धारा 11 · न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय।
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(1) प्रत्येक जिले में (जो महानगरीय क्षेत्र न हो) प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटों के उतने न्यायालय स्थापित किए जाएंगे, और ऐसे स्थानों पर, जैसा कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे:
1. बशर्ते कि राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, किसी स्थानीय क्षेत्र के लिए, किसी विशेष मामले या विशेष प्रकार के मामलों की सुनवाई के लिए प्रथम श्रेणी या द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटों के एक या एक से अधिक विशेष न्यायालय स्थापित कर सकती है, और जहां ऐसा कोई विशेष न्यायालय स्थापित किया जाता है, वहां स्थानीय क्षेत्र में किसी अन्य मजिस्ट्रेट न्यायालय को ऐसे किसी मामले या मामलों के वर्ग की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं होगा, जिसके लिए ऐसे विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय की स्थापना की गई है।
(2) ऐसे न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति उच्च न्यायालय द्वारा की जाएगी।
(3) उच्च न्यायालय, जब भी उसे उचित या आवश्यक प्रतीत हो, किसी सिविल न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत राज्य की न्यायिक सेवा के किसी सदस्य को प्रथम श्रेणी या द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ प्रदान कर सकता है।
राज्य संशोधन
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (केंद्र शासित प्रदेश)।--
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और लक्षद्वीप के केंद्र शासित प्रदेश
इस नियमन के अंतर्गत आने वाले केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होने वाली संहिता में, धारा 11 की उपधारा (3) में, "किसी सिविल न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्य करने वाले राज्य की न्यायिक सेवा के किसी सदस्य" के स्थान पर "किसी सिविल न्यायालय के कार्यों का निर्वहन करने वाला कोई व्यक्ति" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँगे।
[ देखें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (केंद्र शासित प्रदेश)। अधिनियम 1, 1974, धारा 4।]
उतार प्रदेश।
धारा 11 का संशोधन ।-- उक्त संहिता की धारा 11 में उपधारा (1) के बाद निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाएगी और यह सर्वसम्मत मानी जाएगी, अर्थात्:--
(1-ए) राज्य सरकार इसी प्रकार किसी विशेष मामले के संबंध में, या किसी विशेष वर्ग या विशेष वर्गों के मामलों के संबंध में, या सामान्यतः किसी स्थानीय क्षेत्र में प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों की स्थापना कर सकती है।
[उत्तर प्रदेश अधिनियम 16, 1976, धारा 3 देखें ]
बिहार
धारा 11 का संशोधन.-- दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) (जिसे इसके बाद उक्त संहिता कहा गया है) की धारा 11 की उपधारा (3) के बाद निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाएगी और इसे हमेशा से जोड़ी गई माना जाएगा, अर्थात्:--
(4) राज्य सरकार किसी स्थानीय क्षेत्र के लिए प्रथम श्रेणी या द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटों के एक या एक से अधिक न्यायालय स्थापित कर सकती है, ताकि किसी विशेष मामले या विशेष वर्ग या श्रेणियों के मामलों की सुनवाई की जा सके।
[बिहार अधिनियम 8, 1977, धारा 2 देखें ]
1. बशर्ते कि राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, किसी स्थानीय क्षेत्र के लिए, किसी विशेष मामले या विशेष प्रकार के मामलों की सुनवाई के लिए प्रथम श्रेणी या द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटों के एक या एक से अधिक विशेष न्यायालय स्थापित कर सकती है, और जहां ऐसा कोई विशेष न्यायालय स्थापित किया जाता है, वहां स्थानीय क्षेत्र में किसी अन्य मजिस्ट्रेट न्यायालय को ऐसे किसी मामले या मामलों के वर्ग की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं होगा, जिसके लिए ऐसे विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय की स्थापना की गई है।
(2) ऐसे न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति उच्च न्यायालय द्वारा की जाएगी।
(3) उच्च न्यायालय, जब भी उसे उचित या आवश्यक प्रतीत हो, किसी सिविल न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत राज्य की न्यायिक सेवा के किसी सदस्य को प्रथम श्रेणी या द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ प्रदान कर सकता है।
राज्य संशोधन
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (केंद्र शासित प्रदेश)।--
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और लक्षद्वीप के केंद्र शासित प्रदेश
इस नियमन के अंतर्गत आने वाले केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होने वाली संहिता में, धारा 11 की उपधारा (3) में, "किसी सिविल न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्य करने वाले राज्य की न्यायिक सेवा के किसी सदस्य" के स्थान पर "किसी सिविल न्यायालय के कार्यों का निर्वहन करने वाला कोई व्यक्ति" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँगे।
[ देखें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (केंद्र शासित प्रदेश)। अधिनियम 1, 1974, धारा 4।]
उतार प्रदेश।
धारा 11 का संशोधन ।-- उक्त संहिता की धारा 11 में उपधारा (1) के बाद निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाएगी और यह सर्वसम्मत मानी जाएगी, अर्थात्:--
(1-ए) राज्य सरकार इसी प्रकार किसी विशेष मामले के संबंध में, या किसी विशेष वर्ग या विशेष वर्गों के मामलों के संबंध में, या सामान्यतः किसी स्थानीय क्षेत्र में प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों की स्थापना कर सकती है।
[उत्तर प्रदेश अधिनियम 16, 1976, धारा 3 देखें ]
बिहार
धारा 11 का संशोधन.-- दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) (जिसे इसके बाद उक्त संहिता कहा गया है) की धारा 11 की उपधारा (3) के बाद निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाएगी और इसे हमेशा से जोड़ी गई माना जाएगा, अर्थात्:--
(4) राज्य सरकार किसी स्थानीय क्षेत्र के लिए प्रथम श्रेणी या द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटों के एक या एक से अधिक न्यायालय स्थापित कर सकती है, ताकि किसी विशेष मामले या विशेष वर्ग या श्रेणियों के मामलों की सुनवाई की जा सके।
[बिहार अधिनियम 8, 1977, धारा 2 देखें ]
नए कानून में
CrPC 11BNSS 9
9. Courts of Judicial Magistrates.
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