धारा 181 · धारा 181. कुछ अपराधों के मामले में विचारण का स्थान
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181. कुछ अपराधों के मामले में विचारण का स्थान
(1) ठग होने का, या ठग द्वारा की गई हत्या का, डकैती का, हत्या सहित डकैती का, डाकुओं के गिरोह का सदस्य होने का, अथवा अभिरक्षा से निकल भागने का, कोई अपराध ऐसे न्यायालय द्वारा जांचा या विचारित किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया था या अभियुक्त व्यक्ति पाया जाता है।
(2) किसी व्यक्ति के व्यपहरण या अपहरण का कोई अपराध ऐसे न्यायालय द्वारा जांचा या विचारित किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर उस व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण किया गया था, या वह ले जाया गया या छिपाया गया या निरुद्ध रखा गया था।
(3) चोरी, उद्दापन या लूट का कोई अपराध ऐसे न्यायालय द्वारा जांचा या विचारित किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया था, अथवा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह चुराई हुई संपत्ति, जो अपराध की विषय-वस्तु है, उस अपराध को करने वाले किसी व्यक्ति के कब्जे में थी, या ऐसे किसी व्यक्ति के कब्जे में थी जिसने उसे चुराई हुई संपत्ति जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह चुराई हुई संपत्ति है, प्राप्त किया या रखे रखा।
(4) आपराधिक दुर्विनियोग या आपराधिक न्यासभंग का कोई अपराध ऐसे न्यायालय द्वारा जांचा या विचारित किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया था, अथवा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर उस संपत्ति का, जो अपराध की विषय-वस्तु है, कोई भाग अभियुक्त व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया गया था या रखे रखा गया था, अथवा उसके द्वारा लौटाया जाना या उसका लेखा दिया जाना अपेक्षित था।
(5) कोई ऐसा अपराध, जिसके अंतर्गत चुराई हुई संपत्ति का कब्जा है, ऐसे न्यायालय द्वारा जांचा या विचारित किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया था, अथवा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह चुराई हुई संपत्ति ऐसे किसी व्यक्ति के कब्जे में थी, जिसने उसे चुराई हुई संपत्ति जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह चुराई हुई संपत्ति है, प्राप्त किया या रखे रखा।
(1) ठग होने का, या ठग द्वारा की गई हत्या का, डकैती का, हत्या सहित डकैती का, डाकुओं के गिरोह का सदस्य होने का, अथवा अभिरक्षा से निकल भागने का, कोई अपराध ऐसे न्यायालय द्वारा जांचा या विचारित किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया था या अभियुक्त व्यक्ति पाया जाता है।
(2) किसी व्यक्ति के व्यपहरण या अपहरण का कोई अपराध ऐसे न्यायालय द्वारा जांचा या विचारित किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर उस व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण किया गया था, या वह ले जाया गया या छिपाया गया या निरुद्ध रखा गया था।
(3) चोरी, उद्दापन या लूट का कोई अपराध ऐसे न्यायालय द्वारा जांचा या विचारित किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया था, अथवा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह चुराई हुई संपत्ति, जो अपराध की विषय-वस्तु है, उस अपराध को करने वाले किसी व्यक्ति के कब्जे में थी, या ऐसे किसी व्यक्ति के कब्जे में थी जिसने उसे चुराई हुई संपत्ति जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह चुराई हुई संपत्ति है, प्राप्त किया या रखे रखा।
(4) आपराधिक दुर्विनियोग या आपराधिक न्यासभंग का कोई अपराध ऐसे न्यायालय द्वारा जांचा या विचारित किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया था, अथवा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर उस संपत्ति का, जो अपराध की विषय-वस्तु है, कोई भाग अभियुक्त व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया गया था या रखे रखा गया था, अथवा उसके द्वारा लौटाया जाना या उसका लेखा दिया जाना अपेक्षित था।
(5) कोई ऐसा अपराध, जिसके अंतर्गत चुराई हुई संपत्ति का कब्जा है, ऐसे न्यायालय द्वारा जांचा या विचारित किया जा सकेगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह अपराध किया गया था, अथवा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह चुराई हुई संपत्ति ऐसे किसी व्यक्ति के कब्जे में थी, जिसने उसे चुराई हुई संपत्ति जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह चुराई हुई संपत्ति है, प्राप्त किया या रखे रखा।
नए कानून में
CrPC 181BNSS 201
201. Place of trial in case of certain offences.
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