धारा 339 · धारा 339. पागल का नातेदार या मित्र की देखरेख में परिदान
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339. पागल का नातेदार या मित्र की देखरेख में परिदान
(1) जब कभी धारा 330 या धारा 335 के उपबंधों के अधीन निरुद्ध किसी व्यक्ति का कोई नातेदार या मित्र यह चाहता है कि वह उसकी देखरेख और अभिरक्षा में परिदत्त किया जाए, तब राज्य सरकार, ऐसे नातेदार या मित्र के आवेदन पर और उसके द्वारा ऐसी राज्य सरकार के समाधानप्रद प्रतिभूति दिए जाने पर कि परिदत्त व्यक्ति—
(क) की समुचित देखरेख की जाएगी और उसे स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति करने से निवारित किया जाएगा;
(ख) ऐसे अधिकारी के निरीक्षण के लिए और ऐसे समयों तथा स्थानों पर पेश किया जाएगा, जिनका राज्य सरकार निदेश दे;
(ग) धारा 330 की उपधारा (2) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति की दशा में, अपेक्षा किए जाने पर ऐसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा,
यह आदेश दे सकेगी कि ऐसा व्यक्ति ऐसे नातेदार या मित्र को परिदत्त कर दिया जाए।
(2) यदि इस प्रकार परिदत्त व्यक्ति किसी ऐसे अपराध का अभियुक्त है जिसका विचारण उसके विकृतचित्त होने और अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ होने के कारण मुल्तवी कर दिया गया है, और उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट निरीक्षक अधिकारी किसी समय मजिस्ट्रेट या न्यायालय को यह प्रमाणित करता है कि ऐसा व्यक्ति अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है, तो ऐसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय उस नातेदार या मित्र से, जिसे ऐसा अभियुक्त परिदत्त किया गया था, यह अपेक्षा करेगा कि वह उसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश करे, और ऐसे पेश किए जाने पर मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 332 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही करेगा तथा निरीक्षक अधिकारी का प्रमाणपत्र साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होगा।
(1) जब कभी धारा 330 या धारा 335 के उपबंधों के अधीन निरुद्ध किसी व्यक्ति का कोई नातेदार या मित्र यह चाहता है कि वह उसकी देखरेख और अभिरक्षा में परिदत्त किया जाए, तब राज्य सरकार, ऐसे नातेदार या मित्र के आवेदन पर और उसके द्वारा ऐसी राज्य सरकार के समाधानप्रद प्रतिभूति दिए जाने पर कि परिदत्त व्यक्ति—
(क) की समुचित देखरेख की जाएगी और उसे स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति करने से निवारित किया जाएगा;
(ख) ऐसे अधिकारी के निरीक्षण के लिए और ऐसे समयों तथा स्थानों पर पेश किया जाएगा, जिनका राज्य सरकार निदेश दे;
(ग) धारा 330 की उपधारा (2) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति की दशा में, अपेक्षा किए जाने पर ऐसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा,
यह आदेश दे सकेगी कि ऐसा व्यक्ति ऐसे नातेदार या मित्र को परिदत्त कर दिया जाए।
(2) यदि इस प्रकार परिदत्त व्यक्ति किसी ऐसे अपराध का अभियुक्त है जिसका विचारण उसके विकृतचित्त होने और अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ होने के कारण मुल्तवी कर दिया गया है, और उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट निरीक्षक अधिकारी किसी समय मजिस्ट्रेट या न्यायालय को यह प्रमाणित करता है कि ऐसा व्यक्ति अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है, तो ऐसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय उस नातेदार या मित्र से, जिसे ऐसा अभियुक्त परिदत्त किया गया था, यह अपेक्षा करेगा कि वह उसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश करे, और ऐसे पेश किए जाने पर मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 332 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही करेगा तथा निरीक्षक अधिकारी का प्रमाणपत्र साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होगा।
नए कानून में
CrPC 339BNSS 378
378. Delivery of person of unsound mind to care of relative or friend.
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संबंधित कानूनी धाराएँ
- संबंधितद.प्र.सं. §330धारा 330. अन्वेषण या विचारण के लंबित रहने तक विकृतचित्त व्यक्ति का छोड़ा जाना
- संबंधितद.प्र.सं. §332धारा 332. मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष अभियुक्त के हाजिर होने पर प्रक्रिया
- संबंधितद.प्र.सं. §335धारा 335. ऐसे आधार पर दोषमुक्त किए गए व्यक्ति का सुरक्षित अभिरक्षा में निरुद्ध किया जाना
