धारा 202 · धारा 202. आदेशिका जारी करना स्थगित करना
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202. आदेशिका जारी करना स्थगित करना
(1) कोई मजिस्ट्रेट, ऐसे अपराध के परिवाद की प्राप्ति पर जिसका संज्ञान करने के लिए वह प्राधिकृत है या जो धारा 192 के अधीन उसे सौंपा गया है, यदि वह ठीक समझे तो [और उस मामले में करेगा जहां अभियुक्त ऐसे स्थान पर निवास कर रहा है जो उस क्षेत्र से परे है जिसमें वह अपनी अधिकारिता का प्रयोग करता है], अभियुक्त के विरुद्ध आदेशिका जारी करना स्थगित कर सकेगा और यह विनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए कि कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं, या तो मामले की जांच स्वयं करेगा या किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा, जिसे वह ठीक समझे, अन्वेषण किए जाने का निदेश देगा:
परन्तु अन्वेषण के लिए ऐसा कोई निदेश नहीं दिया जाएगा—
(क) जहां मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि जिस अपराध का परिवाद किया गया है वह केवल सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है; अथवा
(ख) जहां परिवाद किसी न्यायालय द्वारा नहीं किया गया है, जब तक कि परिवादी की और उपस्थित साक्षियों की (यदि कोई हों) धारा 200 के अधीन शपथ पर परीक्षा न कर ली गई हो।
(2) उपधारा (1) के अधीन जांच में मजिस्ट्रेट, यदि वह ठीक समझे तो, साक्षियों का साक्ष्य शपथ पर ले सकेगा:
परन्तु यदि मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि जिस अपराध का परिवाद किया गया है वह केवल सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है, तो वह परिवादी से यह अपेक्षा करेगा कि वह अपने सब साक्षियों को पेश करे और उनकी शपथ पर परीक्षा करेगा।
(3) यदि उपधारा (1) के अधीन अन्वेषण ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो पुलिस अधिकारी नहीं है, तो उसे उस अन्वेषण के लिए वे सब शक्तियां प्राप्त होंगी जो इस संहिता द्वारा पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को प्रदत्त हैं, सिवाय वारंट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति के।
[दंड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2005 द्वारा अंतःस्थापित]
(1) कोई मजिस्ट्रेट, ऐसे अपराध के परिवाद की प्राप्ति पर जिसका संज्ञान करने के लिए वह प्राधिकृत है या जो धारा 192 के अधीन उसे सौंपा गया है, यदि वह ठीक समझे तो [और उस मामले में करेगा जहां अभियुक्त ऐसे स्थान पर निवास कर रहा है जो उस क्षेत्र से परे है जिसमें वह अपनी अधिकारिता का प्रयोग करता है], अभियुक्त के विरुद्ध आदेशिका जारी करना स्थगित कर सकेगा और यह विनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए कि कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं, या तो मामले की जांच स्वयं करेगा या किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा, जिसे वह ठीक समझे, अन्वेषण किए जाने का निदेश देगा:
परन्तु अन्वेषण के लिए ऐसा कोई निदेश नहीं दिया जाएगा—
(क) जहां मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि जिस अपराध का परिवाद किया गया है वह केवल सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है; अथवा
(ख) जहां परिवाद किसी न्यायालय द्वारा नहीं किया गया है, जब तक कि परिवादी की और उपस्थित साक्षियों की (यदि कोई हों) धारा 200 के अधीन शपथ पर परीक्षा न कर ली गई हो।
(2) उपधारा (1) के अधीन जांच में मजिस्ट्रेट, यदि वह ठीक समझे तो, साक्षियों का साक्ष्य शपथ पर ले सकेगा:
परन्तु यदि मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि जिस अपराध का परिवाद किया गया है वह केवल सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है, तो वह परिवादी से यह अपेक्षा करेगा कि वह अपने सब साक्षियों को पेश करे और उनकी शपथ पर परीक्षा करेगा।
(3) यदि उपधारा (1) के अधीन अन्वेषण ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो पुलिस अधिकारी नहीं है, तो उसे उस अन्वेषण के लिए वे सब शक्तियां प्राप्त होंगी जो इस संहिता द्वारा पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को प्रदत्त हैं, सिवाय वारंट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति के।
[दंड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2005 द्वारा अंतःस्थापित]
नए कानून में
CrPC 202BNSS 225
225. Postponement of issue of process.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
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