धारा 192 · धारा 192. मजिस्ट्रेटों को मामलों का सौंपा जाना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
192. मजिस्ट्रेटों को मामलों का सौंपा जाना
(1) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, किसी अपराध का संज्ञान करने के पश्चात्, मामले को जांच या विचारण के लिए अपने अधीनस्थ किसी सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकेगा।
(2) प्रथम वर्ग का कोई मजिस्ट्रेट, जो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त सशक्त किया गया है, किसी अपराध का संज्ञान करने के पश्चात्, मामले को जांच या विचारण के लिए ऐसे अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकेगा, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साधारण या विशेष आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे, और तब ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या विचारण कर सकेगा।
राज्य संशोधन
पंजाब तथा संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़:
धारा 192 में, जहां कहीं "मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट" शब्द तथा "प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट" या "मजिस्ट्रेट" शब्द आते हैं, वहां क्रमशः "जिला मजिस्ट्रेट" और "कार्यपालक मजिस्ट्रेट" शब्द रखे जाएंगे।
[पंजाब अधिनियम 1983 का 22 द्वारा (27-6-1983 से प्रभावी)]
(1) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, किसी अपराध का संज्ञान करने के पश्चात्, मामले को जांच या विचारण के लिए अपने अधीनस्थ किसी सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकेगा।
(2) प्रथम वर्ग का कोई मजिस्ट्रेट, जो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त सशक्त किया गया है, किसी अपराध का संज्ञान करने के पश्चात्, मामले को जांच या विचारण के लिए ऐसे अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकेगा, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साधारण या विशेष आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे, और तब ऐसा मजिस्ट्रेट जांच या विचारण कर सकेगा।
राज्य संशोधन
पंजाब तथा संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़:
धारा 192 में, जहां कहीं "मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट" शब्द तथा "प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट" या "मजिस्ट्रेट" शब्द आते हैं, वहां क्रमशः "जिला मजिस्ट्रेट" और "कार्यपालक मजिस्ट्रेट" शब्द रखे जाएंगे।
[पंजाब अधिनियम 1983 का 22 द्वारा (27-6-1983 से प्रभावी)]
नए कानून में
CrPC 192BNSS 212
212. Making over of cases to Magistrates.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
