धारा 305 · धारा 305. जब निगम या रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभियुक्त है तब प्रक्रिया
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305. जब निगम या रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभियुक्त है तब प्रक्रिया
(1) इस धारा में, "निगम" से निगमित कंपनी या अन्य निगमित निकाय अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी भी है।
(2) जहां कोई निगम किसी जांच या विचारण में अभियुक्त व्यक्ति है या अभियुक्त व्यक्तियों में से एक है, वहां वह उस जांच या विचारण के प्रयोजन के लिए प्रतिनिधि नियुक्त कर सकेगा और ऐसी नियुक्ति का निगम की मुद्रा के अधीन होना आवश्यक नहीं होगा।
(3) जहां किसी निगम का प्रतिनिधि उपसंजात होता है, वहां इस संहिता की यह अपेक्षा कि कोई बात अभियुक्त की उपस्थिति में की जाएगी या अभियुक्त को पढ़कर सुनाई या कथित या समझाई जाएगी, यह अर्थ रखेगी कि वह बात प्रतिनिधि की उपस्थिति में की जाएगी या प्रतिनिधि को पढ़कर सुनाई या कथित या समझाई जाएगी, और यह अपेक्षा कि अभियुक्त की परीक्षा की जाएगी, यह अर्थ रखेगी कि प्रतिनिधि की परीक्षा की जाएगी।
(4) जहां किसी निगम का प्रतिनिधि उपसंजात नहीं होता है, वहां उपधारा (3) में निर्दिष्ट कोई ऐसी अपेक्षा लागू नहीं होगी।
(5) जहां ऐसा कोई लिखित कथन फाइल किया जाता है, जो निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा (चाहे वह किसी भी नाम से पुकारा जाता हो), जिसका निगम के कार्यकलाप का प्रबंध है या जो ऐसा प्रबंध रखने वाले व्यक्तियों में से एक है, हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है और जिसमें यह कहा गया है कि कथन में नामित व्यक्ति इस धारा के प्रयोजनों के लिए निगम का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है, वहां न्यायालय, जब तक कि इसके प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा करेगा कि ऐसा व्यक्ति इस प्रकार नियुक्त किया गया है।
(6) यदि यह प्रश्न उठता है कि क्या कोई व्यक्ति, जो किसी न्यायालय के समक्ष किसी जांच या विचारण में किसी निगम के प्रतिनिधि के रूप में उपसंजात हो रहा है, ऐसा प्रतिनिधि है या नहीं, तो वह प्रश्न न्यायालय द्वारा अवधारित किया जाएगा।
(1) इस धारा में, "निगम" से निगमित कंपनी या अन्य निगमित निकाय अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी भी है।
(2) जहां कोई निगम किसी जांच या विचारण में अभियुक्त व्यक्ति है या अभियुक्त व्यक्तियों में से एक है, वहां वह उस जांच या विचारण के प्रयोजन के लिए प्रतिनिधि नियुक्त कर सकेगा और ऐसी नियुक्ति का निगम की मुद्रा के अधीन होना आवश्यक नहीं होगा।
(3) जहां किसी निगम का प्रतिनिधि उपसंजात होता है, वहां इस संहिता की यह अपेक्षा कि कोई बात अभियुक्त की उपस्थिति में की जाएगी या अभियुक्त को पढ़कर सुनाई या कथित या समझाई जाएगी, यह अर्थ रखेगी कि वह बात प्रतिनिधि की उपस्थिति में की जाएगी या प्रतिनिधि को पढ़कर सुनाई या कथित या समझाई जाएगी, और यह अपेक्षा कि अभियुक्त की परीक्षा की जाएगी, यह अर्थ रखेगी कि प्रतिनिधि की परीक्षा की जाएगी।
(4) जहां किसी निगम का प्रतिनिधि उपसंजात नहीं होता है, वहां उपधारा (3) में निर्दिष्ट कोई ऐसी अपेक्षा लागू नहीं होगी।
(5) जहां ऐसा कोई लिखित कथन फाइल किया जाता है, जो निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा (चाहे वह किसी भी नाम से पुकारा जाता हो), जिसका निगम के कार्यकलाप का प्रबंध है या जो ऐसा प्रबंध रखने वाले व्यक्तियों में से एक है, हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है और जिसमें यह कहा गया है कि कथन में नामित व्यक्ति इस धारा के प्रयोजनों के लिए निगम का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है, वहां न्यायालय, जब तक कि इसके प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा करेगा कि ऐसा व्यक्ति इस प्रकार नियुक्त किया गया है।
(6) यदि यह प्रश्न उठता है कि क्या कोई व्यक्ति, जो किसी न्यायालय के समक्ष किसी जांच या विचारण में किसी निगम के प्रतिनिधि के रूप में उपसंजात हो रहा है, ऐसा प्रतिनिधि है या नहीं, तो वह प्रश्न न्यायालय द्वारा अवधारित किया जाएगा।
नए कानून में
CrPC 305BNSS 342
342. Procedure when corporation or registered society is an accused.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
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