धारा 363 · धारा 363. निर्णय की प्रति अभियुक्त और अन्य व्यक्तियों को दिया जाना
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363. निर्णय की प्रति अभियुक्त और अन्य व्यक्तियों को दिया जाना
(1) जब अभियुक्त कारावास से दंडादिष्ट किया जाता है, तब निर्णय की एक प्रति, निर्णय के सुनाए जाने के तुरंत पश्चात्, उसे नि:शुल्क दी जाएगी।
(2) अभियुक्त के आवेदन पर, निर्णय की प्रमाणित प्रति, अथवा जब वह ऐसा चाहे तब, यदि साध्य हो तो उसकी अपनी भाषा में या न्यायालय की भाषा में उसका अनुवाद, उसे विलंब रहित दिया जाएगा, और ऐसी प्रति हर उस मामले में, जिसमें निर्णय के विरुद्ध अभियुक्त द्वारा अपील की जा सकती है, नि:शुल्क दी जाएगी:
परन्तु जहां मृत्यु का दंडादेश उच्च न्यायालय द्वारा दिया या पुष्ट किया जाता है, वहां निर्णय की प्रमाणित प्रति अभियुक्त को नि:शुल्क तुरंत दी जाएगी, चाहे उसने उसके लिए आवेदन किया हो या न किया हो।
(3) उपधारा (2) के उपबंध धारा 117 के अधीन किसी आदेश के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे ऐसे निर्णय के संबंध में लागू होते हैं जिसके विरुद्ध अभियुक्त द्वारा अपील की जा सकती है।
(4) जब अभियुक्त किसी न्यायालय द्वारा मृत्यु से दंडादिष्ट किया जाता है और ऐसे निर्णय से अपील का अधिकार है, तब न्यायालय उसे उस अवधि की सूचना देगा जिसके भीतर, यदि वह अपील करना चाहता है तो, उसकी अपील की जानी चाहिए।
(5) जैसा उपधारा (2) में अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी दंड न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय या किए गए आदेश से प्रभावित कोई व्यक्ति, इस निमित्त किए गए आवेदन पर और विहित प्रभारों के संदाय पर, ऐसे निर्णय या आदेश की, अथवा अभिलेख के किसी अभिसाक्ष्य या अन्य भाग की, प्रति दिया जाएगा:
परन्तु न्यायालय, यदि वह किसी विशेष कारण से ठीक समझे तो, उसे वह नि:शुल्क दे सकेगा।
(6) उच्च न्यायालय, नियमों द्वारा, ऐसे किसी व्यक्ति को, जो किसी दंड न्यायालय के निर्णय या आदेश से प्रभावित नहीं है, ऐसे निर्णय या आदेश की प्रतियां ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसी फीसों के संदाय पर और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो उच्च न्यायालय ऐसे नियमों द्वारा उपबंधित करे, दिए जाने के लिए उपबंध कर सकेगा।
राज्य संशोधन
कर्नाटक:
धारा 363 में, उपधारा (5) के परन्तुक के पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:—
"परन्तु यह और कि राज्य को, अभियोजन अधिकारी द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर, ऐसे निर्णय, आदेश, अभिसाक्ष्य या अभिलेख की प्रमाणित प्रति, विहित पृष्ठांकन सहित, नि:शुल्क दी जाएगी।"
[कर्नाटक अधिनियम 1985 का 19, धारा 2 द्वारा (25-6-1985 से)]
(1) जब अभियुक्त कारावास से दंडादिष्ट किया जाता है, तब निर्णय की एक प्रति, निर्णय के सुनाए जाने के तुरंत पश्चात्, उसे नि:शुल्क दी जाएगी।
(2) अभियुक्त के आवेदन पर, निर्णय की प्रमाणित प्रति, अथवा जब वह ऐसा चाहे तब, यदि साध्य हो तो उसकी अपनी भाषा में या न्यायालय की भाषा में उसका अनुवाद, उसे विलंब रहित दिया जाएगा, और ऐसी प्रति हर उस मामले में, जिसमें निर्णय के विरुद्ध अभियुक्त द्वारा अपील की जा सकती है, नि:शुल्क दी जाएगी:
परन्तु जहां मृत्यु का दंडादेश उच्च न्यायालय द्वारा दिया या पुष्ट किया जाता है, वहां निर्णय की प्रमाणित प्रति अभियुक्त को नि:शुल्क तुरंत दी जाएगी, चाहे उसने उसके लिए आवेदन किया हो या न किया हो।
(3) उपधारा (2) के उपबंध धारा 117 के अधीन किसी आदेश के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे ऐसे निर्णय के संबंध में लागू होते हैं जिसके विरुद्ध अभियुक्त द्वारा अपील की जा सकती है।
(4) जब अभियुक्त किसी न्यायालय द्वारा मृत्यु से दंडादिष्ट किया जाता है और ऐसे निर्णय से अपील का अधिकार है, तब न्यायालय उसे उस अवधि की सूचना देगा जिसके भीतर, यदि वह अपील करना चाहता है तो, उसकी अपील की जानी चाहिए।
(5) जैसा उपधारा (2) में अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी दंड न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय या किए गए आदेश से प्रभावित कोई व्यक्ति, इस निमित्त किए गए आवेदन पर और विहित प्रभारों के संदाय पर, ऐसे निर्णय या आदेश की, अथवा अभिलेख के किसी अभिसाक्ष्य या अन्य भाग की, प्रति दिया जाएगा:
परन्तु न्यायालय, यदि वह किसी विशेष कारण से ठीक समझे तो, उसे वह नि:शुल्क दे सकेगा।
(6) उच्च न्यायालय, नियमों द्वारा, ऐसे किसी व्यक्ति को, जो किसी दंड न्यायालय के निर्णय या आदेश से प्रभावित नहीं है, ऐसे निर्णय या आदेश की प्रतियां ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसी फीसों के संदाय पर और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो उच्च न्यायालय ऐसे नियमों द्वारा उपबंधित करे, दिए जाने के लिए उपबंध कर सकेगा।
राज्य संशोधन
कर्नाटक:
धारा 363 में, उपधारा (5) के परन्तुक के पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:—
"परन्तु यह और कि राज्य को, अभियोजन अधिकारी द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर, ऐसे निर्णय, आदेश, अभिसाक्ष्य या अभिलेख की प्रमाणित प्रति, विहित पृष्ठांकन सहित, नि:शुल्क दी जाएगी।"
[कर्नाटक अधिनियम 1985 का 19, धारा 2 द्वारा (25-6-1985 से)]
नए कानून में
CrPC 363BNSS 404
404. Copy of judgment to be given to accused and other persons.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
