धारा 392 · निर्णय।
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(1) मूल अधिकार क्षेत्र वाले किसी भी आपराधिक न्यायालय में प्रत्येक मुकदमे का निर्णय मुकदमे की समाप्ति के तुरंत बाद या उसके बाद पैंतालीस दिनों से अधिक समय के भीतर खुली अदालत में पीठासीन अधिकारी द्वारा सुनाया जाएगा, जिसकी सूचना पक्षकारों या उनके अधिवक्ताओं को दी जाएगी,---
(क) संपूर्ण निर्णय सुनाकर; या
(ख) पूरे फैसले को पढ़कर सुनाकर; या
(ग) फैसले के मुख्य भाग को पढ़कर और फैसले के सार को ऐसी भाषा में समझाकर जो अभियुक्त या उसके वकील को समझ में आती हो।
(2) जहाँ उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन निर्णय दिया जाता है, वहाँ पीठासीन अधिकारी उसे संक्षिप्त रूप में लिखवाएगा, प्रतिलिपि और उसके प्रत्येक पृष्ठ पर जैसे ही वह तैयार हो जाए हस्ताक्षर करेगा, हस्ताक्षर करेगा और उस पर खुले न्यायालय में निर्णय सुनाए जाने की तिथि लिखेगा।
(3) जहाँ उपधारा (1) के खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन निर्णय या उसका कार्यकारी भाग पढ़ा जाता है, जैसा भी मामला हो, तो उस पर दिनांक अंकित किया जाएगा और पीठासीन अधिकारी द्वारा खुले न्यायालय में हस्ताक्षर किए जाएंगे, और यदि वह अपने हाथ से नहीं लिखा गया है, तो निर्णय के प्रत्येक पृष्ठ पर उसके द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे।
(4) जहां उपधारा (1) के खंड (सी) में निर्दिष्ट तरीके से निर्णय सुनाया जाता है, वहां संपूर्ण निर्णय या उसकी एक प्रति पक्षकारों या उनके अधिवक्ताओं के अवलोकन के लिए नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
बशर्ते कि न्यायालय, जहां तक संभव हो, निर्णय की प्रति निर्णय की तिथि से सात दिनों की अवधि के भीतर अपने पोर्टल पर अपलोड करेगा।
(5) यदि अभियुक्त हिरासत में है, तो उसे व्यक्तिगत रूप से या ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से सुनाया गया निर्णय सुनने के लिए लाया जाएगा।
(6) यदि अभियुक्त हिरासत में नहीं है, तो न्यायालय द्वारा उसे निर्णय सुनाए जाने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया जाएगा, सिवाय इसके कि जहां मुकदमे के दौरान उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई हो और सजा केवल जुर्माने की हो या उसे बरी कर दिया गया हो:
बशर्ते कि जहां एक से अधिक आरोपी व्यक्ति हों, और उनमें से एक या अधिक व्यक्ति उस तारीख को न्यायालय में उपस्थित न हों जिस दिन निर्णय सुनाया जाना हो, तो पीठासीन अधिकारी मामले के निपटारे में अनुचित देरी से बचने के लिए, उनकी अनुपस्थिति के बावजूद निर्णय सुना सकता है।
(7) किसी भी आपराधिक न्यायालय द्वारा दिया गया कोई भी निर्णय केवल इस कारण से अमान्य नहीं माना जाएगा कि किसी पक्षकार या उसके अधिवक्ता उस दिन या उस स्थान से अनुपस्थित हैं जो निर्णय सुनाने के लिए अधिसूचित किया गया है, या पक्षकारों या उनके अधिवक्ताओं, या उनमें से किसी को, ऐसे दिन और स्थान की सूचना देने में चूक हुई है, या सूचना देने में कोई दोष है।
(8) इस धारा में किसी भी बात को धारा 511 के प्रावधानों की सीमा को किसी भी तरह से सीमित करने के रूप में नहीं समझा जाएगा।
(क) संपूर्ण निर्णय सुनाकर; या
(ख) पूरे फैसले को पढ़कर सुनाकर; या
(ग) फैसले के मुख्य भाग को पढ़कर और फैसले के सार को ऐसी भाषा में समझाकर जो अभियुक्त या उसके वकील को समझ में आती हो।
(2) जहाँ उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन निर्णय दिया जाता है, वहाँ पीठासीन अधिकारी उसे संक्षिप्त रूप में लिखवाएगा, प्रतिलिपि और उसके प्रत्येक पृष्ठ पर जैसे ही वह तैयार हो जाए हस्ताक्षर करेगा, हस्ताक्षर करेगा और उस पर खुले न्यायालय में निर्णय सुनाए जाने की तिथि लिखेगा।
(3) जहाँ उपधारा (1) के खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन निर्णय या उसका कार्यकारी भाग पढ़ा जाता है, जैसा भी मामला हो, तो उस पर दिनांक अंकित किया जाएगा और पीठासीन अधिकारी द्वारा खुले न्यायालय में हस्ताक्षर किए जाएंगे, और यदि वह अपने हाथ से नहीं लिखा गया है, तो निर्णय के प्रत्येक पृष्ठ पर उसके द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे।
(4) जहां उपधारा (1) के खंड (सी) में निर्दिष्ट तरीके से निर्णय सुनाया जाता है, वहां संपूर्ण निर्णय या उसकी एक प्रति पक्षकारों या उनके अधिवक्ताओं के अवलोकन के लिए नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
बशर्ते कि न्यायालय, जहां तक संभव हो, निर्णय की प्रति निर्णय की तिथि से सात दिनों की अवधि के भीतर अपने पोर्टल पर अपलोड करेगा।
(5) यदि अभियुक्त हिरासत में है, तो उसे व्यक्तिगत रूप से या ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से सुनाया गया निर्णय सुनने के लिए लाया जाएगा।
(6) यदि अभियुक्त हिरासत में नहीं है, तो न्यायालय द्वारा उसे निर्णय सुनाए जाने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया जाएगा, सिवाय इसके कि जहां मुकदमे के दौरान उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई हो और सजा केवल जुर्माने की हो या उसे बरी कर दिया गया हो:
बशर्ते कि जहां एक से अधिक आरोपी व्यक्ति हों, और उनमें से एक या अधिक व्यक्ति उस तारीख को न्यायालय में उपस्थित न हों जिस दिन निर्णय सुनाया जाना हो, तो पीठासीन अधिकारी मामले के निपटारे में अनुचित देरी से बचने के लिए, उनकी अनुपस्थिति के बावजूद निर्णय सुना सकता है।
(7) किसी भी आपराधिक न्यायालय द्वारा दिया गया कोई भी निर्णय केवल इस कारण से अमान्य नहीं माना जाएगा कि किसी पक्षकार या उसके अधिवक्ता उस दिन या उस स्थान से अनुपस्थित हैं जो निर्णय सुनाने के लिए अधिसूचित किया गया है, या पक्षकारों या उनके अधिवक्ताओं, या उनमें से किसी को, ऐसे दिन और स्थान की सूचना देने में चूक हुई है, या सूचना देने में कोई दोष है।
(8) इस धारा में किसी भी बात को धारा 511 के प्रावधानों की सीमा को किसी भी तरह से सीमित करने के रूप में नहीं समझा जाएगा।
पुराने कानून में
BNSS 392CRPC 353
353. Judgment.
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