धारा 237 · धारा 237. धारा 199(2) के अधीन संस्थित मामलों में प्रक्रिया
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237. धारा 199(2) के अधीन संस्थित मामलों में प्रक्रिया
(1) धारा 199 की उपधारा (2) के अधीन किसी अपराध का संज्ञान करने वाला सत्र न्यायालय मामले का विचारण, मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित मामलों से अन्यथा संस्थित वारंट-मामलों के विचारण की प्रक्रिया के अनुसार करेगा:
परन्तु वह व्यक्ति, जिसके विरुद्ध अपराध किया जाना अभिकथित है, अभियोजन के साक्षी के रूप में परीक्षित किया जाएगा, जब तक कि सत्र न्यायालय, ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएंगे, अन्यथा निदेश न दे।
(2) इस धारा के अधीन प्रत्येक विचारण बंद कमरे में किया जाएगा, यदि उसका कोई भी पक्षकार ऐसा चाहे या यदि न्यायालय ऐसा करना ठीक समझे।
(3) यदि किसी ऐसे मामले में न्यायालय सभी अभियुक्तों को या उनमें से किसी को उन्मोचित या दोषमुक्त कर देता है और उसकी यह राय है कि उनके विरुद्ध या उनमें से किसी के विरुद्ध अभियोग लगाने के लिए कोई युक्तियुक्त कारण नहीं था, तो वह अपने उन्मोचन या दोषमुक्ति के आदेश द्वारा उस व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध अपराध किया जाना अभिकथित था (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल या किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक से भिन्न), यह निदेश दे सकेगा कि वह कारण बताए कि वह ऐसे अभियुक्त को, या जहां एक से अधिक अभियुक्त हैं वहां उनमें से प्रत्येक को या किसी को, प्रतिकर क्यों न दे।
(4) न्यायालय ऐसे निदिष्ट व्यक्ति द्वारा दिखाए गए किसी कारण को अभिलिखित करेगा और उस पर विचार करेगा, और यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अभियोग लगाने के लिए कोई युक्तियुक्त कारण नहीं था, तो वह, ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएंगे, यह आदेश कर सकेगा कि ऐसे व्यक्ति द्वारा अभियुक्त को, या उनमें से प्रत्येक को या किसी को, ऐसी रकम का प्रतिकर, जो एक हजार रुपए से अधिक न हो और जैसा वह अवधारित करे, दिया जाए।
(5) उपधारा (4) के अधीन अधिनिर्णीत प्रतिकर ऐसे वसूल किया जाएगा मानो वह मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित जुर्माना हो।
(6) कोई व्यक्ति, जिसे उपधारा (4) के अधीन प्रतिकर देने का निदेश दिया गया है, ऐसे आदेश के कारण इस धारा के अधीन किए गए परिवाद के संबंध में किसी सिविल या दांडिक दायित्व से छूट नहीं पाएगा:
परन्तु इस धारा के अधीन किसी अभियुक्त व्यक्ति को दी गई कोई रकम उसी विषय से संबंधित किसी पश्चात्वर्ती सिविल वाद में ऐसे व्यक्ति को प्रतिकर अधिनिर्णीत करने में ध्यान में रखी जाएगी।
(7) वह व्यक्ति, जिसे उपधारा (4) के अधीन प्रतिकर देने का आदेश दिया गया है, उस आदेश के विरुद्ध, जहां तक वह प्रतिकर के संदाय से संबंधित है, उच्च न्यायालय में अपील कर सकेगा।
(8) जब किसी अभियुक्त व्यक्ति को प्रतिकर के संदाय का आदेश किया जाता है, तब प्रतिकर उसे अपील की उपस्थापना के लिए अनुज्ञात अवधि के बीत जाने से पहले, या यदि अपील उपस्थापित की जाती है तो अपील के विनिश्चित हो जाने से पहले, नहीं दिया जाएगा।
(1) धारा 199 की उपधारा (2) के अधीन किसी अपराध का संज्ञान करने वाला सत्र न्यायालय मामले का विचारण, मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित मामलों से अन्यथा संस्थित वारंट-मामलों के विचारण की प्रक्रिया के अनुसार करेगा:
परन्तु वह व्यक्ति, जिसके विरुद्ध अपराध किया जाना अभिकथित है, अभियोजन के साक्षी के रूप में परीक्षित किया जाएगा, जब तक कि सत्र न्यायालय, ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएंगे, अन्यथा निदेश न दे।
(2) इस धारा के अधीन प्रत्येक विचारण बंद कमरे में किया जाएगा, यदि उसका कोई भी पक्षकार ऐसा चाहे या यदि न्यायालय ऐसा करना ठीक समझे।
(3) यदि किसी ऐसे मामले में न्यायालय सभी अभियुक्तों को या उनमें से किसी को उन्मोचित या दोषमुक्त कर देता है और उसकी यह राय है कि उनके विरुद्ध या उनमें से किसी के विरुद्ध अभियोग लगाने के लिए कोई युक्तियुक्त कारण नहीं था, तो वह अपने उन्मोचन या दोषमुक्ति के आदेश द्वारा उस व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध अपराध किया जाना अभिकथित था (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल या किसी संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक से भिन्न), यह निदेश दे सकेगा कि वह कारण बताए कि वह ऐसे अभियुक्त को, या जहां एक से अधिक अभियुक्त हैं वहां उनमें से प्रत्येक को या किसी को, प्रतिकर क्यों न दे।
(4) न्यायालय ऐसे निदिष्ट व्यक्ति द्वारा दिखाए गए किसी कारण को अभिलिखित करेगा और उस पर विचार करेगा, और यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अभियोग लगाने के लिए कोई युक्तियुक्त कारण नहीं था, तो वह, ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएंगे, यह आदेश कर सकेगा कि ऐसे व्यक्ति द्वारा अभियुक्त को, या उनमें से प्रत्येक को या किसी को, ऐसी रकम का प्रतिकर, जो एक हजार रुपए से अधिक न हो और जैसा वह अवधारित करे, दिया जाए।
(5) उपधारा (4) के अधीन अधिनिर्णीत प्रतिकर ऐसे वसूल किया जाएगा मानो वह मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित जुर्माना हो।
(6) कोई व्यक्ति, जिसे उपधारा (4) के अधीन प्रतिकर देने का निदेश दिया गया है, ऐसे आदेश के कारण इस धारा के अधीन किए गए परिवाद के संबंध में किसी सिविल या दांडिक दायित्व से छूट नहीं पाएगा:
परन्तु इस धारा के अधीन किसी अभियुक्त व्यक्ति को दी गई कोई रकम उसी विषय से संबंधित किसी पश्चात्वर्ती सिविल वाद में ऐसे व्यक्ति को प्रतिकर अधिनिर्णीत करने में ध्यान में रखी जाएगी।
(7) वह व्यक्ति, जिसे उपधारा (4) के अधीन प्रतिकर देने का आदेश दिया गया है, उस आदेश के विरुद्ध, जहां तक वह प्रतिकर के संदाय से संबंधित है, उच्च न्यायालय में अपील कर सकेगा।
(8) जब किसी अभियुक्त व्यक्ति को प्रतिकर के संदाय का आदेश किया जाता है, तब प्रतिकर उसे अपील की उपस्थापना के लिए अनुज्ञात अवधि के बीत जाने से पहले, या यदि अपील उपस्थापित की जाती है तो अपील के विनिश्चित हो जाने से पहले, नहीं दिया जाएगा।
नए कानून में
CrPC 237BNSS 260
260. Procedure in cases instituted under sub-section (2) of section 222.
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