धारा 363 · धारा 363: सिक्के, स्टांप-कानून या संपत्ति के खिलाफ अपराधों के लिए पहले दोषी ठहराए गए व्यक्तियों का मुकदमा
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363. (1) जहां किसी व्यक्ति को भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अध्याय उन अध्यायों में तीन साल या उससे अधिक की अवधि के कारावास का प्रावधान है, और जिस मजिस्ट्रेट के समक्ष मामला लंबित है, वह संतुष्ट है कि यह मानने का आधार है कि ऐसे व्यक्ति ने अपराध किया है, तो उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास सुनवाई के लिए भेजा जाएगा। या सत्र न्यायालय के लिए प्रतिबद्ध है, जब तक कि मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई करने के लिए सक्षम नहीं है और उसकी राय है कि यदि आरोपी को दोषी ठहराया जाता है तो वह स्वयं पर्याप्त सजा दे सकता है।
(2) जब किसी व्यक्ति को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास सुनवाई के लिए भेजा जाता है या उप-धारा (1) के तहत सत्र न्यायालय में भेजा जाता है, तो उसी जांच या मुकदमे में उसके साथ संयुक्त रूप से आरोपी किसी अन्य व्यक्ति को भी इसी तरह भेजा या प्रतिबद्ध किया जाएगा, जब तक कि मजिस्ट्रेट ऐसे अन्य व्यक्ति को, जैसी भी स्थिति हो, धारा 262 या धारा 268 के तहत आरोपमुक्त न कर दे।
(2) जब किसी व्यक्ति को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास सुनवाई के लिए भेजा जाता है या उप-धारा (1) के तहत सत्र न्यायालय में भेजा जाता है, तो उसी जांच या मुकदमे में उसके साथ संयुक्त रूप से आरोपी किसी अन्य व्यक्ति को भी इसी तरह भेजा या प्रतिबद्ध किया जाएगा, जब तक कि मजिस्ट्रेट ऐसे अन्य व्यक्ति को, जैसी भी स्थिति हो, धारा 262 या धारा 268 के तहत आरोपमुक्त न कर दे।
पुराने कानून में
BNSS 363CRPC 324
324. Trial of persons previously convicted of offences against coinage, stamp-law or property.
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