धारा 313 · धारा 313. अभियुक्त की परीक्षा करने की शक्ति
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313. अभियुक्त की परीक्षा करने की शक्ति
(1) हर जांच या विचारण में, अभियुक्त को उसके विरुद्ध साक्ष्य में प्रकट होने वाली किन्हीं परिस्थितियों का स्वयं स्पष्टीकरण देने के लिए समर्थ बनाने के प्रयोजन से, न्यायालय—
(क) किसी भी प्रक्रम पर, अभियुक्त को पहले से चेतावनी दिए बिना, उससे ऐसे प्रश्न कर सकेगा जो न्यायालय आवश्यक समझे;
(ख) अभियोजन के साक्षियों की परीक्षा हो चुकने के पश्चात् और अभियुक्त से अपनी प्रतिरक्षा के लिए कहे जाने के पहले, मामले के बारे में उससे साधारणतया प्रश्न करेगा:
परन्तु ऐसे समन-मामले में जिसमें न्यायालय ने अभियुक्त की स्वयं उपस्थिति से अभिमुक्ति दे दी है, वह खंड (ख) के अधीन उसकी परीक्षा से भी अभिमुक्ति दे सकेगा।
(2) जब अभियुक्त की उपधारा (1) के अधीन परीक्षा की जाती है तब उसे कोई शपथ नहीं दिलाई जाएगी।
(3) अभियुक्त ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार करके या उनके मिथ्या उत्तर देकर अपने को दंड का भागी नहीं बनाएगा।
(4) अभियुक्त द्वारा दिए गए उत्तर ऐसी जांच या विचारण में विचार में लिए जा सकेंगे और किसी अन्य अपराध की, जिसका उन उत्तरों से यह दर्शित होता हो कि उसने वह किया है, किसी अन्य जांच में या उसके विचारण में उसके पक्ष में या उसके विरुद्ध साक्ष्य में रखे जा सकेंगे।
(5) न्यायालय अभियुक्त से पूछे जाने वाले सुसंगत प्रश्नों को तैयार करने में अभियोजक और प्रतिरक्षा काउंसेल की सहायता ले सकेगा तथा न्यायालय अभियुक्त द्वारा लिखित कथन फाइल किए जाने की अनुज्ञा इस धारा के पर्याप्त अनुपालन के रूप में दे सकेगा।
(1) हर जांच या विचारण में, अभियुक्त को उसके विरुद्ध साक्ष्य में प्रकट होने वाली किन्हीं परिस्थितियों का स्वयं स्पष्टीकरण देने के लिए समर्थ बनाने के प्रयोजन से, न्यायालय—
(क) किसी भी प्रक्रम पर, अभियुक्त को पहले से चेतावनी दिए बिना, उससे ऐसे प्रश्न कर सकेगा जो न्यायालय आवश्यक समझे;
(ख) अभियोजन के साक्षियों की परीक्षा हो चुकने के पश्चात् और अभियुक्त से अपनी प्रतिरक्षा के लिए कहे जाने के पहले, मामले के बारे में उससे साधारणतया प्रश्न करेगा:
परन्तु ऐसे समन-मामले में जिसमें न्यायालय ने अभियुक्त की स्वयं उपस्थिति से अभिमुक्ति दे दी है, वह खंड (ख) के अधीन उसकी परीक्षा से भी अभिमुक्ति दे सकेगा।
(2) जब अभियुक्त की उपधारा (1) के अधीन परीक्षा की जाती है तब उसे कोई शपथ नहीं दिलाई जाएगी।
(3) अभियुक्त ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार करके या उनके मिथ्या उत्तर देकर अपने को दंड का भागी नहीं बनाएगा।
(4) अभियुक्त द्वारा दिए गए उत्तर ऐसी जांच या विचारण में विचार में लिए जा सकेंगे और किसी अन्य अपराध की, जिसका उन उत्तरों से यह दर्शित होता हो कि उसने वह किया है, किसी अन्य जांच में या उसके विचारण में उसके पक्ष में या उसके विरुद्ध साक्ष्य में रखे जा सकेंगे।
(5) न्यायालय अभियुक्त से पूछे जाने वाले सुसंगत प्रश्नों को तैयार करने में अभियोजक और प्रतिरक्षा काउंसेल की सहायता ले सकेगा तथा न्यायालय अभियुक्त द्वारा लिखित कथन फाइल किए जाने की अनुज्ञा इस धारा के पर्याप्त अनुपालन के रूप में दे सकेगा।
नए कानून में
CrPC 313BNSS 351
351. Power to examine accused.
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