धारा 26 · धारा 26. वे न्यायालय जिनके द्वारा अपराध विचारणीय हैं
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26. वे न्यायालय जिनके द्वारा अपराध विचारणीय हैं
इस संहिता के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए,—
(क) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अधीन किसी अपराध का विचारण—
(i) उच्च न्यायालय, या
(ii) सेशन न्यायालय, या
(iii) ऐसे किसी अन्य न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसके द्वारा वह अपराध प्रथम अनुसूची में विचारणीय दिखाया गया है;
(ख) किसी अन्य विधि के अधीन किसी अपराध का विचारण, जब उस विधि में इस निमित्त कोई न्यायालय उल्लिखित है तब, ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा और जब कोई न्यायालय इस प्रकार उल्लिखित नहीं है तब,—
(i) उच्च न्यायालय, या
(ii) ऐसे किसी अन्य न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसके द्वारा वह अपराध प्रथम अनुसूची में विचारणीय दिखाया गया है।
राज्य संशोधन
उत्तर प्रदेश:
धारा 26 में, खंड (ख) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्:—
"(ख) किसी अन्य विधि के अधीन किसी अपराध का विचारण—
(i) जब उस विधि में इस निमित्त कोई न्यायालय उल्लिखित है तब, ऐसे न्यायालय द्वारा, या ऐसे न्यायालय से पंक्ति में वरिष्ठ किसी न्यायालय द्वारा, और
(ii) जब कोई न्यायालय इस प्रकार उल्लिखित नहीं है तब, ऐसे किसी न्यायालय द्वारा, जिसके द्वारा वह अपराध प्रथम अनुसूची में विचारणीय दिखाया गया है, या ऐसे न्यायालय से पंक्ति में वरिष्ठ किसी न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा।"
[उत्तर प्रदेश अधिनियम 1984 का 1, धारा 6 द्वारा (1-5-1984 से प्रभावी)]
इस संहिता के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए,—
(क) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अधीन किसी अपराध का विचारण—
(i) उच्च न्यायालय, या
(ii) सेशन न्यायालय, या
(iii) ऐसे किसी अन्य न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसके द्वारा वह अपराध प्रथम अनुसूची में विचारणीय दिखाया गया है;
(ख) किसी अन्य विधि के अधीन किसी अपराध का विचारण, जब उस विधि में इस निमित्त कोई न्यायालय उल्लिखित है तब, ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा और जब कोई न्यायालय इस प्रकार उल्लिखित नहीं है तब,—
(i) उच्च न्यायालय, या
(ii) ऐसे किसी अन्य न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसके द्वारा वह अपराध प्रथम अनुसूची में विचारणीय दिखाया गया है।
राज्य संशोधन
उत्तर प्रदेश:
धारा 26 में, खंड (ख) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्:—
"(ख) किसी अन्य विधि के अधीन किसी अपराध का विचारण—
(i) जब उस विधि में इस निमित्त कोई न्यायालय उल्लिखित है तब, ऐसे न्यायालय द्वारा, या ऐसे न्यायालय से पंक्ति में वरिष्ठ किसी न्यायालय द्वारा, और
(ii) जब कोई न्यायालय इस प्रकार उल्लिखित नहीं है तब, ऐसे किसी न्यायालय द्वारा, जिसके द्वारा वह अपराध प्रथम अनुसूची में विचारणीय दिखाया गया है, या ऐसे न्यायालय से पंक्ति में वरिष्ठ किसी न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा।"
[उत्तर प्रदेश अधिनियम 1984 का 1, धारा 6 द्वारा (1-5-1984 से प्रभावी)]
नए कानून में
CrPC 26BNSS 21
21. Courts by which offences are triable.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
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