कथन देता है, तो मजिस्ट्रेट उसे अभिलेख के साथ फाइल करेगा।
(2) यदि अभियुक्त, अपनी प्रतिरक्षा आरंभ कर देने के पश्चात्, मजिस्ट्रेट से यह आवेदन करता है कि वह किसी साक्षी की परीक्षा या प्रतिपरीक्षा के प्रयोजन के लिए उसकी हाजिरी के लिए, अथवा किसी दस्तावेज या अन्य चीज को पेश करने के लिए विवश करने हेतु कोई आदेशिका जारी करे, तो मजिस्ट्रेट ऐसी आदेशिका जारी करेगा, जब तक कि वह यह न समझे कि ऐसा आवेदन इस आधार पर नामंजूर किया जाना चाहिए कि वह तंग करने के या विलंब के प्रयोजन से अथवा न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के लिए किया गया है, और ऐसा आधार उसके द्वारा लिखित रूप में अभिलिखित किया जाएगा:
परन्तु जब अभियुक्त ने अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करने से पहले किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा कर ली है या उसकी प्रतिपरीक्षा करने का अवसर पा लिया है, तब ऐसे साक्षी की हाजिरी इस धारा के अधीन तब तक विवश नहीं की जाएगी, जब तक कि मजिस्ट्रेट का यह समाधान न हो जाए कि वह न्याय के उद्देश्यों के लिए आवश्यक है।
(3) मजिस्ट्रेट, उपधारा (2) के अधीन किसी आवेदन पर किसी साक्षी को समन करने से पहले, यह अपेक्षा कर सकेगा कि विचारण के प्रयोजनों के लिए हाजिर होने में साक्षी द्वारा उपगत युक्तियुक्त व्यय न्यायालय में जमा किए जाएं।
(1) तब अभियुक्त से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करे और अपना साक्ष्य पेश करे; और यदि अभियुक्त कोई लिखित कथन देता है, तो मजिस्ट्रेट उसे अभिलेख के साथ फाइल करेगा।
(2) यदि अभियुक्त, अपनी प्रतिरक्षा आरंभ कर देने के पश्चात्, मजिस्ट्रेट से यह आवेदन करता है कि वह किसी साक्षी की परीक्षा या प्रतिपरीक्षा के प्रयोजन के लिए उसकी हाजिरी के लिए, अथवा किसी दस्तावेज या अन्य चीज को पेश करने के लिए विवश करने हेतु कोई आदेशिका जारी करे, तो मजिस्ट्रेट ऐसी आदेशिका जारी करेगा, जब तक कि वह यह न समझे कि ऐसा आवेदन इस आधार पर नामंजूर किया जाना चाहिए कि वह तंग करने के या विलंब के प्रयोजन से अथवा न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के लिए किया गया है, और ऐसा आधार उसके द्वारा लिखित रूप में अभिलिखित किया जाएगा:
परन्तु जब अभियुक्त ने अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करने से पहले किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा कर ली है या उसकी प्रतिपरीक्षा करने का अवसर पा लिया है, तब ऐसे साक्षी की हाजिरी इस धारा के अधीन तब तक विवश नहीं की जाएगी, जब तक कि मजिस्ट्रेट का यह समाधान न हो जाए कि वह न्याय के उद्देश्यों के लिए आवश्यक है।
(3) मजिस्ट्रेट, उपधारा (2) के अधीन किसी आवेदन पर किसी साक्षी को समन करने से पहले, यह अपेक्षा कर सकेगा कि विचारण के प्रयोजनों के लिए हाजिर होने में साक्षी द्वारा उपगत युक्तियुक्त व्यय न्यायालय में जमा किए जाएं।
नए कानून में
CrPC 243BNSS 266
266. Evidence for defence.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
