धारा 18 · धारा 18. विशेष महानगर मजिस्ट्रेट
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18. विशेष महानगर मजिस्ट्रेट
(1) उच्च न्यायालय, यदि किसी केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा ऐसा करने के लिए अनुरोध किया जाए तो, ऐसे किसी व्यक्ति को, जो सरकार के अधीन कोई पद धारण करता है या धारण कर चुका है, अपनी स्थानीय अधिकारिता के भीतर के किसी महानगर क्षेत्र में विशिष्ट मामलों या मामलों के विशिष्ट वर्गों के संबंध में, वे सब या कोई शक्तियां प्रदान कर सकेगा, जो इस संहिता द्वारा या इसके अधीन महानगर मजिस्ट्रेट को प्रदत्त हैं या प्रदान की जा सकती हैं:
परन्तु किसी व्यक्ति को ऐसी कोई शक्ति तब तक प्रदान नहीं की जाएगी, जब तक कि उसमें विधि-कार्य के संबंध में ऐसी अर्हता या अनुभव न हो, जो उच्च न्यायालय, नियमों द्वारा, विनिर्दिष्ट करे।
(2) ऐसे मजिस्ट्रेट विशेष महानगर मजिस्ट्रेट कहलाएंगे और ऐसी अवधि के लिए नियुक्त किए जाएंगे, जो एक बार में एक वर्ष से अधिक न हो, जैसा उच्च न्यायालय, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, निदेश दे।
(3) उच्च न्यायालय या राज्य सरकार, जैसी भी स्थिति हो, किसी विशेष महानगर मजिस्ट्रेट को महानगर क्षेत्र से बाहर के किसी स्थानीय क्षेत्र में प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सशक्त कर सकेगी।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश:
धारा 18 की उपधारा (2) में, "एक बार में एक वर्ष से अधिक न हो" शब्दों के स्थान पर "एक बार में दो वर्ष से अधिक न हो" शब्द रखे जाएंगे, और उक्त उपधारा में निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्:—
"परन्तु ऐसा व्यक्ति, जो दंड प्रक्रिया संहिता (आंध्र प्रदेश संशोधन) अधिनियम, 1992 के प्रारंभ पर विशेष महानगर मजिस्ट्रेट का पद धारण कर रहा है और जिसने पैंसठ वर्ष की आयु पूरी नहीं की है, अपनी नियुक्ति की तारीख से दो वर्ष की अवधि तक पद धारण करता रहेगा।"
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 1992 का 2 द्वारा]
महाराष्ट्र:
धारा 18 की उपधारा (1) में, "किसी महानगर क्षेत्र में" शब्दों के स्थान पर "एक या अधिक महानगर क्षेत्रों में" शब्द रखे जाएंगे।
[महाराष्ट्र अधिनियम 1976 का 23, धारा 3 द्वारा (10-6-1976 से प्रभावी)]
(1) उच्च न्यायालय, यदि किसी केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा ऐसा करने के लिए अनुरोध किया जाए तो, ऐसे किसी व्यक्ति को, जो सरकार के अधीन कोई पद धारण करता है या धारण कर चुका है, अपनी स्थानीय अधिकारिता के भीतर के किसी महानगर क्षेत्र में विशिष्ट मामलों या मामलों के विशिष्ट वर्गों के संबंध में, वे सब या कोई शक्तियां प्रदान कर सकेगा, जो इस संहिता द्वारा या इसके अधीन महानगर मजिस्ट्रेट को प्रदत्त हैं या प्रदान की जा सकती हैं:
परन्तु किसी व्यक्ति को ऐसी कोई शक्ति तब तक प्रदान नहीं की जाएगी, जब तक कि उसमें विधि-कार्य के संबंध में ऐसी अर्हता या अनुभव न हो, जो उच्च न्यायालय, नियमों द्वारा, विनिर्दिष्ट करे।
(2) ऐसे मजिस्ट्रेट विशेष महानगर मजिस्ट्रेट कहलाएंगे और ऐसी अवधि के लिए नियुक्त किए जाएंगे, जो एक बार में एक वर्ष से अधिक न हो, जैसा उच्च न्यायालय, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, निदेश दे।
(3) उच्च न्यायालय या राज्य सरकार, जैसी भी स्थिति हो, किसी विशेष महानगर मजिस्ट्रेट को महानगर क्षेत्र से बाहर के किसी स्थानीय क्षेत्र में प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सशक्त कर सकेगी।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश:
धारा 18 की उपधारा (2) में, "एक बार में एक वर्ष से अधिक न हो" शब्दों के स्थान पर "एक बार में दो वर्ष से अधिक न हो" शब्द रखे जाएंगे, और उक्त उपधारा में निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्:—
"परन्तु ऐसा व्यक्ति, जो दंड प्रक्रिया संहिता (आंध्र प्रदेश संशोधन) अधिनियम, 1992 के प्रारंभ पर विशेष महानगर मजिस्ट्रेट का पद धारण कर रहा है और जिसने पैंसठ वर्ष की आयु पूरी नहीं की है, अपनी नियुक्ति की तारीख से दो वर्ष की अवधि तक पद धारण करता रहेगा।"
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 1992 का 2 द्वारा]
महाराष्ट्र:
धारा 18 की उपधारा (1) में, "किसी महानगर क्षेत्र में" शब्दों के स्थान पर "एक या अधिक महानगर क्षेत्रों में" शब्द रखे जाएंगे।
[महाराष्ट्र अधिनियम 1976 का 23, धारा 3 द्वारा (10-6-1976 से प्रभावी)]
नए कानून में
CrPC 18BNSS DELETED
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