धारा 191 · धारा 191. अभियुक्त के आवेदन पर अंतरण
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191. अभियुक्त के आवेदन पर अंतरण
जब कोई मजिस्ट्रेट धारा 190 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन किसी अपराध का संज्ञान करता है, तब कोई साक्ष्य लिए जाने से पहले अभियुक्त को यह बताया जाएगा कि वह इस बात का हकदार है कि मामले की जांच या विचारण किसी अन्य मजिस्ट्रेट द्वारा किया जाए, और यदि अभियुक्त, या यदि एक से अधिक अभियुक्त हैं तो उनमें से कोई, संज्ञान करने वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे की कार्यवाही पर आपत्ति करता है, तो मामला ऐसे अन्य मजिस्ट्रेट को अंतरित कर दिया जाएगा, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
राज्य संशोधन
पंजाब तथा संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़:
धारा 191 में, शब्दों "धारा 190 की उपधारा (1) के खंड (ग)" के स्थान पर शब्द "धारा 190क" रखे जाएंगे तथा जहां कहीं "मजिस्ट्रेट" और "मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट" शब्द आते हैं, वहां क्रमशः "कार्यपालक मजिस्ट्रेट" और "जिला मजिस्ट्रेट" शब्द रखे जाएंगे।
[पंजाब अधिनियम 1983 का 22 द्वारा (27-6-1983 से प्रभावी)]
जब कोई मजिस्ट्रेट धारा 190 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन किसी अपराध का संज्ञान करता है, तब कोई साक्ष्य लिए जाने से पहले अभियुक्त को यह बताया जाएगा कि वह इस बात का हकदार है कि मामले की जांच या विचारण किसी अन्य मजिस्ट्रेट द्वारा किया जाए, और यदि अभियुक्त, या यदि एक से अधिक अभियुक्त हैं तो उनमें से कोई, संज्ञान करने वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे की कार्यवाही पर आपत्ति करता है, तो मामला ऐसे अन्य मजिस्ट्रेट को अंतरित कर दिया जाएगा, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
राज्य संशोधन
पंजाब तथा संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़:
धारा 191 में, शब्दों "धारा 190 की उपधारा (1) के खंड (ग)" के स्थान पर शब्द "धारा 190क" रखे जाएंगे तथा जहां कहीं "मजिस्ट्रेट" और "मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट" शब्द आते हैं, वहां क्रमशः "कार्यपालक मजिस्ट्रेट" और "जिला मजिस्ट्रेट" शब्द रखे जाएंगे।
[पंजाब अधिनियम 1983 का 22 द्वारा (27-6-1983 से प्रभावी)]
नए कानून में
CrPC 191BNSS 211
211. Transfer on application of accused.
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