धारा 163 · उपद्रव या संभावित खतरे के तत्काल मामलों में आदेश जारी करने का अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) ऐसे मामलों में जहां किसी जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में विशेष रूप से सशक्त किसी अन्य कार्यकारी मजिस्ट्रेट की राय में, इस धारा के तहत कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार हो और तत्काल रोकथाम या शीघ्र उपाय वांछनीय हो, तो ऐसा मजिस्ट्रेट मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों को बताते हुए और धारा 153 में निर्धारित तरीके से तामील किए गए लिखित आदेश द्वारा किसी व्यक्ति को किसी निश्चित कार्य से परहेज करने या उसके कब्जे या प्रबंधन के अधीन किसी संपत्ति के संबंध में कोई निश्चित आदेश लेने का निर्देश दे सकता है, यदि ऐसा मजिस्ट्रेट मानता है कि ऐसा निर्देश किसी वैध रूप से नियोजित व्यक्ति को बाधा, असुविधा या चोट पहुंचाने, मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने, सार्वजनिक शांति भंग करने, दंगा करने या मारपीट करने से रोकने की संभावना रखता है या रोकने की प्रवृत्ति रखता है।
(2) इस धारा के तहत आदेश, आपातकालीन मामलों में या उन मामलों में जहां परिस्थितियां उस व्यक्ति को समय पर नोटिस देने की अनुमति नहीं देती हैं जिसके खिलाफ आदेश निर्देशित किया गया है, एकतरफा पारित किया जा सकता है।
(3) इस धारा के तहत आदेश किसी विशेष व्यक्ति को, या किसी विशेष स्थान या क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों को, या आम जनता को, जब वे किसी विशेष स्थान या क्षेत्र में आते-जाते हों, निर्देशित किया जा सकता है।
(4) इस धारा के अंतर्गत कोई भी आदेश जारी होने की तिथि से दो माह से अधिक समय तक लागू नहीं रहेगा:
बशर्ते कि यदि राज्य सरकार मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरे से बचाने या दंगा या किसी प्रकार की झड़प को रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक समझती है, तो वह अधिसूचना द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि इस धारा के अंतर्गत मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश उस तिथि से अधिकतम छह महीने की अतिरिक्त अवधि तक लागू रहेगा, जिस तिथि से मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश, ऐसे आदेश के अभाव में, समाप्त हो जाता, जैसा कि वह उक्त अधिसूचना में निर्दिष्ट करे।
(5) कोई मजिस्ट्रेट, या तो अपनी स्वयं की पहल पर या किसी पीड़ित व्यक्ति के आवेदन पर, स्वयं द्वारा या अपने अधीनस्थ किसी मजिस्ट्रेट द्वारा या अपने पूर्ववर्ती द्वारा इस धारा के अंतर्गत दिए गए किसी आदेश को निरस्त या परिवर्तित कर सकता है।
(6) राज्य सरकार, या तो स्वयं द्वारा या किसी पीड़ित व्यक्ति के आवेदन पर, उपधारा (4) के परंतुक के अधीन अपने द्वारा पारित किसी आदेश को निरस्त या परिवर्तित कर सकती है।
(7) जहां उपधारा (5) या उपधारा (6) के तहत कोई आवेदन प्राप्त होता है, वहां मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, आवेदक को स्वयं या किसी अधिवक्ता के माध्यम से उसके समक्ष उपस्थित होने और आदेश के विरुद्ध कारण बताने का शीघ्र अवसर प्रदान करेगी; और यदि मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, आवेदन को पूर्णतः या आंशिकतः अस्वीकार कर देती है, तो वह ऐसा करने के कारणों को लिखित में दर्ज करेगी।
(2) इस धारा के तहत आदेश, आपातकालीन मामलों में या उन मामलों में जहां परिस्थितियां उस व्यक्ति को समय पर नोटिस देने की अनुमति नहीं देती हैं जिसके खिलाफ आदेश निर्देशित किया गया है, एकतरफा पारित किया जा सकता है।
(3) इस धारा के तहत आदेश किसी विशेष व्यक्ति को, या किसी विशेष स्थान या क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों को, या आम जनता को, जब वे किसी विशेष स्थान या क्षेत्र में आते-जाते हों, निर्देशित किया जा सकता है।
(4) इस धारा के अंतर्गत कोई भी आदेश जारी होने की तिथि से दो माह से अधिक समय तक लागू नहीं रहेगा:
बशर्ते कि यदि राज्य सरकार मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरे से बचाने या दंगा या किसी प्रकार की झड़प को रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक समझती है, तो वह अधिसूचना द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि इस धारा के अंतर्गत मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश उस तिथि से अधिकतम छह महीने की अतिरिक्त अवधि तक लागू रहेगा, जिस तिथि से मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश, ऐसे आदेश के अभाव में, समाप्त हो जाता, जैसा कि वह उक्त अधिसूचना में निर्दिष्ट करे।
(5) कोई मजिस्ट्रेट, या तो अपनी स्वयं की पहल पर या किसी पीड़ित व्यक्ति के आवेदन पर, स्वयं द्वारा या अपने अधीनस्थ किसी मजिस्ट्रेट द्वारा या अपने पूर्ववर्ती द्वारा इस धारा के अंतर्गत दिए गए किसी आदेश को निरस्त या परिवर्तित कर सकता है।
(6) राज्य सरकार, या तो स्वयं द्वारा या किसी पीड़ित व्यक्ति के आवेदन पर, उपधारा (4) के परंतुक के अधीन अपने द्वारा पारित किसी आदेश को निरस्त या परिवर्तित कर सकती है।
(7) जहां उपधारा (5) या उपधारा (6) के तहत कोई आवेदन प्राप्त होता है, वहां मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, आवेदक को स्वयं या किसी अधिवक्ता के माध्यम से उसके समक्ष उपस्थित होने और आदेश के विरुद्ध कारण बताने का शीघ्र अवसर प्रदान करेगी; और यदि मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, आवेदन को पूर्णतः या आंशिकतः अस्वीकार कर देती है, तो वह ऐसा करने के कारणों को लिखित में दर्ज करेगी।
पुराने कानून में
BNSS 163CRPC 144
144.Power to issue order in urgent cases of nuisance or apprehended danger.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
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