धारा 384 · धारा 384. अपील का संक्षेपतः खारिज किया जाना
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384. अपील का संक्षेपतः खारिज किया जाना
(1) यदि अपील की अर्जी और धारा 382 या धारा 383 के अधीन प्राप्त निर्णय की प्रति की परीक्षा करने पर अपील न्यायालय यह समझता है कि हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह अपील को संक्षेपतः खारिज कर सकेगा:
परन्तु—
(क) धारा 382 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील तब तक खारिज न की जाएगी जब तक अपीलार्थी या उसके प्लीडर को उसके समर्थन में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर न मिल गया हो;
(ख) धारा 383 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील अपीलार्थी को उसके समर्थन में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना खारिज न की जाएगी, जब तक कि अपील न्यायालय यह न समझे कि अपील तुच्छ है या यह कि अभिरक्षा में के अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष पेश करने में ऐसी असुविधा अंतर्वलित होगी जो मामले की परिस्थितियों में अननुपाती होगी;
(ग) धारा 383 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील तब तक संक्षेपतः खारिज न की जाएगी जब तक ऐसी अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि समाप्त न हो गई हो।
(2) इस धारा के अधीन अपील खारिज करने से पूर्व न्यायालय मामले का अभिलेख मंगा सकेगा।
(3) जहां इस धारा के अधीन अपील खारिज करने वाला अपील न्यायालय सेशन न्यायालय या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय है, वहां वह ऐसा करने के अपने कारण अभिलिखित करेगा।
(4) जहां धारा 383 के अधीन प्रस्तुत अपील इस धारा के अधीन संक्षेपतः खारिज कर दी गई है और अपील न्यायालय यह पाता है कि उसी अपीलार्थी की ओर से धारा 382 के अधीन सम्यक् रूप से प्रस्तुत की गई अपील की कोई अन्य अर्जी उसके द्वारा विचार में नहीं ली गई है, वहां वह न्यायालय, धारा 393 में किसी बात के होते हुए भी, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक है, ऐसी अपील को विधि के अनुसार सुन सकेगा और उसका निपटारा कर सकेगा।
(1) यदि अपील की अर्जी और धारा 382 या धारा 383 के अधीन प्राप्त निर्णय की प्रति की परीक्षा करने पर अपील न्यायालय यह समझता है कि हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह अपील को संक्षेपतः खारिज कर सकेगा:
परन्तु—
(क) धारा 382 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील तब तक खारिज न की जाएगी जब तक अपीलार्थी या उसके प्लीडर को उसके समर्थन में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर न मिल गया हो;
(ख) धारा 383 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील अपीलार्थी को उसके समर्थन में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना खारिज न की जाएगी, जब तक कि अपील न्यायालय यह न समझे कि अपील तुच्छ है या यह कि अभिरक्षा में के अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष पेश करने में ऐसी असुविधा अंतर्वलित होगी जो मामले की परिस्थितियों में अननुपाती होगी;
(ग) धारा 383 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील तब तक संक्षेपतः खारिज न की जाएगी जब तक ऐसी अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि समाप्त न हो गई हो।
(2) इस धारा के अधीन अपील खारिज करने से पूर्व न्यायालय मामले का अभिलेख मंगा सकेगा।
(3) जहां इस धारा के अधीन अपील खारिज करने वाला अपील न्यायालय सेशन न्यायालय या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय है, वहां वह ऐसा करने के अपने कारण अभिलिखित करेगा।
(4) जहां धारा 383 के अधीन प्रस्तुत अपील इस धारा के अधीन संक्षेपतः खारिज कर दी गई है और अपील न्यायालय यह पाता है कि उसी अपीलार्थी की ओर से धारा 382 के अधीन सम्यक् रूप से प्रस्तुत की गई अपील की कोई अन्य अर्जी उसके द्वारा विचार में नहीं ली गई है, वहां वह न्यायालय, धारा 393 में किसी बात के होते हुए भी, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक है, ऐसी अपील को विधि के अनुसार सुन सकेगा और उसका निपटारा कर सकेगा।
नए कानून में
CrPC 384BNSS 425
425. Summary dismissal of appeal.
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