धारा 301 · धारा 301. लोक अभियोजकों द्वारा उपसंजाति
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301. लोक अभियोजकों द्वारा उपसंजाति
(1) किसी मामले का भारसाधक लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक किसी ऐसे न्यायालय के समक्ष, जिसमें वह मामला जांच, विचारण या अपील के अधीन है, बिना किसी लिखित प्राधिकार के उपसंजात हो सकेगा और पक्षकथन कर सकेगा।
(2) यदि ऐसे किसी मामले में कोई प्राइवेट व्यक्ति किसी न्यायालय में किसी व्यक्ति का अभियोजन करने के लिए किसी प्लीडर को अनुदेश देता है, तो उस मामले का भारसाधक लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक अभियोजन का संचालन करेगा, और इस प्रकार अनुदेश दिया गया प्लीडर उसमें लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक के निदेशाधीन कार्य करेगा, तथा न्यायालय की अनुज्ञा से, मामले में साक्ष्य समाप्त हो जाने के पश्चात् लिखित तर्क प्रस्तुत कर सकेगा।
राज्य संशोधन
पश्चिमी बंगाल—धारा 301 में, उपधारा (1) के स्थान पर निम्नलिखित रखी जाएगी—
"(1) (क) किसी मामले का भारसाधक लोक अभियोजक किसी ऐसे न्यायालय के समक्ष, जिसमें वह मामला जांच, विचारण या अपील के अधीन है, बिना किसी लिखित प्राधिकार के उपसंजात हो सकेगा और पक्षकथन कर सकेगा।
(ख) किसी मामले का भारसाधक सहायक लोक अभियोजक किसी ऐसे न्यायालय के समक्ष, जिसमें वह मामला जांच या विचारण के अधीन है, बिना किसी लिखित प्राधिकार के उपसंजात हो सकेगा और पक्षकथन कर सकेगा।"
[पश्चिमी बंगाल अधिनियम 1990 का 26, धारा 4 द्वारा।]
(1) किसी मामले का भारसाधक लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक किसी ऐसे न्यायालय के समक्ष, जिसमें वह मामला जांच, विचारण या अपील के अधीन है, बिना किसी लिखित प्राधिकार के उपसंजात हो सकेगा और पक्षकथन कर सकेगा।
(2) यदि ऐसे किसी मामले में कोई प्राइवेट व्यक्ति किसी न्यायालय में किसी व्यक्ति का अभियोजन करने के लिए किसी प्लीडर को अनुदेश देता है, तो उस मामले का भारसाधक लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक अभियोजन का संचालन करेगा, और इस प्रकार अनुदेश दिया गया प्लीडर उसमें लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक के निदेशाधीन कार्य करेगा, तथा न्यायालय की अनुज्ञा से, मामले में साक्ष्य समाप्त हो जाने के पश्चात् लिखित तर्क प्रस्तुत कर सकेगा।
राज्य संशोधन
पश्चिमी बंगाल—धारा 301 में, उपधारा (1) के स्थान पर निम्नलिखित रखी जाएगी—
"(1) (क) किसी मामले का भारसाधक लोक अभियोजक किसी ऐसे न्यायालय के समक्ष, जिसमें वह मामला जांच, विचारण या अपील के अधीन है, बिना किसी लिखित प्राधिकार के उपसंजात हो सकेगा और पक्षकथन कर सकेगा।
(ख) किसी मामले का भारसाधक सहायक लोक अभियोजक किसी ऐसे न्यायालय के समक्ष, जिसमें वह मामला जांच या विचारण के अधीन है, बिना किसी लिखित प्राधिकार के उपसंजात हो सकेगा और पक्षकथन कर सकेगा।"
[पश्चिमी बंगाल अधिनियम 1990 का 26, धारा 4 द्वारा।]
नए कानून में
CrPC 301BNSS 338
338. Appearance by Public Prosecutors.
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